Friday, October 12, 2012

उँगलियों के इशारे नचाने लगी


उँगलियों के इशारे नचाने लगी
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(फोटो साभार गूगल / नेट से लिया गया )
उम्र की सीढ़ियों कुछ कदम ही बढे
अंग -प्रत्यंग शीशे झलकने लगे
वो खुमारी चढ़ी मद भरे जाम से
नैन प्याले तो छल-छल छलकने लगे
लालिमा जो चढ़ी गाल टेसू हुए
भाव भौंहों से पल-पल थिरकने लगे
जुल्फ नागिन से फुंफकारती सी दिखे
होश-मदहोशी में थे बदलने लगे
नींद आँखों से गायब रही रात भर
करवटें रात भर सब बदलते रहे
तिरछी नैनों की जालिम अदा ऐ सनम
बन सपन अब गगन में उड़ाती फिरे
पर कटे उस पखेरू से हैं कुछ पड़े
गोद में आ गिरें सब तडफने लगे
सुर्ख होंठों ने तेरे गजब ढा दिया
प्यास जन्मों की अधरों पे आने लगी
दिल धडकने लगा मन मचलने लगा
रोम पुलकित तो शोले दहकने लगे
पाँव इत-उत चले खुद बहकने लगे
कोई चुम्बक लगे खींचता हर कदम
पास तेरे ‘भ्रमर’ मंडराने लगे
देख सोलह कलाएं गदराया जिसम
नैन दर्पण सभी खुद लजाने लगे
मंद मुस्कान तेरी कहर ढा रही
कभी अमृत कभी विष परसने लगी
भाव की भंगिमा में घिरी मोहिनी
मोह-माया के जंजाल फंसने लगी
तडफडाती रही फडफडाती रही
दर्द के जाल में वो फंसी इस कदर
वेदना अरु विरह के मंझधार में
नाव बोझिल भंवर डगमगाने लगी
नीर ही नीर चहुँ ओर डूबती वो कभी
आस मन में रखे – उतराने लगी
जितना खोयी थी- पायी- भरी सांस फिर
उड़ के तितली सी- सब को सताने लगी
मोरनी सी थिरकती बढ़ी जा रही
उँगलियों के इशारे नचाने लगी
——————————————-
सुरेन्द्र कुमार शुक्ल ‘भ्रमर’ ५
मुरादाबाद-सहारनपुर उ प्र.
१०-१०.४५ मध्याह्न
१०.०३.१२





दे ऐसा आशीष मुझे माँ आँखों का तारा बन जाऊं

15 comments:

Dheerendra singh Bhadauriya said...

वाह ,,,,बहुत सुंदर अभिव्यक्ति ,,,,,,

MY RECENT POST: माँ,,,

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

वाह...
बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार (14-10-2012) के चर्चा मंच पर भी की गई है!
सूचनार्थ!

Dr. sandhya tiwari said...

bahut sundar rachna bhramar ji

काव्य संसार said...

बहुत सुंदर प्रस्तुति |

इस समूहिक ब्लॉग में आए और हमसे जुड़ें :- काव्य का संसार

काव्य संसार said...

बहुत सुंदर प्रस्तुति |

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Anonymous said...

I heard a couple of guys talking about this in the New York subway so I looked it up online and found your page. Thanks. I thought I was right and you confirmed my thoughts. Thanks for the work you've put into this. I'd love to save this and share with my friends.

Surendra shukla" Bhramar"5 said...

आदरणीय शास्त्री जी जय श्री राधे मन खुश हुआ आप का स्नेह यूं ही बना रहे प्रोत्साहन बढ़ता रहे जोश आता है लिखने को
आभार
भ्रमर ५

Surendra shukla" Bhramar"5 said...

प्रिय धीरेन्द्र जी प्रोत्साहन के लिए आभार
भ्रमर ५

Surendra shukla" Bhramar"5 said...

आदरणीया डॉ संध्या जी रचना आप को खूबसूरत लगी मन आप का हर्षित हुआ तो मेरा भी
आभार
भ्रमर ५

Surendra shukla" Bhramar"5 said...

आदरणीय अभियंता प्रदीप जी जय श्री राधे मन खुश हुआ आप से निमंत्रण पा के काव्य संसार से जुड़ने के लिए वक्त बहुत कम मिल पाता है और सब जगह पहुंचना मुश्किल होगा है वक्त कुछ मिलेगा तो आते रहेंगे
आभार आप का प्रोत्साहन हेतु
भ्रमर ५

Rajesh Kumari said...

बढ़िया प्रस्तुति

Surendra shukla" Bhramar"5 said...

आदरणीया राजेश कुमारी जी आभार आप का रचना पसंद करने और प्रोत्साहन देने हेतु
जय श्री राधे
भ्रमर ५

Anonymous said...

Thanks a lot for being the lecturer on this area. We enjoyed your own article quite definitely and most of all cherished how you handled the issues I widely known as controversial. You happen to be always quite kind towards readers much like me and help me in my lifestyle. Thank you.

Dr.NISHA MAHARANA said...

बहुत सुंदर अभिव्यक्ति ...

Surendra shukla" Bhramar"5 said...

जय श्री राधे आदरणीया निशा जी प्रोत्साहन हेतु आभार रचना आप के मन को छू सकी सुन हर्ष हुआ
भ्रमर ५