Saturday, February 4, 2012

सांप सरीखे घर के लोग ? चुनाव


(फोटो साभार गूगल/नेट से लिया गया )
हमारा हिंदुस्तान
भेंडिया धंसान
एक भेंड कुएं में कूदी की बस
कुवां भर गया
उनका काम हो गया
शातिर लोग कुछ को खिला पिला
माथे पे बलि का चन्दन लगा
हमारे ही बीच से अगुवा बना …
तालियों की गड़गड़ाहट
पराये मुंह मियाँ मिट्ठू बन
मूरख मंच से ‘मुन्ना” काका
तोते से पढ़ पढ़ा सीख आये
पंद्रह दिन कोशिश करते जोर लगाए
बेटा बहु बेटी को आंगन की चौपाल में
“एक” दिन रविवार को जुटा पाए
विकास गली हैण्ड पम्प चक रोड
रोड पुल स्कूल पंचायत भवन
मंहगाई डायन तक सब ने अंगुली उठाई
लेकिन जब एकजुट होने की
वोट देने की -न देने की बात आई
भ्रष्टाचार के मुद्दे पे बात आई
तो विजय चिन्ह वी की ऊँगली ना उठ पायी
एक एक कर सरकने लगे
सांप सरीखे  घर के लोग ?
जाते जाते मुन्ना को सुना गए …
कौन देगा कोचिंग टिउसन बिल्डिंग फीस
ब्लड प्रेशर सुगर डॉ आपरेशन की फीस
डीजल पम्प खाद मजदूरी लों
गिरता कच्चा घर रोटी तेल नोन
लैपटाप प्रोजेक्ट मोटर साईकल
चार पहिया दसियों लाख
निकम्मों की डिमांड है
दहेज़ के दानव का असर देखो
विक्षिप्त बेटी -…
पढ़ी लिखी ढांचा सी ….
घुटन से कैसे बीमार है
सिसकती बीबी उस और मुह फेर कर
आँसू टपकाते बैठ गयी
“मुन्ना” काका खुरपी पलरी लिए
दस विस्वा जमीन -दस प्राणी ….
जोर से साँस लेते भरते आह
ताकने लगे आसमान !!——–
सुरेन्द्र शुक्ल भ्रमर ५
४.२५-५ पूर्वाह्न
कुल्लू यच पी
४.२.२०१२




दे ऐसा आशीष मुझे माँ आँखों का तारा बन जाऊं

2 comments:

Surendra shukla" Bhramar"5 said...

RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा February 5, 2012
व्यंग्यात्मक कविता के लिए बधाई!! भ्रमर जी.

surendra shukla bhramar5 के द्वारा February 5, 2012
प्रिय राजीव जी अभिवादन और स्वागत आप का ..
ये कविता व्यंग्य से भी कुछ सन्देश दे सकी सुन ख़ुशी हुयी काश लोग अपने घरों से शुरुआत करें
आभार
भ्रमर ५
Santosh Kumar के द्वारा February 5, 2012
आदरणीय भ्रमर जी ,.सादर नमन
बढ़िया अभिव्यक्ति आपकी ,.हमारी जिम्मेदारिया और आवश्यकताए हमें कमजोर बनाती हैं ,.क्या करेंगे ,.सभी आम लोगों की यही कहानी है ,.और यही लोकतंत्र का काला पहलू भी है ,.साधुवाद और हार्दिक शुभकामनाये.

surendra shukla bhramar5 के द्वारा February 5, 2012
प्रिय संतोष जी सच कहा आप ने यही लोकतंत्र का काला पहलु है हमारी कमजोरियों को ही तो लोग आंकते हैं बुद्धिजीवी लोग परख जांच के मोहरे बना लेते है और फिर उनकी चल निकलती है
जय श्री राधे
भ्रमर ५
Rajkamal Sharma के द्वारा February 5, 2012
आदरणीय भ्रमर जी ….. सादर अभिवादन !
दूल्हा बिकता है बोलो खरीदोगे
यह तो हमेशा ही सुनने में आता है
लेकिन वोट बिकाऊ है बोलो कितने में खरीदोगे ?
लेकिन यह जुमला तो कभीकभार ही देखने सुनने में आता है …..
काश एक पूरे घर कि बिकाऊ सारी वोटो से
किसी मुन्नी का घर बस सकता तो लोकतंत्र कि सार्थकता सिद्द हो जाती …..
हमारे यहाँ पर मुन्नी नेता लोगों कि खातिर “बदनाम” तो हो जाती है
लेकिन कभी भी “आबाद” नहीं हो पाती …..
बोलो भंवरी के भँवर कि जय
हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा
जय श्री राधे कृष्ण











