BHRAMAR KA DARD AUR DARPAN

Tuesday, October 19, 2021

पक्षियों की सहायता करें

कभी कभी इन पक्षियों और बेजुबानों को भी हमारी आप की जरूरत पड़ती है , जब ये बीमार हों , लड़ भिड़ के आए हों घायल हो के तब। पिछली बार ऐसे दो मेहमान आए थे दो रात यहां घर में पड़ाव डाले फिर उड़ गए। इस बार ये काफी बीमार है पेट इनका बहुत खराब है और एक पैर भी लोड नही ले पा रहा आगे चोंच के बल लुढ़क जा रहे । एक रात तो यहां गुजर गई। देखो क्या होगा। प्रभु कृपा हो। राधे राधे। दे ऐसा आशीष मुझे माँ आँखों का तारा बन जाऊं

Saturday, October 9, 2021

उठा पटक बस टांग खींच ले




तुमने सोचा उड़ लेता हूं
ऊंचे ऊंचे हूं आकाश मेंr
ऊंचे उड़ते बहुत जीव हैं
सगे संबंधी हूं प्रकाश में
......
नही जानते कुछ ऐसे भी
घात लगाए बस उड़ान में
जितना भी मजबूत घोंसला
घात लगाए सदा ताक में
.......
पंख का ऊपर नीचे होना
चारे का धरती पर होना
मत भूलो उड़ उड़ कर जीना
पल छिन का कमजोर खिलौना
.......
छापामार लड़ाई अब तो
फन में माहिर कई गोरिल्ला
शंख बजे ना नियम ताक पे
ना अंधियारा लाल न पीला
..........
उठा पटक बस टांग खींच ले
चित चाहे जैसे भी कर दो
लोग हजारों साथ हैं तेरे
जब चाहो तब दंगल जीतो
.......
सच्चाई भी दब जाती है
भीड़ की मार बहुत जालिम है
झूंठ चिढ़ाते मुंह घूमे फिर
शान्ति द्रौपदी की मानिंद है
.......
सुरेंद्र कुमार शुक्ल भ्रमर 5
प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश 
भारत।



दे ऐसा आशीष मुझे माँ आँखों का तारा बन जाऊं

Wednesday, October 6, 2021

मां शैल पुत्री











*नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं*
*माँ भगवती आप सब की सारी मनोकामना पूर्ण करें* 
*माँ दुर्गा से मेरी प्रार्थना है कि ...*
*आप सब को सदा खुश रखें, सभी  स्वस्थ, धन, वैभव लाभ करें  मां की ममता , प्रेम , शौर्य से सभी समृद्धिशाली बनें, और आप सब प्रतिदिन नित नई सफलता की नई कहानी लिखें*
*जय माता दी*
*शुभ प्रभात*
मार्कण्डेय पुराण के अनुसार, देवी का शैलपुत्री नाम हिमालय के यहां जन्म होने से पड़ा। मां शैलपुत्री को अखंड सौभाग्य का प्रतीक भी माना जाता है। इनकी पूजन विधि कुछ इस प्रकार है।

1)मां की पूजन विधि

सबसे पहले चौकी पर माता शैलपुत्री की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। इसके बाद गंगा जल या गोमूत्र से शुद्धिकरण करें। चौकी प

र चांदी, तांबे या मिट्टी के घड़े में जल भरकर उस पर नारियल रखकर कलश स्थापना करें। उसी चौकी पर श्रीगणेश, वरुण, नवग्रह, षोडश मातृका (16 देवी), सप्त घृत मातृका (सात सिंदूर की बिंदी लगाएं) की स्थापना भी करें। इसके बाद व्रत, पूजन का संकल्प लें और वैदिक एवं सप्तशती मंत्रों द्वारा मां शैलपुत्री सहित समस्त स्थापित देवताओं की षोडशोपचार पूजा करें। इसमें आवाहन, आसन, पाद्य, अर्घ्य, आचमन, स्नान, वस्त्र, सौभाग्य सूत्र, चंदन, रोली, हल्दी, सिंदूर, दूर्वा, बिल्वपत्र, आभूषण, पुष्प-हार, सुगंधित द्रव्य, धूप-दीप, नैवेद्य, फल, पान, दक्षिणा, आरती, प्रदक्षिणा, मंत्र पुष्पांजलि आदि करें। तत्पश्चात प्रसाद वितरण कर पूजन संपन्न करें।  

वन्दे वांछित लाभाय चन्द्राद्र्वकृतशेखराम्। वृषारूढ़ा शूलधरां यशस्विनीम्॥

अर्थ- देवी वृषभ पर विराजित हैं। शैलपुत्री के दाहिने हाथ में त्रिशूल है और बाएं हाथ में कमल पुष्प सुशोभित है। यही नवदुर्गाओं में प्रथम दुर्गा है। नवरात्रि के प्रथम दिन देवी उपासना के अंतर्गत शैलपुत्री का पूजन करना चाहिए।

