BHRAMAR KA DARD AUR DARPAN

Saturday, August 1, 2020

फूल खिले हरियाली है


छिट पुट रंग बिरंगे बादल,
हवा बहुत मतवाली है
तरुवर से तांबे के सूरज
फूल खिले हरियाली है
कूके कोयल, कलरव अद्भुत
झूले अंबवा डाली है
बाग - बाग मन उड़े भ्रमर
मन खिला नटी संग प्यारी है



दे ऐसा आशीष मुझे माँ आँखों का तारा बन जाऊं

No comments:

Post a Comment

दे ऐसा आशीष मुझे माँ आँखों का तारा बन जाऊं
अभिनन्दन आप का ,हिंदी बनाने का उपकरण ऊपर लगा हुआ है -आप की प्रतिक्रियाएं हमें ऊर्जा देती हैं -शुक्ल भ्रमर ५