Tuesday, June 25, 2013

छटपटाया बहुत चाँद

छटपटाया बहुत चाँद
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रात बारिस बहुत जोर की थी प्रिये
देख चेहरा तेरा चाँद में खो गया
चाँद भी टिमटिमाता रहा रात भर
सौ सौ बादल उसे घेर आते रहे


फब्तियां कुछ कसे दूर से उड़ चले
कुछ चिढाये डरा जैसे छू ही लिए
लाल भूरे कई दौड़े छू के गए
कारे कजरारे गरजे डराते रहे
छटपटाया बहुत चाँद निकला जरा
राह थोड़ी कभी मुझसे मिलता रहा
छुप भी जाता कभी श्वेत आँचल रहा
मुझसे छुप छुप के नजरें मिलाता रहा
दूर मजबूर बंधन मै जकड़ा रहा
कल्पनाओं भरे ख्वाब खेला बढ़ा


मै चकोरा  अरे चाँद तू है मेरा
गूंगा गुड खाए मस्ती में बढ़ता रहा
बोल ना मै  सका गर्जनाएं बढीं
वर्जनाएं बढीं पग भी ठिठके रहे


छटपटाता रहा चाँद डरता रहा
लाख मिन्नत भरी राह करता रहा
काले बादल अरे ! दानवों से बढे
तम था गहराया लील चन्दा लिए
चाँद आता है क्यों चांदनी देने को ?
हो अँधेरा यहाँ रातें काली रहें
देव -मानव रहें  डर से भयभीत हो
दैत्य दानव करें राज कलयुग ही हो

चमकी आँखें मेरी कौंध बिजली पडी
चाँद मुस्काया बांछें मेरी खिल गयीं
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all the photos taken from google//net with thanks
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सुरेन्द्र कुमार शुक्ल भ्रमर ५
७. ५ ० पूर्वाह्न -८. १ ० पूर्वाह्न

१४ . ६ . २ ० १ ३



दे ऐसा आशीष मुझे माँ आँखों का तारा बन जाऊं

24 comments:

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया said...

बहुत बढ़िया,सुंदर प्रस्तुति,,,बधाई

Recent post: एक हमसफर चाहिए.

संजय भास्‍कर said...

प्रेरणादायी अति सुन्दर रचना..
:-)

दिलबाग विर्क said...

आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 27/06/2013 को चर्चा मंच पर होगा
कृपया पधारें
धन्यवाद

Surendra shukla" Bhramar"5 said...

आदरणीय दिलबाग जी आभार आप का रचना आप के मन को छू सकी सुन ख़ुशी हुयी चर्चा मंच के लिए इसे आप ने चुना अच्छा लगा
भ्रमर ५

Surendra shukla" Bhramar"5 said...

संजय भाई जय श्री राधे ..रचना की गहराइयों को आप ने समझा और ये प्रेरणा दाई लगी सुन ख़ुशी हुयी
आभार
भ्रमर ५

Surendra shukla" Bhramar"5 said...

आदरणीय धीरेन्द्र भाई प्रोत्साहन के लिए आभार
भ्रमर ५

Asha Saxena said...

सुन्दर और भाव पूर्ण रचना बहुत अच्छी लगी सुरेन्द्र जी |
आशा

Surendra shukla" Bhramar"5 said...

आदरणीया आशा जी जय श्री राधे स्वागत है आप का इस मंच पर ....रचना आप को अच्छी लगी और आप का स्नेह मिला ख़ुशी हुयी आभार
भ्रमर ५

दिगम्बर नासवा said...

उत्तम प्रस्तुति ... भावपूर्ण प्रस्तुति ...

Madan Mohan Saxena said...

बहुत सटीक लिखा है ...बेहतरीन भाव हैं

Pallavi saxena said...

अनुपम भाव संयोजन लिए बेहतरीन भावभिव्यक्ति।

Surendra shukla" Bhramar"5 said...

आदरणीय दिलबाग जी बहुत सुन्दर चर्चा रही ..आज के हालत की छवियाँ दिल छू गयीं ..मेरे ब्लाग से भी आप ने छटपटाया बहुत चाँद को चुन हर्ष हुआ
..जय श्री राधे ..बधाई
भ्रमर ५

Shalini Rastogi said...

आपकी यह उत्कृष्ट रचना कल दिनांक 30 जून 2013 को http://blogprasaran.blogspot.in/ ब्लॉग प्रसारण पर लिंक की गई है , कृपया पधारें व औरों को भी पढ़े...

Shalini Rastogi said...

आपकी यह उत्कृष्ट रचना कल दिनांक 30 जून 2013 को http://blogprasaran.blogspot.in/ ब्लॉग प्रसारण पर लिंक की गई है , कृपया पधारें व औरों को भी पढ़े...

Neeraj Kumar said...

बहुत ही उत्कृष्ट ,, बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति .. आपकी इस रचना के लिंक की प्रविष्टी सोमवार (01.07.2013) को ब्लॉग प्रसारण पर की जाएगी. कृपया पधारें .

Surendra shukla" Bhramar"5 said...

प्रिय नीरज जी जय श्री राधे रचना आप के मन को छू सकी लिखना सार्थक रहा चर्चा मंच के बाद ब्लॉग प्रसारण के लिए इसे फिर से आप ने भी चुन बहुत ख़ुशी हुयी
आभार
भ्रमर ५

Ramakant Singh said...

चमकी आँखें मेरी कौंध बिजली पडी
चाँद मुस्काया बांछें मेरी खिल गयीं
खुबसूरत खुबसूरत और खुबसूरत

Ramakant Singh said...

चमकी आँखें मेरी कौंध बिजली पडी
चाँद मुस्काया बांछें मेरी खिल गयीं
खुबसूरत खुबसूरत और खुबसूरत

Surendra shukla" Bhramar"5 said...

प्रिय रमाकांत जी अभिनंदन है आप का इस ब्लॉग पर रचना आप के मन को छू सकी लिखना सार्थक रहा आभार
भ्रमर ५

Surendra shukla" Bhramar"5 said...

प्रिय नीरज जी जय श्री राधे चर्चा मंच के पश्चात इस रचना को आप ने भी ब्लॉग प्रसारण के लिए चुना बहुत ख़ुशी हुयी आभार
भ्रमर ५

Surendra shukla" Bhramar"5 said...


dhanyvad<ahref=”http://surenshuklabhramar.blogspot.com/”

Surendra shukla" Bhramar"5 said...

dhanyvad,<ahref=”http://surenshuklabhramar.blogspot.com/”

Swapnil Shukla said...

वाह ! शानदार प्रस्तुति . एक - एक शब्द का चयन बहुत ही खूबसूरती से किया गया है .बधाई .

मेरा ब्लॉग स्वप्निल सौंदर्य अब ई-ज़ीन के रुप में भी उपलब्ध है ..एक बार विसिट अवश्य करें और आपकी महत्वपूर्ण टिप्पणियों व सलाहों का स्वागत है .आभार !

website : www.swapnilsaundaryaezine.hpage.com

blog : www.swapnilsaundaryaezine.blogspot.com

-स्वप्निल शुक्ला

Surendra shukla" Bhramar"5 said...

स्वप्निल जी बहुत अच्छा लगा आपने इस रचना को सराहा और अपने नए वेब साईट की जानकारी भी दी हमने देखा बिभिन्न विषय पर सुन्दर लेखन और उपयोगी ...
भ्रमर ५