BHRAMAR KA DARD AUR DARPAN

Tuesday, March 29, 2011

All India Bloggers' Associationऑल इंडिया ब्लॉगर्स एसोसियेशन

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Lucknow Bloggers' Association लख़नऊ ब्‍लॉगर्स असोसिएशन: उत्तर प्रदेश ब्लॉगर्स एसोसियेशन

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सराबोर कर दो हर मन को
अगली होली यार
सभी रंग घुल जाएँ ऐसे
एक धरा हो
एक पृष्ठ हो
एक हमारे मन की आँखें
धर्म जाति व्यव्हार एक हो
गुल गुलशन सब खिले
मिलेंगे -अब
उस होली त्यौहार
सुरेन्द्र कुमार शुक्ल भ्रमर५

27.03.2011

रंग गुलाल न मलने पाए -गोरिया न कोई सांवरा " HOLI -


रंग गुलाल मलने पाए -गोरिया कोई सांवरा " HOLI CONTEST"

 आइये आज फिर हम होली के रंगों में डुबायें, आज की शिकवा -शिकायत -भरी होली से उबार- थोडा मेरे संग गुनगुनाइए फाग -वैसे तो फाग के रंग मस्ती भरे गाने में बड़े चटकीले पर यहाँ मैंने आप सब से डर  उन्हें पेश कर बचा लिया
आइये -आप सब को ,
आज  ब्रज की गलियों में घुमाएँ माँ राधा -कृष्ण की चटपटी होली से सराबोर
कर मन थोडा हल्का कर लें -जय श्री राधे -कृष्णा

होली आई रे - , होली आई मेरे भाई चलो सब मिल के अरे छुप -छुप के
हाए- आज - आज पकड़ेंगे कान्हा की चोरी -यशोदा मैया -झूठ ना.

बात कहें दिल थामे सुनना बन जाना तू गोरी नहीं मुह खोलना
घंघरा चोली रंग -बिरंगी सजे हाथ में चूड़ी -संभलकर बोलना
गुल-गुलाब -यौवन से नशा लिपट चिपक मस्ती आये -राज नहीं तू खोलना
पलक झंपे ना साया बन के राधा के संग रहना -अकेली नहीं छोड़ना

राधा का तन- , छू पाए रंग गुलाल मलने पाए -गोरिया कोई सांवरा
होली आई रे - , होली आई मेरे भाई चलो सब मिल के अरे छुप -छुप के
हाए- आज - आज पकड़ेंगे कान्हा की चोरी -यशोदा मैया -झूठ ना.

अरे खा गया छाछ ये देखो -मटकी मेरी फोड़ी -कहाँ से बसा
शेर -शायरी घर में लिख गया -गैया सब की छोड़ी -अरे लो अब बना
छोरिन -गयी पकड़ने गैया -मुए कहाँ सब घुमो- करे रंग-भंग- ना
वृन्दावन की कुञ्ज गली या जमुना तीर गए-सब -ढूंढो -नहीं उसे छोड़ना

अपना आँगन-, झांक सके ना -दौड़ गए ललचाते
राधा के तन क्या रखा है -पहुँच गया जो सांवरा
होली आई रे - , होली आई मेरे भाई चलो सब मिल के अरे छुप -छुप के
हाए- आज - आज पकड़ेंगे कान्हा की चोरी -यशोदा मैया -झूठ ना.

ब्रज की गलियाँ गाँव है सूना - जमुना तीर गुलाबी दिखता- गया भज-सांवरा
गएँ चरती -होली खेले- रास रचाए कहीं पे फिरता -पानी का वो भांवरा
अपनी गोरी गयी कहाँ पे -भेद अपना खोले -अरे वो मन चला 
लाजवंत नारी बहकाए  -प्यार जताए -अंग अपना खोले-यही था मन्त्र-ना.

अपना साजन-, ढोल बजाये -रंग गुलाल मले भंग खाए 
नशा चढे -क्या क्या कर जाये -हुआ -सब- झूठ ना  
होली आई रे - , होली आई मेरे भाई चलो सब मिल के अरे छुप -छुप के
हाए- आज - आज पकड़ेंगे कान्हा की चोरी -यशोदा मैया -झूठ ना.


देख करे क्या -बांहों भरता -आँख मूँद खींचे घर घुसता -चोरों जैसा देखता
दाग छूटे ऐसा रंगता -अन्दर बाहर-कुछ ना बचता -पागल जैसा नोचता 
राधा भी दीवानी क्यों है -रोंके ना मन-मानी -सहती  -सारा रस लूटता
घंघरा चोली -तार तार कर -रंग रहीं सखियाँ पहुंची -बहुरुपिया तो श्याम सा

राधा का मन-, खिलता जाये -श्याम को चूम खिझाये -
टूट पड़ो अब -दिन गुजरा तो -रात पड़ी है -लगी बड़ी भूख ना
होली आई रे - , होली आई मेरे भाई चलो सब मिल के अरे छुप -छुप के
हाए- आज - आज पकड़ेंगे कान्हा की चोरी -यशोदा मैया -झूठ ना.

सुरेन्द्र कुमार शुक्ल भ्रमर५ 
२९..2011