BHRAMAR KA DARD AUR DARPAN

Friday, April 24, 2015

ये लाल कभी माँ कह दे



ये लाल कभी माँ कह दे 

देदीप्यमान है मेरा 
ये घर -ये महल 
नौकर चाकर सब 
लेकिन मै घुट रही हूँ 
रोज-रोज -सुन 
कौन बाप -कैसी माँ 
सब मतलब के यार हैं 
कोई भंडुआ..
कोई छिनाल है 
और न जाने क्या क्या ...
बरबराता-कानों में जहर घोलता 
बाप का -मेरा गला दबाने दौड़ता 
और फिर गिर जाता कभी 
निढाल-बेबस -बेहोश 
मै उसके कपडे -जूते उतार
अब भी -प्यार से 
सुला देती हूँ 
लेकिन चाँद -खिलौना दिखा 
ना खिला पाती 
ना लोरी गा सुला पाती 
हाय नारी ये क्या -
तेरा हाल है ?
ये "लाल" कभी 
माँ कह दे 
दिल में मलाल है !!

सुरेन्द्र कुमार शुक्ल "भ्रमर "
५.३५ पूर्वाह्न जल पी बी  




दे ऐसा आशीष मुझे माँ आँखों का तारा बन जाऊं

Tuesday, April 14, 2015

बैशाखी की शुभ कामनाएं

 हमारे सभी प्रिय मित्रों और आत्मीय जनों को बैशाखी और भीम राव अम्बेडकर जयंती के अवसर पर हार्दिक शुभ कामनाएं ....


आइए गुण और गुणवत्ता का मान रखें विद्या और ज्ञान का सम्मान करें और प्रेम भाई चारे से जीवन यापन करें
भ्रमर ५




दे ऐसा आशीष मुझे माँ आँखों का तारा बन जाऊं

Thursday, April 9, 2015

'दुर्लभ किस्म' है - नारी - भाई ?

 

दुर्लभ किस्म - नारी ??
उस मज़ार पर भीड़ लगी थी
नाच रही बालाएं - सज - धज
आरकेष्ट्रा - संगीत बज रहा
'दाद'- दुलार - देखने का मन
खिंचा गया मैं !!
दिया मुबारक -और बधाई
वाह री बेटी !!!
कितना सुन्दर -माँ -बाबा ने
रीति सिखाई !! 
कला -धर्म -संगीत है साधा >>>
तू पागल लगता है आधा <<<
"चच्चू" हम 'बेटी' -ना -'बेटे'
जब बालाएं हम सा बनती 
रूप -रंग सब बदल रही हैं
'लूटरही हैं - क्षेत्र हमारे
सोचा हमने - यहाँ पधारे 
निर्जन - वन में !
धर्म स्थल में !!
'जटाबढ़ाये  !!!
नारी बनकर - रूप निखारे
नाच रही हूँ - मोह रही हूँ
लुटा रही हूँ -प्यार छुपा जो आँचल मेरे
आगे की पीढ़ी तो जाने
'दुर्लभ किस्म' है - नारी - भाई
इसे बचा लें   !!
रूप रंग - कुछ - लाज - हया
 पहचानें  आयें !!!

सुरेन्द्रशुक्लाभ्रमर५
एक रेलगाड़ी की यात्रा में
12.02.2011



दे ऐसा आशीष मुझे माँ आँखों का तारा बन जाऊं