BHRAMAR KA DARD AUR DARPAN

Saturday, April 2, 2011

आज ‘तिरंगा’ फिर लहराया विजयी ‘विश्व’ है ‘भारत’ छाया

हुर्रे और हम जीत गए जियो खिलाडी सचमुच तुमने किया धमाल-फुलझड़ियाँ छूट रहीं इस आसमान में हमने भारत महान लिख दुनिया को दिखा दिया , और आप सब मित्रों की दुआ रंग लायी बहुत बहुत धन्यवाद मेरी कविता में आप सब ने जान डाल दी हम आप सब के आभारी हैं ,माँ के लाल- आओ दिवाली में शामिल हो जश्न मनाएं -और जन जागरण से गुजारिश है जल्दी ये दीप प्रज्वलित करें -



२७ वर्ष बाद ख़ुशी का ऐसा ज्वार भाटा उठा दिल से ऐसा स्रोत फूटा की हर आँखें नम हो उठीं बरस पड़ीं झरने सी
दिल हहर हहर झूम उठा कंठ अवरुद्ध हो गए जो भी कहें दुवा दें इन माई के लाल की सब कम है —-


साभार -
जय हिंद जय भारत १०.५४ पी यम

जंग तो मुश्किल होती ही है लेकिन हम पहले ही अपने वीर सैनिकों को भेजते समय ही 'तिलक' लगा के थाल सजा  'आरती' करके भेजते हैं
आधी 'जंग' हमने जीत ली है जो कुछ थके थोडा सुस्त हुए आओ उनका जोश जगाएं उनकी कुछ गलतियों को भुला , आओ शुभकामनाएं दें जोश और थोडा बढे और अपना ये सपना परवान चढ़े जय हिंद जय भारत -गुस्ताखी माफ़ हम अग्रिम रूप से आप के पास हाजिर हो रहे हैं -


आजतिरंगा’ फिर लहराया
विजयीविश्व’ हैभारत’ छाया
वाह धुरंधर धोनी के सब
गजब किया रे !!!
‘मेहनत’ रंग है लाती
सिद्ध किया है मूल-मन्त्र ये
मार लिया मैदान !!!
जंग -जीत के विश्व विजेता
‘भारत’ बनामहान’ !!

‘दिया’ जलादीवाली’ लाये
फुलझड़ियाँ हैं कहीं पटाखे
 रात-रात भर फूटें
रंग बिरंगे इंद्र-धनुष
से रौशन सारा !!!
जाग उठा आसमान !!!


 ‘मुम्बई’ सेलहर’ उठी रे
गाँव -गली तक पहुंची
गाँव की गलियां शहर हमारे
‘नाच’-कूद अबढोल’ बजाते
‘होली’ से रंगे हैं सारे
चले आज सबतेरे द्वारे’

देखोमेला’ लगा हुआ है
'माँ" बाबा का नाम हुआ है
‘चरण’ छू   रहा उनके कोई
कोईगले’ लगाया
धरती परभगवान’ सरीखा
"विजयी"- ‘लाल’ है छाया !!


"माँ" की बेचैनी बढ़ी जा रही
"मेले" ना मन लाये
के "हार" पहन ले
जल्दी-गुझिया पूड़ी खाए !!
'छाछ'- 'दही'- 'गुड'- 'तुलसी' पत्ता
'कलश'- भरा रख आये

पहलवान "वीर" बाबा तो
'बेल्हा' -'चौहरजन' जाना
'विन्ध्याचल' -'काशी' में जाकर
'गंगा' डुबकी लाना
सारी 'मन्नत' पूरी करना
नौ दिन 'व्रत' भी रहना
'नवरात्री' -'दुर्गा'- "माँ" की
पूजा -अर्चना !!!
हवन-यज्ञँ सब करना

'पूत' -'सपूत'- हों ऐसे सबके
इस "माटी' के 'लाल"
जहाँ रहें 'चौके' -'छक्के' जड़
करते रहें -'कमाल' !!!
अपने घर में 'ख़ुशी' पले तब
हर दिन मचे 'धमाल' !!!