नवरात्र के 9 दिन भक्ति और साधना के लिए बहुत ही पवित्र माने गए हैं। इसके पहले दिन शैलपुत्री की पूजा अर्चना की जाती है। शैलपुत्री हिमालय राज की पुत्री हैं। हिमालय पर्वतों का राजा है। वह अडिग है, उसे कोई हिला नहीं सकता। जब हम भक्ति का रास्ता चुनते हैं तो हमारे मन में भी भगवान के लिए इसी तरह का अडिग विश्वास होना चाहिए, तभी हम अपने लक्ष्य तक पहुंच सकते हैं। यही कारण है कि नवरात्र के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है।
नित्य कवच , कीलक, अर्गला श्रोत का पाठ करें दुर्गा सप्तशती का विधिवत पाठ कर मां  का ध्यान करें।
...............
सुरेंद्र कुमार शुक्ल भ्रमर 5
प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश भारत।
🙏🙏🙏🙏🙏

दे ऐसा आशीष मुझे माँ आँखों का तारा बन जाऊं

Tuesday, October 5, 2021

हिंसा का औचित्य कहां अब


हिंसा का औचित्य कहां अब
सन्मुख बैठो बात करो
उठा तिरंगा शांति दूत बन
पीछे ना आघात करो
.....
राज तंत्र से मन खट्टा जो
न्याय तंत्र विश्वास करो
काले गोरे नहीं लड़ाई
अपने सब तुम ध्यान रखो
........
कट्टरता आतंक है खांई
खोल आंख पहचान करो
तेरा मेरा घर ना भाई
काल अग्नि सम ध्यान धरो
.........
दंभ वीरता का ना भरना
उनकी मां भी वीर जनी हैं
अस्त्र शस्त्र सब राख ही होना
दावानल की नही कमी है
.......
सागर है उस पार नहीं कुछ
भ्रम मत पालो बढ़े चलो
कुछ मांझी तैराक बहुत हैं
साथ चलो कुछ मोती ढूंढो
.........
दीवाली का दिया जलाओ
घर आंगन कुटिया रहने दो
दर्द दिए मां नही रुलाओ
अश्रु प्रलय से जग बचने दो
.........
सुरेंद्र कुमार शुक्ल भ्रमर 5
प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश 
भारत। 5.10.2021



दे ऐसा आशीष मुझे माँ आँखों का तारा बन जाऊं

Sunday, October 3, 2021

विश्व प्रकृति दिवस, आओ पेड़ लगाएं

मेरे प्यारे मित्रों आज विश्व प्रकृति दिवस है, प्रकृति है तो हम हैं , प्रकृति की गोद में ही हम फलते फूलते हैं जीते हैं खेलते हैं सीखते हैं विकास करते हैं इस लिए अपनी मां जननी सरीखी इस प्रकृति के लिए सदा हम कुछ करते रहें हरे भरे पेड़ पौधे फूल घाटियां पर्वत झरने चिड़िया जानवर तरह तरह के जीव और प्यारे बच्चे किस का मन नहीं मोह लेते लेकिन जब हम अपने को बहुत ज्ञानी ध्यानी मान प्रकृति और पर्यावरण को दरकिनार कर स्वार्थ वश विध्वंशक चीजों को अपना कर केवल धन कमाने में लगे रहते हैं और प्रकृति की उपेक्षा करते हैं पेड़ पौधे काट डालते हैं तालाब को पाट रहे नदियों को समेट कर वहां घर बना रहे पर्वतों के आधार को अनायास हर तरफ काटे जा रहे तो विभीषिका भी हमारे सामने आती है और हम इंसान इतने ताकतवर हो भी प्रकृति की मार के आगे एक पल नही ठहरते आइए पेड़ लगाएं , सब को तो अपने पास ये अवसर नहीं होगा तो जहां भी अवसर मिले पार्क स्कूल सड़क आदि के पास ही सही , पेड़ लगाएं लगवाएं और यथा संभव उसे बड़े होने तक देख रेख में भी सहयोग देते रहें । 
फिर देखिए अपनी प्रकृति का प्रेम ।
शुभ प्रभात प्रभु कृपा सब पर बनी रहे।

सुरेंद्र कुमार शुक्ल भ्रमर 5
प्रतापगढ़
उत्तर प्रदेश , भारत।



दे ऐसा आशीष मुझे माँ आँखों का तारा बन जाऊं

Monday, August 30, 2021

प्रकट हुए प्रभु नैना छलके

कान्हा कृष्णा मुरली मनोहर आओ प्यारे आओ

व्रत ले शुभ सब -नैना तरसें और नहीं तरसाओ
जाल –जंजाल- काल सब काटे बन्दी गृह में आओ
मातु देवकी पिता श्री को प्रकटे तुम हरषाओ
भादों मास महीना मेघा तड़ित गरज मतवारे
तरु प्राणी ये प्रकृति झूमती भरे सभी नद नाले
कान्हा कृष्णा मुरली मनोहर आओ प्यारे आओ
व्रत ले शुभ सब – नैना तरसें और नहीं तरसाओ














