BHRAMAR KA DARD AUR DARPAN

Saturday, February 27, 2021

तिरछे नैनों से संधान मत कर प्रिये

तिरछे नैनों से संधान मत कर प्रिये
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तिरछे नैनों से संधान मत कर प्रिये
छलनी दिल में भी मूरत दिखेगी तेरी
ढूंढता पूजता रात दिन मै जिसे
प्यासा चातक निगाहें तो बरसें तेरी
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मोम की तू बनी लेे के कोमल हिया
मत जला मुझको री तू पिघल जाएगी
प्रेम दर्पण में तेरे है अटका जिया
कंकरी मार सौ - सौ तू बन जाएगी
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फूल कोमल सुकोमल मेरी जान री
कांटा ही मै सही प्रहरी पहचान हूं
खुश्बू बिखराए मादक नशेमन अरी
करता गुंजन ' भ्रमर ' मै तेरी शान हूं
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चांद  है तू  चकोरा मै इक टक लखूं
सांस कमतर हुई कल चली जाएगी
प्रेम रस दे भिगो बदली - बिजली सहूं
मेनका इन्द्र धनु कितना तरसाएगी
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सुरेन्द्र कुमार शुक्ल भ्रमर5
उत्तर प्रदेश , भारत
दे ऐसा आशीष मुझे माँ आँखों का तारा बन जाऊं

23 comments:

  1. जी नमस्ते ,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा सोमवार ( 01 -03 -2021 ) को 'मौसम ने ली है अँगड़ाई' (चर्चा अंक-3992) पर भी होगी।आप भी सादर आमंत्रित है।

    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।

    #रवीन्द्र_सिंह_यादव

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  2. बहुत बहुत धन्यवाद रवीन्द्र भाई, रचना को आपने मान दिया सुखद लगा, राधे राधे

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  3. प्रेम रस में डूबी सुंदर पंक्तियां ..अनोखी रचना..मेरे ब्लॉग पर आपका हार्दिक स्वागत है ..

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  4. बहुत ही सुंदर सृजन मन मुग्ध हो गया।
    सादर

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  5. प्रेमपगी रचना । बहुत खूब

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  6. प्रणाम भ्रमर जी, बहुत सुंदर कव‍िता ...वाह...क‍ि
    चांद है तू चकोरा मै इक टक लखूं
    सांस कमतर हुई कल चली जाएगी..क्या खूब ही कहा..

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  7. बहुत सुन्दर

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  8. आभार जिज्ञासा जी , रचना को आप ने सराहा खुशी मिली

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  9. स्वागत है अनीता जी आप का , बहुत बहुत आभार आप का प्रोत्साहन हेतु

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  10. बहुत बहुत धन्यवाद संगीता जी ये प्रेमासिक्त कविता आप के मन को छू सकी हर्ष हुआ

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  11. बहुत सुन्दर भावाभिव्यक्ति ।

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  12. नमस्ते, सदा आप का मंगल हो अलकनंदा जी, रचना की कुछ पंक्तियां आप के मनको छू सकी दिल खुश हुआ

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  13. हार्दिक आभार आपका मित्र ओंकार जी रचना को सराहने हेतु आते रहिए

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  14. आभार आप का मीना जी प्रोत्साहन कृपया बनाए रखें

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  15. आपके ब्लॉग पर आ कर सुखद अनुभूति हुई। आपके इस ब्लॉग को मैं follow करना शुरू कर रही हूं। मेरे सभी ब्लॉगस् पर आपका सदैव स्वागत है।
    सादर,
    डॉ. वर्षा सिंह

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  16. कृपया मेरे ब्लॉग
    विचार वर्षा
    पर भी पधारें।
    सादर,
    डॉ. वर्षा सिंह

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  17. बहुत सुंदर रचना।

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  18. चांद है तू चकोरा मै इक टक लखूं
    सांस कमतर हुई कल चली जाएगी
    प्रेम रस दे भिगो बदली - बिजली सहूं
    मेनका इन्द्र धनु कितना तरसाएगी

    बेहद सुंदर अभिव्यक्ति,सादर नमन

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  19. बहुत बहुत आभार वर्षा जी , स्वागत है आप का इस ब्लॉग पर, आप के ब्लॉग विचार वर्षा का मै भी अनुशरण कर रहा हूँ , राधे राधे

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  20. हार्दिक आभार ज्योति जी रचना को मान देने के लिए , राधे राधे

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  21. हार्दिक आभार कामिनी जी , रचना की ये कुछ पंक्तियाँ आप के मन को छू सकी ख़ुशी हुयी

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  22. बहुत बहुत धन्यवाद संजय भाई रचना को मान दिया आप ने

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दे ऐसा आशीष मुझे माँ आँखों का तारा बन जाऊं
अभिनन्दन आप का ,हिंदी बनाने का उपकरण ऊपर लगा हुआ है -आप की प्रतिक्रियाएं हमें ऊर्जा देती हैं -शुक्ल भ्रमर ५