surendra shukla bhramar5 के द्वारा February 5, 2012
अरे भाई राज जी ये मुन्ना काका को कोई मोल भाव ही नहीं दिया आप ने मुन्नी का जुमला …अरे एक एक वोटों की खातिर कितने नोटों का प्रबंध संसद तक में लहराए गए नोट ये तो पूरे घर की बात है एक घर फिर दो फिर ….
क्यों संदेह है आप को इतने में …
सच कहा आप ने बर्बाद ही होती है आबाद कहाँ ? भ्रष्टाचारी बन के लोगों को लगता है माल पानी आ गया सब काम आसन लेकिन जद तक सोच ही नहीं जाती जिसके लिए ये रुपया कमाना वो क्यों उसी भ्रष्ट व्यवस्था के लिए ही ..
आभार
जय श्री राधे
भ्रमर ५
डॉ॰ सूर्या बाली "सूरज" के द्वारा February 5, 2012
सुरेन्द्र भाई नमस्कार ! बिलकुल मज़ा आ गया …..मैं समझ नहीं पा रहा हूँ कि क्या आपने छोड़ा…एक इंसान के सभी दुख दर्द नेताओं कि कलाकार/ मक्कारी सब कुछ तो कह डाला…. समसामयिक प्रस्तुति बंधुवर !आपकी इस सुंदर कविता मे पूरा जहां समेट लेने के लिए बहुत बहुत बधाई!!

surendra shukla bhramar5 के द्वारा February 5, 2012
प्रिय डॉ सूर्य बाली जी बहुत बड़ा सम्मान दे दिया आप ने इस रचना को जिसमे घर परिवार नेता की मक्कारी सब दृष्टिगोचर हुयी लिखना सार्थक रहा हम आप के आभारी है अपना स्नेह और प्रोत्साहन बनाए रखें अभी आप से बहुत कुछ सीखना है ये कलम चलने का संबल देते रहिये ..
भ्रमर ५
abodhbaalak के द्वारा February 5, 2012
भ्रमर जी
ये तो आपने एक आम इंसान की व्यथा …………….
सच से भरी हुई …….
http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

surendra shukla bhramar5 के द्वारा February 5, 2012
प्रिय अबोध जी रचना आम आदमी के दर्द और आज के उस के हालत को दर्शा सकी लिखना सार्थक रहा
आभार आप का
प्रोत्साहन देते रहें
भ्रमर ५

Surendra shukla" Bhramar"5 said...

Tamanna के द्वारा February 6, 2012
शुक्ल जी, इस रचना के माध्यम से आपने बहुत गंभीर विषय को उठाया है. बहुत बढ़िया लेखन
http://tamanna.jagranjunction.com/2012/01/28/rahul-gandhi-as-a-prime-minister-who-will-be-indias-next-prime-minister/

surendr shukl bhramar5 के द्वारा February 6, 2012
प्रिय तमन्ना जी जय श्री राधे – इस रचना में गंभीर विषय तो है ही ये हमारे आप के सब के घर की ही बात है जहां से इसकी शुरुआत होती है और जो अंत में शिकार भी होते हैं इस के ..काश लोग समझें ..
आभार
भ्रमर ५
yogi sarswat के द्वारा February 6, 2012
आप बातों बातों में किसी गंभीर विषय को भी कैसे कविता का रूप दे डालते हैं , भ्रमर साब कोई आपसे सीखे ! हर बार की तरह उच्च स्टार की रचना ! बधाई
http://yogensaraswat.jagranjunction.com/2012/01/30

surendr shukl bhramar5 के द्वारा February 6, 2012
प्रिय योगी सारस्वत जी सब आप सब का आशीष है सरल शब्द हैं मन की कह डालते हैं और जब आप सब को अच्छा लगता है कुछ सन्देश जाता है तो मन अभिभूत हो जाता है ..
जय श्री राधे
अपना स्नेह बनाए रखें
भ्रमर ५
mparveen के द्वारा February 6, 2012
सुरेंदर जी नमस्कार,
बहुत सुंदर रचना . बधाई सवीकार करें ….

