Thursday, May 26, 2011

बलात्कार – रो रो माँ का हाल बुरा था छाती पीट-पीट चिल्लाये


जब जब मै स्कूल चली
तोते सा फिर माँ ने मुझको
रोज सिखाया – रोज पढाया
क्षुद्र जीव हैं इस समाज में
भोली सूरति उनकी
प्यार से कोई पुचकारेंगे
कोई लालच देंगे तुझको
कोई चन्दन कही लगाये
तिलक लगाये भी होंगे
बूढ़ा या फिर जवां कही !
आँखें देख सजग हो जाना
भाषा दृग की समझ अभी !!
मतलब से बस मतलब रखना
अगर जरुरी कुछ – बस कहना !
मौन भला- गूंगी ही रहना !!
बेटी – देखा- ही ना होता !
मन में- काला तम -भी होता !!
“नाग” सा जो “कुंडली” लपेटे
“डंस” जाने को आतुर होता !!
ये सब गढ़ी पुरानी बातें
इस युग में मुझको थी लगती
टूट चुकी हूँ उस दिन से मै
माँ के अपने चरण में गिरती !!
अंकल-दोस्त – बनाती सब को
मेरी सहेली एक विचरती
सदा फूल सी खिलती घूमी
सब से उसने प्यार किया
शाम सवेरे बिन डर भय के
आँखों को दो चार किया !!
प्रेम – प्रेम -में अंतर कितना
घृणा कहाँ से आती !
माँ की अपनी बातें उसको
मै रहती समझाती !!
खिल्ली मेरी उड़ाती रहती
जरा नहीं चिंतन करती
उस दिन गयी प्रशिक्षण को जब
शाम थी फिर गहराई
माँ बाबा मछली सा तडपे
नैन से सारा आंसू सूखा
बात समझ न आई !!
कुछ अपनों को गृह में ला के
रोते घूमे सारी रात !
ना रिश्ते में ना नाते में
खोज खोज वे गए थे हार !!
काला मुह अपना ना होए
कुछ भी समझ न आये !
कभी होश में बकते जाते
बेहोशी भी छाये !!
दिन निकला फिर बात खुल गयी
पुलिस- लोग -सब -आये
ढूंढ ढूंढ फिर “नग्न” खेत में
क्षत – विक्षत -बेटी को पाए
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खून बहा था गला कसा था
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(फोटो साभार गूगल से )
आँखें शर्मसार हो जाएँ !
“कुत्तों” ने था छोड़ा उसको
“कुत्ते” पास में कुछ थे आये !!
रो रो माँ का हाल बुरा था
छाती पीट पीट चिल्लाये
देख देख ये हाल जहाँ का
छाती सब की फट फट जाये
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Cute-Baby-Girl-Weeping
(फोटो साभार गूगल/नेट से )
पल में चूर सपन थे सारे !
पढना लिखना उड़ना जग में
चिड़ियों सा वो मुक्त घूमना
लिए कटोरी दूध बताशा
माँ दौड़ी दौड़ी थक जाये !!
बचपन दृश्य घूम जाता सब
लक्ष्मी –दुर्गा- चंडी -झूंठे
आँखे फटी फटी पत्थर सी
पत्थर की मूरति झूंठलाये !!
कितने पापी लोग धरा पर
जाने क्यों जग जनम लिए
मर जाते वे पैदा होते
माँ उनकी तब ही रो लेती
रोती आज भी होगी वो तो
क्या उनसे सुख पाए ???
उसका भी काला मुँह होगा
जो बेटा वो अधम नीच सा
बलात्कार में पकड़ा जाए !
दोनों माँ ही रोती घूमें
रीति समझ ना आये !!
पकड़ो इनको बाँधो इनको
कोर्ट कचहरी मत भेजो
मुह इनका काला करके सब
मारो पत्थर- गधे चढ़ाये -
जूता चप्पल हार पिन्हाये
मूड मुड़ाये – नोच नोच
कुछ “उस” बच्ची सा लहू निकालो !
लौट के फिर भाई मेरे सब
इनकी नाक वहीँ रगडा दो !!
आधा इनको गाड़ वहीँ पर
उन कुत्तो को वहीँ बुला लो
वे थोडा फिर रक्त चाट लें
इस का रक्त भी इसे पिला दो !!
क्या क्या सपने देख गया मै
दिवा स्वप्न सब सारे
पागल बौराया जालिम मै
ऐसी बातें मत सोचो तुम
जिन्दा जो रहना है तुम को !
दफ़न करो ना कब्र उघारो !!
वही कहानी लिखा पढ़ी फिर
पञ्च बुलाये कफ़न डाल दो
गंगा जमुना ले चल कर फिर
उनको अपनी रीति दिखा दो !!
हिम्मत हो तो कोर्ट कचहरी
अपना मुह काला करवाओ
दौड़ दौड़ जब थक जाओ तो
क्षमा मांग फिर हाथ मिलाओ !!
नहीं तंत्र सब घेरे तुझको
खाना भी ना खाने देगा !
जीना तो है दूर रे भाई
मरने भी ना तुझको देगा !!
कर बलात जो जाये कुछ भी
बलात्कार कहलाये ???
वे मूरख है या पागल हैं
नाली के कीड़े हैं क्या वे ?
मैला ही बस उनको भाए !
नीच अधम या कुत्ते ही हैं
बोटी नोच नोच खुश होयें !!
इनके प्रति भी मानवता
का जो सन्देश पढाये
रहें लचीले ढीले ढाले
कुर्सी पकडे -धर्म गुरु या
अपने कोई -उनको -अब बुलवाओ
वे भी देखें इनका चेहरा
उडती चिड़िया कटा हुआ पर
syedtajuddin__Death of a injured bird
(सभी फोटो गूगल नेट से )
रक्त बहा वो -चीख यहाँ की
तब गूंगे हो जाएँ !!!
शुक्ल भ्रमर ५
२३.०५.२०११ जल पी बी




