Saturday, January 7, 2012

BHRAMAR KA DARD AUR DARPAN: नारी

BHRAMAR KA DARD AUR DARPAN: नारी: (फोटो साभार गूगल/नेट से ) नारी ————- श्वेत विन्दु -हिम अंचल उपजी पुरुष-जटा -तृण-पत्थर उलझी है गंगा सी धारा शीतल -पावन -करती जाती भूख...

दे ऐसा आशीष मुझे माँ आँखों का तारा बन जाऊं

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