Tuesday, April 9, 2013

ये आनन्द चीज क्या कैसा??


ये आनन्द चीज क्या कैसा??

ये आनन्द चीज क्या कैसा क्या इसकी परिभाषा
भाये इसको कौन कहाँ पर कौन इसे है पाता
उलझन बेसब्री में मानव जो सुकून कुछ पाए
शान्ति अगर वो पा ले पल भर जी आनंद समाये
सूनी कोख  मरुस्थल सी माँ पल-पल घुट-घुट जो मरती
शिशु का रोना हंसना उर भर क्रीड़ानंद वो करती
रंक  कहीं भूखा व्याकुल जो क्षुधा पिपासा जाए
देता जो प्रभु सम  वो लागे जी आनंद समाये
पैमाना धन का है अद्भुत क्या कुछ किसे बनाये
कहीं अभागन बेटी जन्मे कुछ लक्ष्मी कहलायें
प्रीति  प्रेम सम्मान अगर जीवन भर बेटी पाए
हो आनंद संग बेटी के मात -पिता हरषाए
गोरा वर गोरी को खोजे काला  कोई गोरी
गुणी छोड़ कुछ वर्ण रंग धन बड़े यहाँ हत  भोगी
प्रेम कहीं कुछ शीर्ष चढ़े तो नीच ऊँच  ना रंग
हो आनंद जमाना दुश्मन अजब गजब दुनिया का रंग
कहीं नशे में ऐंठ रहे कुछ नशा अगर पा जाएँ
धन्य स्वर्ग में उड़ते फिरते जी आनंद समाये
मै  मकरंद मधू आनंद कवि -कविता में पाए
लोभी मोही  धन में डूबे धन आनंद में मरते
वहीं ऋषी मुनि दान दिए सब मोक्षानंद में फिरते
मेरा तेरा इनका उनका अलग -अलग आनंद
जो आनंद मिले तो पूछूं उसकी क्या है पसन्द
सबका है आनंद अलग तो इसका भी कुछ होगा
गुण-प्रतिभा ये दया स्नेह या आनंद धन में  होगा

भ्रमर 5 , 22.03.2013
2.15-3.20 मध्याह्न शाहजहांपुर-बरेली लौहपथगामिनी में



दे ऐसा आशीष मुझे माँ आँखों का तारा बन जाऊं

20 comments:

रविकर said...

उत्कृष्ट प्रस्तुति-
शुभकामनायें स्वीकारें-

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया said...

उम्दा,बहुत प्रभावी प्रस्तुति !!! सुरेन्द्र जी आभार

recent post : भूल जाते है लोग,

Rajendra Kumar said...

बहुत ही सुन्दर प्रस्तुती,आभार.
"जानिये: माइग्रेन के कारण और निवारण"

दिलबाग विर्क said...

आपकी यह प्रस्तुति कल के चर्चा मंच पर है
कृपया पधारें

Surendra shukla" Bhramar"5 said...

प्रिय रविकर जी रचना आप के मन को छू सकी सराहना मिली मन खुश हुआ आभार
भ्रमर ५

Surendra shukla" Bhramar"5 said...

प्रिय धीरेन्द्र भाई जी प्रोत्साहन के लिए बहुत बहुत आभार
भ्रमर ५

Surendra shukla" Bhramar"5 said...

प्रिय राजेन्द्र भाई जी रचना की प्रस्तुति आप को अच्छी लगी लिखना सार्थक रहा प्रोत्साहन के लिए बहुत बहुत आभार
भ्रमर ५

Surendra shukla" Bhramar"5 said...

आदरणीय दिलबाग जी रचना आप के मन को आनंदित कर सकी और आप ने चर्चा मंच के लिए इसे चुन मन आनंद से भर गया आभार
भ्रमर ५

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
नवसम्वत्सर-२०७० की हार्दिक शुभकामनाएँ स्वीकार करें!

vandana gupta said...

आनन्द से सराबोर रचना

Dr.Ashutosh Mishra "Ashu" said...

अच्छी रचना सादर बधाई के साथ

Surendra shukla" Bhramar"5 said...

आदरणीय शास्त्री जी ...आप को भी नवसम्वत्सर-२०७० की हार्दिक शुभकामनाएँ
कुछ लोग यों ही पल भर में छाप छोड़ जाते हैं दिल में समा जाते हैं का सुन्दर सिला परिचय करने लिए आभार हरी शर्मा जी के साथ साथ आप को भी शुभ कामनाएं
भ्रमर ५

Surendra shukla" Bhramar"5 said...

आदरणीया वंदना जी रचना से आनंद मिला आप ने सराहा लिखना सार्थक रहा
आभार
भ्रमर५

Surendra shukla" Bhramar"5 said...

आदरणीय डॉ आशुतोष जी जय श्री राधे
रचना आप के मन को आनंद दे सकी और आप से प्रोत्साहन मिला मन खुश हुआ
..सुंदर

आभार
भ्रमर५

संजय कुमार भास्‍कर said...

बहुत ही बेहतरीन
नववर्ष और नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाए....!!!!!

Surendra shukla" Bhramar"5 said...

संजय जी रचना आप के मन को भायी सुन हर्ष हुआ आभार
भ्रमर ५

jyoti khare said...

सुंदर रचना
उत्कृष्ट प्रस्तुति

आग्रह है मेरे ब्लॉग में भी सम्मलित हों

Surendra shukla" Bhramar"5 said...

आदरणीय ज्योति जी जय श्री राधे ख़ुशी हुयी आप के प्रेम के लिए आग्रह के लिए की मेरे ब्लॉग में भी सम्मलित हों ..
हमने समर्थन तो किया है आप के ब्लॉग में
भ्रमर ५

Neeraj Kumar said...

ati uttam. badhai.

Surendra shukla" Bhramar"5 said...

हार्दिक आभार नीरज जी, रचना आप को पसंद आई सुन हर्ष हुआ
भ्रमर ५