Wednesday, December 7, 2011

ईमानदारी का मोल दो

ईमानदारी का मोल दो
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इस दधीचि की हड्डी को
आकृति बना दो
पेट भर दो- खून भर दो
सूर्य से जो ये दमकें इन का तेज देखो
रोटी -कपड़ा और मकान का
ब्रांड अम्बेसडर बनाएं
अग्नि पृथ्वी रक्षा कवच में
ईमान की हम भर्ती कराएं
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ईमानदारी का मोल दो
हीरे जवाहरात सा तोल दो
मान दो सम्मान दो
जी भर के इनको प्यार दो
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उच्च सिंहासन इन्हें आसीन कर दो
मुख्य रथ की बागडोर हो
अनुशासन की चाबुक या हो
उन गरीबों को खिलाएं
सड़कें बनायें पुल बनाएं
ऐसे प्यारे इनको सारा काम दो
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बेटियों का व्याह कर दें
जुर्म की आंधी मिटा दें
अनपढ़ विचारे आज भी जो
दो लात-पा दुत्कार खाएं
उनको सम्मान का हम मुकुट पहनाएं
ऐसे प्यारे कल से इनको काम दे दो !
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बेलगाम घोड़े हैं जो कुचले सभी को
उन पर ये लगाम लगाएं
अच्छा बुरा उनको सिखाएं
मंच पर केवल चढ़ें ये “प्रिय” हमारे
दे दें तमगा रत्न-भारत -पद्मभूषण
उन सभी को जो हों न्योछावर
धरा को स्वर्ग करने में लगे हों
जो हों मानव- बोते मानवता यहाँ पर
लहलहाए जिनके कर को छू ये फसलें
सोना उगले
सोने चिड़िया बन के फुदके
दूध की नदिया के सपने
आओ प्यारे फिर संजो लें
सब चलो ये मिल के मांगें
झंडे ले के गीत गायें
“ईमानदारी” का मोल दे दो
प्यार बो- दो -प्यार बांटो
“ईमानदारी” का मोल दे दो
प्यार बो-दो -प्यार बांटो !!
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शुक्ल भ्रमर ५ ६.१२.२०११ ७.१५-७.५८ पूर्वाह्न
यच पी


दे ऐसा आशीष मुझे माँ आँखों का तारा बन जाऊं

14 comments:

Roshi said...

बहुत सुंदर रचना hai

रविकर said...

बहुत खूबसूरत पोस्ट |
निराला अंदाज |
बधाई ||

"जाटदेवता" संदीप पवाँर said...

खूबसूरत अंदाज,

Surendra shukla" Bhramar"5 said...

आदरणीय रोशी जी अभिवादन रचना पसंद आई और ईमाँ को आप का समर्थन मिला ख़ुशी हुयी
भ्रमर ५

Surendra shukla" Bhramar"5 said...

प्रिय रविकर जी ईमानदारी के समर्थन में आप ने गीत गाया ख़ुशी हुयी इसका अंदाज निराला लगा सुन और भी
भ्रमर ५

Surendra shukla" Bhramar"5 said...

प्रिय संदीप जी रचना की प्रस्तुति का अंदाज आप को प्यारा लगा सुन हर्ष हुआ आइये इस ईमान को बचाएं
भ्रमर ५

Dr.Ashutosh Mishra "Ashu" said...

kuch nayapanliye hue acchi kavita..aapke blog per kaphi dino baad aana hua..accha laga..mere blog per bhi aap sadar amantrit hain..sadar badhayee

Mamta Bajpai said...

भाव पूर्ण अभिव्यक्ति आभार

Arunesh c dave said...

सत्य वचन

Surendra shukla" Bhramar"5 said...

डॉ आशुतोष मिश्र जी अभिवादन काफी दिन बाद मुलाकात ..व्यस्तता और नेट की समस्याएं बाधा उत्पन्न करती ही हैं रचना में कुछ नयापन दिखा और आप ने इस पर समर्थन किया सुन ख़ुशी हुयी
आभार
भ्रमर ५

Surendra shukla" Bhramar"5 said...

आदरणीया ममता जी हार्दिक अभिवादन और अभिनन्दन आप का ...ईमानदारी का आप ने समर्थन किया सुन ख़ुशी हुयी --
आभार
भ्रमर ५

Surendra shukla" Bhramar"5 said...

अरुणेश जी अभिवादन और धन्यवाद आप का ..रचना कुछ सत्य और सटीक बात कह सकी सुन हर्ष हुआ
आभार
भ्रमर ५

दिगम्बर नासवा said...

सच कहा है ... अगर यर दुनिया इमानदारी का मोल भी डे डे तो बहुत है ... सत्य लिखा है रचना में ..

Surendra shukla" Bhramar"5 said...

प्रिय दिगम्बर जी अभिवादन सच कहा आप ने ..ये ईमानदारी का मोल दे दे तो फिर क्या कहने सब सुधर जाए
आभार
भ्रमर ५