Tuesday, January 17, 2012

मेरा भारत महान


मेरा भारत महान
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ऊपर से हरा भरा दीखता
लहलहाता -झूमता ये पेड़
पोपला है
अन्दर से खोखला है
इस के अन्दर रहते बड़े-बच्चे
कभी कभी जब ये
भाँप जाते हैं
आंक जाते हैं भविष्य
आंधी तूफ़ान में
स्थिर रहना
ढहने से बच जाना
तो उड़ जाते हैं
जो उड़ पाते हैं
images
(फोटो साभार गूगल /नेट से )
कभी -कभी बच्चों को
भगवान् के रहमो करम पर छोड़
उधर प्रवासियों के पैरों में
डाल दी जाती हैं
जंजीर मोटी-मोटी
तमाशा बना दिया जाता है उन्हें
सीमा पार कभी स्वतः
कभी कुछ ले दे कबूतर बाजी से
जबरन धकेल दिया जाता है
इधर कुछ को जिन्हें दिन में भी
अब भी नहीं दीखता -सूझता
अंधे हो -खोद -खोद और खोखला बना रहे
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कुछ इसी में रह भी रहे
खा रहे निठल्ले -बैठे
कितने बेईमान
दांतों तले अंगुली दबा
लोग कहते हैं दुनिया के
हे ! भगवान धन्य है तू
तू है महान !
जो अब भी चलाता जा रहा है
धड़ल्ले से ये हिन्दुस्तान !
और हम साल भर रोते -रोते
गाते आ रहे गर्व से
१५ अगस्त और २६ जनवरी को
मेरा भारत महान !!
मेरा भारत महान !!
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शुक्ल भ्रमर ५
६-६.२२ पूर्वाह्न
यच पी
११.१२.२०११



दे ऐसा आशीष मुझे माँ आँखों का तारा बन जाऊं

15 comments:

रेखा said...

बहुत सही और सटीक लिखा है आपने ..

कुश्वंश said...

अच्छी कविता लिखी है भावपूर्ण

Pallavi said...

जोश पूर्ण भी ...

Kailash Sharma said...

बहुत सुन्दर और सटीक प्रस्तुति..

Surendra shukla" Bhramar"5 said...

आदरणीय कुश्वंश जी अभिवादन ..कविता भावपूर्ण लगी और आप के मन को छू सकी सुन हर्ष हुआ ..
आभार
भ्रमर ५

Surendra shukla" Bhramar"5 said...

पल्लवी जी अभिवादन ..कविता जोशपूर्ण लगी और आप ने सराहा लिखना सार्थक रहा
आभार
भ्रमर ५

Surendra shukla" Bhramar"5 said...

आदरणीय कैलाश शर्मा जी अभिवादन ..कविता की प्रस्तुति अच्छी और सटीक लगी आप ने सराहा लिखना सार्थक रहा
आभार
भ्रमर ५

dheerendra said...

बहुत सार्थक प्रस्तुति, सुंदर रचना,बेहतरीन पोस्ट....
new post...वाह रे मंहगाई...

Surendra shukla" Bhramar"5 said...

प्रिय धीरेन्द्र जी रचना की प्रस्तुति आप को भाई सुन ख़ुशी हुयी
आभार
भ्रमर५

डॉ.मीनाक्षी स्वामी said...

सुदंर पोस्ट।

गिरिजा कुलश्रेष्ठ said...

शुक्ल जी आपकी कविता में सच्चाई है और अच्छे तरीके से व्यक्त हुई है लेकिन मातृभूमि तो महान ही होती है । जो कुछ गलत है वह लोगों के कारण ही है । कथा-कहानी पर आने का शुक्रिया ।

Shanti Garg said...

बहुत बेहतरीन और प्रशंसनीय.......
मेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत है।

Surendra shukla" Bhramar"5 said...

डॉ मीनक्षी स्वामी जी अभिवादन और अभिनन्दन आप का यहाँ ..रचना आप के मन को भायी सुन ख़ुशी हुयी
आभार
भ्रमर ५

Surendra shukla" Bhramar"5 said...

आदरणीया गिरिजा जी अभिवादन बहुत सुन्दर कहा आप ने अपना देश और मातृभूमि सब से बढ़ कर है लोग अगर सुधर जाएँ तो क्यों हमें ये सब सुनना सहना पड़े ..
आभार
भ्रमर ५

Surendra shukla" Bhramar"5 said...

आदरणीया शांति जी अभिवादन रचना आप के मन को छू सकी बेहतरीन लगी सुन हर्ष हुआ
भ्रमर ५