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बारह बजने से पहले ही –सब- बंदी गृह में सोये
प्रकट हुए प्रभु नैना छलके माता गदगद होये
एक लाल की खातिर दुनिया आजीवन बस रोये
जगत के स्वामी कोख जो आये सुख वो वरनि न जाये
दैव रूप योगी जोगी सब नटखट रूप दिखाये
बाल रूप माता ने चाहा गोद में आ फिर रोये
सूप में लाल लिए यमुना जल सागर कैसे जाएँ
हहर -हहर कर उफन के यमुना चरण छुएं घट जाएँ
सब के हिय सन्देश गया सब भक्त ख़ुशी से उछले
आरति वंदन भजन कीर्तन थाली सभी बजाये
आज मथुरा में हाँ आज गोकुला में छाई खुशियाली
श्याम जू पैदा भये …………….



सुरेन्द्र कुमार शुक्ल भ्रमर 5
प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश, भारत।
फोटो साभार गूगल/ नेट से।


दे ऐसा आशीष मुझे माँ आँखों का तारा बन जाऊं

Wednesday, August 25, 2021

एक दिन हो जाना है राख

जी, कितने आए कितने चले गए , मोह माया है सब , 
*********

ये तेरा है ये मेरा है
लड़ते रहे बनी ना बात,
खून जिस्म में कमा के लाते
फिर भी सुनते सौ सौ बात
मुंह फेरे सब अपनी गाते
अपनी ढपली अपना राग,
बूढ़ा पेड़ नए तरुवर से
उलझ कहां टिकता दमदार,
पानी खाद तो मिलना दूभर
बने खोखला गिरती डाल,
कुछ है हरा फूल फल गिरते
आंधी कभी, कभी वज्रपात,
पेड़ जीव या मानव तन हो,
मिलती जुलती एक कहानी,
आज खंडहर रोता कहता
एक थे राजा एक थी रानी,
जब तक दम है आओ खेलें
बोलें डोलें हंस मुस्का लें,
वे अबोध हैं क्रोध छोड़ दो
माफ करो कुछ बनेगी बात,
आग लगी है हवन सुगंधित
चाहे जितना कर पवित्र ले,
घी डालो या चंदन खुशबू,
पानी डालो या फिर पीटो, 
एक दिन हो जाना है राख, 
यही तो है सब की औकात.........

सुरेंद्र कुमार शुक्ल भ्रमर5
प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश।


दे ऐसा आशीष मुझे माँ आँखों का तारा बन जाऊं

Saturday, August 21, 2021

भैया का गहना है बहना

बहना मेरी दूर पड़ा मै दिल के तू है पास
अभी बोल देगी तू "भैया" सदा लगी है आस 



 मुन्नी -गुडिया प्यारी मेरी तू है मेरा खिलौना 
मै मुन्ना-पप्पू-बबलू हूँ बिन तेरे मेरा क्या होना ! -
 तू ही मेरी सखी सहेली कितना खेल खिलाया कभी -कभी मेरी नाक पकड़ के तूने बहुत चिढाया ! 
थाली में तू अपना हिस्सा चोरी से था डाल खिलाया
जान से प्यारी मेरी बहना भैया का गहना है बहना !! 

जब एकाकी मै होता हूँ सजी थाल तेरी वो दिखती
चन्दन जभी लगाती थी तू पूजा- मेरी आरती- करती ! 


रक्षा -बंधन और मिठाई दस-दस पकवान पकाती थी 
 बाँध दिया बंधन से तूने ये अटूट रक्षा जो करता 
मेरी बहना सदा निडर हो ख़ुशी रहे दिल हर पल कहता
जहाँ रहे तू जिस बगिया में हरी-भरी हो फूल खिले हों
 ऐसे ही ये प्यारा बंधन सब मन में हो -गले लगे हों 
 तू गंगा गोदावरी सीता तू पवित्र मेरी पावन गीता 
तेरी राखी आई पाया चूम इसे मै गले लगाया 
 कितने दृश्य उभर आये रे आँख बंद कर हूँ मै बैठा 
जैसे तू है बांधे राखी मन -सपने-उड़ता मै "पाखी" 
 तेरी रक्षा का प्रण बहना रग-रग में राखी दौडाई 
और नहीं लिख पाऊँ बहना आँख छलक मेरी भर आई 
सुरेन्द्र कुमार शुक्ल भ्रमर ५
प्रतापगढ़ , उत्तर प्रदेश, भारत

दे ऐसा आशीष मुझे माँ आँखों का तारा बन जाऊं