Monday, March 7, 2011

आँखें खोलो देखो कैसे – “गंगा मैली”- ‘लाल’ हो रहा- जल यमुना का -shuklabhramar5-kavita-hindi

 आँखें खोलो
देखो कैसे – “गंगा मैली”-
लाल हो रहा- जल यमुना का
बढ़ा जा रहा- चढ़ा जा रहा
जीवन लेता-काल सरीखा
अली-"अलि" चिल्लाता-काला
भौंरा घूमे -विश्व -बंधु सा
राजा- ढोल बजाता है
कहीं पुजारी-मठाधीश
संग-मंत्री गाना गाता है
"संसद" वहीँ चलाता है
जंगल में भटके लोगों
से बढ़कर हैं 'दो' -'चार'
गुप्त खजाना-अस्त्र- सस्त्र ले  
करते हम पर राज
जो चाहे वो नीति बनाते
नियम तोड़ते -घूमे-बोले
"अपना मूल अधिकार"
"न्याय" तो सोता -कुम्भकर्ण सा
करवट भी गर बदले
धन-धमकी-धर्म-नीति सब

चढ़े-तराजू -  "जस्टिस" बदले 
बाप मरा -बेटा फिर लड़ता 
गठरी बांधे रोज -रगड़ता
बीस साल से -बीस कोस तक
कोर्ट -कचहरी -हर पंचायत !!

भोला मन -अब 'फास्ट- ट्रैक' है
सभी चीज का 'शोर्ट-कट' है
कहीं लाटरी -जुआ दौड़ है
रेस -कोर्स है -दांव लगा है
बड़े लोग-बाजार होड़ है
अन्दर झांको -सभी बिका है
पहचाने चेहरे -'मेरे' -'अपने ' 
बेंच -खोंच में सभी लगे हैं

आँखें खोलो  - देखो कैसे
'कचरा' सारा बाहर आता
"बदबू" से -'मैले' से अपने
कैसे सब को गन्दा करता
शुद्ध -परिष्कृत -  इसको भाई
कर पावो तो कर डालो ! या
इसे गाड़ दो -  नहीं - जला दो
" एक जगह ही मैला कर ले

मत लावो गंगा-यमुना में
"गाँठ" बाँध के -जोड़ -जोड़ के
ये बहने हैं- माँ है अपनी 
यही शारदा -संस्कृति अपनी
श्वेत   धरा है
सदियों से ये खिला 'कमल' है
"कीचड़" में भी !!!!
 इन्हें बचा लो  
 इन्हें बचा लो …
जितनी दूर चले ये 'मैला'
"गंध"-"वायु" सब करे विषैला
जानो तुम - पहचानो इसको
"दूषित" दुनिया अभी बचा लो
आँखें खोलो
देखो कैसे गंगा मैली
लाल हो रहा जल यमुना का
बढ़ा जा रहा- चढ़ा जा रहा
जीवन लेता-काल सरीखा

शुक्लाभ्रमर५

2 comments:

डॉ॰ मोनिका शर्मा said...

एक अर्थपूर्ण रचना .....

surendrashuklabhramar said...

प्रिय डाक्टर मोनिका जी धन्यवाद --आप की पहली प्रतिक्रिया हमारे ब्लॉग पर -देख- हर्ष हुआ -कृपया अपना अनमोल सुझाव और आलोचना हेतु जुड़े रहिये --अपना स्नेह बनाये रखें -जिससे आगे बढ़ा जा सके -शुक्लाभ्रमर५