दे ऐसा आशीष मुझे माँ आँखों का तारा बन जाऊं

8 comments:

Jyoti Mishra said...

very intense !!!
Really a post worth reading.

Surendrashukla" Bhramar" said...

ज्योति मिश्रा जी -
बहुत बहुत धन्यवाद आप का -आप इन दानवों के खत्म करने के आह्वान में शामिल हुयीं -इस दर्द को समझी जो की हमारे समाज के लिए एक अभिशाप है -
आओ सब मिल हाथ मिलाएं- सजग रहें- इन्हें सबक सिखाएं -
प्रोत्साहन के लिए धन्यवाद
शुक्ल भ्रमर ५

Jyoti Mishra said...

Indeed its the biggest curse in India and the other world

Surendrashukla" Bhramar" said...

ज्योति जी- आप शत प्रतिशत सच कह रही हैं काश सब लोग मिल इस अभिशाप से मुक्ति का प्रण करें हमारा लचर कानून इसका मूल रूप से जिम्मेदार है - धन्यवाद

CS Devendra K Sharma "Man without Brain" said...

bas itna keh sakta hun ki jo dard ye rachna samete hue hai
padhne walo ko stabdh aur ye kukritya karne walo ko sharmsaar karne ke liye kafi hai.....

Surendrashukla" Bhramar" said...

सी यस देवेन्द्र के शर्मा जी -मैन विद फुल ऑफ़ ब्रेन -जी बहुत ही सुन्दर कहा आप ने काश ये मन के मरे हुए लोग शर्म को जानते और शर्म सार होते -इन को तो पकड़ के शर्म सिखाना पड़ता है नाक रगड़ना और थूक चाटना पड़ता है फिर मुंह में रुमाल बांधे मरे हुए से कोर्ट कचहरी भीड़ में दीखते हैं -

धन्यवाद आप का

शुक्ल भ्रमर ५

Amrita Tanmay said...

वर्तमान हालात और आम इंसान की सोच को इस रचना में आपने बखूबी पिरोया है..बहुत ही उम्दा प्रस्तुती आपकी ..ह्रदय को चीड़ देने वाली ..प्रभावी ...

Surendrashukla" Bhramar" said...

अमृता जी नमस्कार
सच कहा आप ने ह्रदय विदीर्ण करने वाली और एक सत्य कथा पर आधारित है ये -रचना कारगर रही सुन हर्ष हुआ प्रोत्साहन के लिए बधाई
शुक्ल भ्रमर ५