BHRAMAR KA DARD AUR DARPAN

Thursday, July 12, 2012

श्रद्धांजलि ...प्रिय दारा सिंह जी हम सब को छोड़ चले ......

हमारे प्रिय जांबाज कुश्ती के माहिर , पहलवानी से 50 के दशक में आये फिल्म जगत में छाये दारा  सिंह जी 84 तक साथ निभा अब हमें छोड़ चले ..नम  आँखों से हम उन्हें हार्दिक और भावभीनी श्रद्धांजलि देते हैं .....प्रभु उनकी आत्मा को शांति दे और उनके परिवार जन को इस कष्ट की बेला को झेल कर आगे बढ़ने की शक्ति दे ...
रामायण में उनके हनुमान जी के किरदार को कौन भूल सकता है ...

आज सुबह साढ़े  सात बजे उन्होंने अंतिम साँसे ली और आज 12.7.12 को शाम चार बजे मुम्बई के विले पार्ले शवदाह केंद्र में हमारे 'रुस्तम- ऐ -हिंद ...पञ्च तत्व में विलीन हो गए ....उनका चरित्र बहुत ही सुलझा हुआ था वे सचमुच हनुमान सरीखे लोगों के दिल में छा जाते थे ...१९५९ में किंग कांग को हराने    के पश्चात वे विश्व चैम्पियन शिप जीते और फिर तो गाँव गाँव कुश्ती का दौर चल पड़ा ...मेले में ,, नागपंचमी में ..फ्री स्टाईल .....



एक्स्ट्रा से एक्टर बनी मशहूर अदाकारा मुमताज के साथ उन्होंने १६ के लगभग फिल्मे कीं .......लम्बे अरसे से अभी तक वे बालीवुड में छाये रहे 


हनुमान जी के अभिनय से उनकी लोकप्रियता से भाजपा ने उन्हें राज्यसभा की सदस्यता भी दिलाई .....आज भी जय बजरंग बलि का नारा भरते उनका चेहरा सामने आ जाता है ..वे नयनों में बस गए ...
एक बार पुनः उन्हें हार्दिक श्रद्धांजलि .....

सुरेन्द्र कुमार शुक्ल 'भ्रमर'५ 



दे ऐसा आशीष मुझे माँ आँखों का तारा बन जाऊं

Monday, July 9, 2012

नयन ‘ग्रन्थ’ अनमोल ‘रतन’ हैं


नयन ग्रन्थ अनमोल रतन हैं दुनिया इनकी दीवानी 
आत्म-ब्रह्म सब भाषा पढ़ के डूब गए कितने ज्ञानी  
ना भाषा से ना भौगोलिक नहीं कभी ये बंधते 
पाखी सा ये मुक्त  डोलते  हर  मन  पैठ  बनाते 
प्रेम संदेसा ज्ञान चक्षु हैं बन त्रिनेत्र स्वाहा  भी करते   
खंजन नयना मृगनयनी वो सुन्दरता के साक्षी 
दो से चार बने तो लगता जनम जनम के साथी 
इन्द्रधनुष से हैं सतरंगी लाखों रंग समाये 
नयनों की भाषा पढ़ लो प्रिय दुनिया समझी जाये 
प्रेम नयन में क्रोध नयन में घृणा आँख दिखलाती 
मन का काम संदेशा देता नयन बांचते पाती 
कुछ पल छिन में दोस्त बनें कुछ नयन अगर मिल जाए 
दिल के भेद मिटा के यारों अपना दिल बन जाएँ  
अस्त्र सश्त्र दुश्मन रख देते नैन प्यार जो पा लें 
घृणा क्रोध जलता मन देखे नयन उधर ना जाते 
गदराये यौवन मूरति, रस -लज्जा नयन छिपाते 
सुन्दरता में चाँद चार लग झुक नयन पलक छिप जाते 
जैसे बदरी घेर सूर्य को लुका छिपी है खेले 
नयन हमारे मौन प्रेम से 'भ्रमर' सभी रस ले लें 
मन मस्तिष्क दिल नयन घुसे ये जासूसी सब कर लें 
यथा जरूरत बदल रूप ये सम्मोहित कर कब्ज़ा करते  
नयनों का जादू चलता तो शेर खड़ा मिमियाए 
कल का कायर भरे ऊर्जा जंग जीत घर आये 
कजरारे, कारे, सुरमा वाले नयन मोह मन लेते 
मन में राम बगल में छूरी , ये कटार  बन ढाते 
कभी छलकता प्रेम सिन्धु इस गागर से नयनों में 
ना बांधे ना रोके रुकता नयन मिले नयनों से 
नाजुक हैं शीतलता चाहें रोड़ा बड़ा खटकता नैन 
भावुक हैं झरने सा झर-झर प्रेम लीन देते सब चैन
प्रणय विरह व्यथा की घड़ियाँ अद्भुत सभी दिखाएँ 
रतनारे प्यारे नयना ये भूरे नीले हर पल साथ निभाएं 
नयनाभिराम मंच जग प्यारा अद्भुत अभिनय करते नैन 
दर्पण बन हर कुछ दिखलाते सांच कहें ना डरते नैन 
उनके सुख के साथी नयना दुःख में नीर बहा रह जाएँ 
जनम जनम की छवि दिखला के भूल कभी ना जाएँ 
रतनारे 'प्रेमी' नयना ये जामुन जैसे  प्रेम भरे रस घोलें 
प्रेम के आगे रतन-जवाहर जन-परिजन सब छोड़ें 
नयन झरोखे से दिखती सब अपनी राम कहानी 
आओ शुद्ध रखें अंतर सब पावन आँख में पानी 
झील से नयनों कमल-नयन हैं दुनिया यहीं समायी 
प्रेम ग्रन्थ लज्जा संस्कृति है डूब देख गहराई 
नयन पुष्प मादक पराग भर जाम पे जाम पिलाते 
मधुशाला मदहोशी में उठा पटक कर नयन खोल भी जाते 
संग जीवन भर करें उजाला दीप सरीखे  जीवन-ज्योति जगाते 
जाते - जाते नैन दान कर दिए रौशनी नयन अमर हो जाते !