surendr shukl bhramar5 के द्वारा February 6, 2012
आदरणीया परवीन जी बहुत बहुत आभार …रचना आप को सुन्दर लगी कुछ सन्देश गया लिखना सार्थक रहा
आभार
भ्रमर ५
nishamittal के द्वारा February 6, 2012
किसी भी रोचक ,गम्भीर या फिर व्यंग्य को कविता का रूप देना आपकी विशेषता है,शुक्ल जी.

surendr shukl bhramar5 के द्वारा February 6, 2012
आदरणीया निशा जी बहुत अच्छा लगा आप से ये प्रोत्साहन पा के कि
किसी भी रोचक ,गम्भीर या फिर व्यंग्य को कविता का रूप देना आपकी विशेषता है,शुक्ल जी….
ख़ुशी हुयी आप के दिल की बात सुन ..प्रोत्साहन और अपना आशीष कृपा करके देती रहें …
आभार
भ्रमर ५
munish के द्वारा February 5, 2012
वाह भ्रमरजी वाह ……. एक कविता में सब कुछ कह डाला, आपने एक साथ व्यंग भी कहा और व्यथा भी कही…… गागर में सागर …..!http://munish.jagranjunction.com/2012/02/03/%E0%A4%9C%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A4%B2-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%9C%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A4%B2%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9C/

surendr shukl bhramar5 के द्वारा February 6, 2012
प्रिय मुनीश भाई आभार आप का , रचना व्यंग्य और व्यथा हमारे समाज की कुछ दिखा सखी लिखना सार्थक रहा आभार
भ्रमर ५
akraktale के द्वारा February 5, 2012
भ्रमर जी सादर नमस्कार,
हमारा हिंदुस्तान
भेंडिया धंसान
एक भेंड कुएं में कूदी की बस
कुवां भर गया
उनका काम हो गया
अतिसुन्दर सारा सार तो यहीं है.बधाई.

surendr shukl bhramar5 के द्वारा February 6, 2012
प्रिय अशोक जी जय श्री राधे ..सच में सार तो यही है रचना का की हम अपने दिलो दिमाग को ताक पर रख चल पड़ते हैं जो सुने सुनाये जिसकी हवा बनी वह जीत गया बस …
आभार प्रोत्साहन हेतु
भ्रमर ५
ANAND PRAVIN के द्वारा February 5, 2012
आदरनिये भ्रमर सर, प्रणाम
जब भी आपकी कविता पढता हूँ मुझे एक कोमल भाव आ जाता है, आप आहिस्ता – आहिस्ता अपने शब्दों को ऊँचाइयों पर ले जातें है, हालांकि सच कहूंगा मुंझे कुछ लाइने समझ में नहीं आई
पर ना जाने क्यूँ मुझे ये कविता पढ़ कर दशम वर्ग की मसहूर कविता “भिक्षुक” की याद आ गयी
अब आपके लिए और क्या कहूँ बस इससे और तीन – चार बार पढता हूँ शायद मैं पूरा अर्थ समझ जाऊं
धन्यवाद

surendr shukl bhramar5 के द्वारा February 6, 2012
प्रिय आनंद जी अभिवादन …इस रचना को आप ने दशम वर्ग के भिक्षुक से तुलना कर मान दिया बड़ी ख़ुशी हुयी ..ये कुछ सन्देश तो प्रसारित कर सकी ..बिलकुल सरल भाषा है गाँव और चुनाव की तस्वीर है जो हम सब झेल रहे हैं हमारे घर परिवार में से ही किसी को मोहरा बना नेता लोग अपना मकसद पूरा करते है यही सब ..
जय श्री राधे
भ्रमर ५
chandrajeet के द्वारा February 5, 2012
आप की यह रचना बहुत सुन्दर , सराहनीय ….
अवश्य पढ़े…. “अगर ये बाहुबली हैं तो —- ये बाहुबली अच्छे हैं ! “आत्म चिंतन ” ”
इस पर आपके विचार जानने को इच्छुक हूँ !
http://chandrajeet.jagranjunction.com/

surendra shukla bhramar5 के द्वारा February 6, 2012
प्रिय चंद्रजीत जी अभिवादन और अभिनंदन आप का यहाँ पर रचना आप को सुंदर और सराहनीय लगी सुन ख़ुशी हुयी
अवश्य हम बाहुबली पर पहुंचेगे …
आभार
भ्रमर ५