सुरेन्द्र कुमार शुक्ल भ्रमर५
प्रतापगढ़ .प्र.
..2011

नजरों का धोखा है


नजरों  का  धोखा  है 
हम सब एक हुए 
मन के हैं नेक हुए 
जाति -पांति छोड़ बढे  
नेता की शादी में
सब मिल के खाए
पलथी लगाये
मिर्ची खिलाये तो
बोल पड़ा तोता है
नजरों का धोखा है !!!
नाप लिए आसमां
लाँघ गए सागर को
अणु -परमाणु-सब
मुठ्ठी  में बाँधा है
बिजली को पैदा करूँ
 बादल  मै बरसाऊँ
आई सुनामी तो 
पोल सारा खोल गयी 
धोखा ही धोखा है
कश्ती में छेद यहाँ 
भाई-विभीषण है 
जननी ने फेंक दिया 
रिश्तों-ने -बेंच दिया 
साधू ने पार किया 
लक्ष्मण की रेखा है 
"प्रेमी" भी खोद कब्र 
"शाह-जहाँ " बनता है 
"ताज-महल" बूँद-बूँद 
रोता ये कहता है 
चंदा चांदनी 
नजरों का धोखा है 

बच्चे तो प्लेट धुलें  
"ऊँट" बने ढोते हैं
नारी सशक्त बनी 
संसद में आज खड़ी 
घूंघट-में-चेहरे में 
‘वेदना’ समेटी है 
दान कीदहेज़’ की  
 ‘बलि’-बेदी’ देखी है
न्याय की देवी की
आँखों में पट्टी है !!!


दुनिया ये मिटटी का                                                                                                                     
एकघरौंदा’ है
लाल-लाल सुन्दर सा
खट्टा- करौंदा है !!!
सुरेन्द्र कुमार शुक्ल भ्रमर५
२९..११

Thursday, March 31, 2011

“दिया” जला तो अम्मा -बाबू -चैन से सोये


दिया जला तो
अम्मा -बाबू -चैन से सोये
भिनसारे ही उठकर भाई
ख़ुशी-झूम कर –‘नाच’ पड़े हैं
मेरादर्द’ हुआ कम भाई
नहींदवाई’ उनने खायी
लिए मोबाईल
‘सन्देशा’ वे भेज रहे हैं
‘गुल्ली’-डंडा’ याद तू करना
 ‘मुन्ना’ - मेरे ‘लाल’ 
जरा नहीं घबराना उनसे 
कर देना मुह ‘लाल’ 
‘एक’+ -‘एक’- रन जोड़े जाना 
‘चौका’ भी धर देना
यहाँ -वहां ताके तुम रहना 
‘छक्का’ भी जड़ देना
जितने तेरे ‘भाई’ –‘संग’ हैं
मिल के ‘गलेलगाना  
सबको जिम्मेदारी देना
"माँ" की लाज बचाना
‘कांटे’ –‘पत्थर’ दौड़ा था तू
करतामुश्किल’- काम
जिले राज्य से भेजा हमने
करना ना बदनाम
आज तोमखमल’ दौड़ रहा तू
कर सकता हैहर’-‘ काम’
तेरा बल्ला
तेरी माँ के बल्ले सेवो’ बनी टोकरी
संग -संग रक्खे
उसमे रक्खाफूल’

  

सदाहोश’ में खेले जाना
कुछ भी ना होभूल’
रखोभरोसा’- अपने ऊपर
सभी काम-आसान’
‘अश्वमेध’ हम  करते बैठे
‘घोड़े’ भागें तेज
‘विजय’ रथ ना रुके हमारा
तेरीअम्मा’ ने भी माँगा
‘नवरात्रि’ !!! हे दुर्गा माई !!
पूत हमारा -  दुनिया’ छाये
लिएविश्वकप जल्दी आये !!

सुरेन्द्र कुमार शुक्ल भ्रमर५
प्रतापगढ़ .प्र.
अब हम जीत के आयेंगे >>>>>
1.4.2011