सुरेन्द्र कुमार शुक्ल 'भ्रमर' 
कुल्लू यच पी 
४.७.१२ ६.४०-७.४० पूर्वाह्न




दे ऐसा आशीष मुझे माँ आँखों का तारा बन जाऊं

Monday, July 2, 2012




महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना (BEST CREATION OF THE MONTH)- ओ बी ओ पर 












शीर्षक :- उगता सूरज -धुंध में लेखक:- सुरेन्द्र कुमार शुक्ल 'भ्रमर' वर्तमान स्थान:- कुल्लू (हि.प्र.)
पुरस्कार का नाम :- "महीने की सर्वश्रेष्ट रचना पुरस्कार"पुरस्कार की राशि :- रु. 551/- मात्र
प्रायोजक :- गोल्डेन बैंड इंटरटेनमेंट    (G-Band ) H.O.F-315, Mahipal Pur-Ext. New Delhi.

हमारे सभी प्रिय मित्रों का तहे दिल से आभार ...भ्रमर 5 


उगता सूरज -धुंध में
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कर्म फल -गीता
क्रिया -प्रतिक्रिया
न्यूटन के नियम
आर्किमिडीज के सिद्धांत
पढ़ते-डूबते-उतराते
हवा में कलाबाजियां खाते
नैनो टेक्नोलोजी में
खोजता था -नौ ग्रह से आगे
नए ग्रह की खोज में जहां
हम अपने वर्चस्व को
अपने मूल को -बीज को
सांस्कृतिक धरोहर को
किसी कोष में रख
बचा लेंगे सब -क्योंकि
यहाँ तो उथल -पुथल है
उहापोह है ...
सब कुछ बदल डालने की
होड़ है -कुरीतियाँ कह
अपनी प्यारी संस्कृति और नीतियों की
चीथड़े कर डालने की जोड़ -तोड़ है
बंधन खत्म कर
उच्छ्रिंख्ल होने की
लालसा बढ़ी है पश्चिम को देख
पूरब भूल गया -उगता सूरज
धुंध में खोता जा रहा है
कौन सा नियम है ?
क्या परिवर्तन है ?
सब कुछ तो बंधा है गोल-गोल है
अणु -परमाणु -तत्व
हवा -पानी -बूँदें
सूरज चंदा तारे
अपनी परिधि अपनी सीमा
जब टूटती है -हाहाकार
सब बेकार !
आँखों से अश्रु छलक पड़े
अब घर में वो अकेला बचा था
सोच-व्याकुलता-अकुलाहट
माँ-बाप भगवान को प्यारे
भाई-बहन दुनिया से न्यारे
चिड़ियों से स्वतंत्र हो
उड़ चले थे ...............
फिर उसे रोटियाँ
भूख-बेरोजगारी
मुर्दे और गिद्ध
सपने में दिखने लगते
और सपने चकनाचूर
भूख-परिवर्तन -प्रेम
इज्जत -आबरू
धर्म -कानून-अंध विश्वास
सब जंजीरों में जकड़े
उसे खाए जा रहे थे .....
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३.०२-३.४५ पूर्वाह्न
कुल्लू यच पी १३.०२.२०१२
सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः





दे ऐसा आशीष मुझे माँ आँखों का तारा बन जाऊं