Saturday, March 28, 2020
* मेरा हर मित्र उनके हर नजदीकी और मित्र, सभी रिश्तेदार स्वस्थ और सुरक्षित चाहिए, आप सब मेरी अमूल्य धरोहर हैं।
आप सभी जन अपने आप को स्वस्थ रखते हैं तो मुझ पर आपका बड़ा ऋण रहेगा।।
ईश्वर आपको स्वस्थ बनाए रखें। समृद्धि तो हम हमारी एकता से पुनः अर्जित कर लेंगे...!!
कृपया आप सभी स्वयं का ख्याल रखें सामाजिक दूरी बनाए रखें, साफ सफाई रखें..
स्वस्थ रहें... सुरक्षित रहें...!!*
मां जगदम्बे सब को असीम ऊर्जा दें
सुरेन्द्र कुमार शुक्ल भ्रमर5
🙏🙏
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दे ऐसा आशीष मुझे माँ आँखों का तारा बन जाऊं
Sunday, July 8, 2018
कल कुछ मीठे सपने आये
कल कुछ मीठे सपने आये
मेरा हुआ प्रमोशन
गदगद उछला खिला खिला था
इतना बढ़ा इमोशन
कलयुग सतयुग जैसा था कल
भ्रष्ट मेरे जो अधिकारी कल
'हार ' लिए थे मीठे उनके बोल
'ईमा' फल दायी होती है
उछले , पीट रहे थे ढोल
-----------------------------
आसमान नीचे उतरा था
नीम करेला हुआ था मीठा
कुत्ते सीधी पूंछ किये थे
भीख मांगता रावण जीता
----------------------------
अपने 'पास ' बिठाये मुझको
नफरत घृणा नहीं आँखों में
चमचों जैसे उनके बोल
मेरा मुंह भी बंद पड़ा था
उनको डर था खुले ना पोल
----------------------------------
'लॉबी' उनकी ‘टीम’ बनी थी
आज हमारे 'साथ' खड़ी थी
जैसे 'मधु 'जुटाने खातिर
डंक ‘व्यंग्य’ सब भूल गयी थी
अच्छाई ज्यों जीत गयी थी
-----------------------------
तभी एक कोने में सहसा
खिला खिला सा चेहरा देखा
मुख मंडल पर आभा वाला
'नव आगंतुक ' बड़ा निराला
कौवों में ज्यों हंस विराजा
-------------------------
यही नया है ना खाता ना खाने देता
अनुशाशन हर दिन दिखलाता
नयी नीति पैगाम रोज नित
सत्कर्मी को गले लगाता
सुनता जी भर और सिखाता
---------------------------------
फुसफुस आवाजें कुछ उभरीं
दिवा स्वप्न 'ना ' तब में जागा
अपने अंतर फिर फिर झाँका
अच्छा कर्म सदा देता है
मन मेरा फिर मेरा माना
------------------------------
सुरेंद्र कुमार शुक्ल 'भ्रमर ५ '
2.55-3.४५
पॉवरग्रिड
लखनऊ
६ अप्रैल २०१८
दे ऐसा आशीष मुझे माँ आँखों का तारा बन जाऊं
Labels:
anyay,
bhramar 5,
chamchagiri,
pramoshan
Location:
Lucknow, Uttar Pradesh, India
Saturday, November 25, 2017
चीख रही माँ बहने तेरी -क्यों आतंक मचाता है
क्यों मरते हो हे ! आतंकी
कीट पतंगों के मानिंद
हत्यारे तुम-हमे बुलाते
जागें प्रहरी नहीं है नींद
==============
उधर काटता केक वो बैठा
ड्राई फ्रूट चबाता है
घोर निशा में सर्द बर्फ हिम
कब्र तेरी बनवाता है
===================
आतातायी ब्रेनवाश कर
नित नए जिहाद सिखाता है
'मूरख' ना बन तू भी मानव
कभी सोच रे ! क्या तू दानव ?
===================
मार-काट नित खून बहाना
कुत्तों सा निज खून चूसना -
खुश होना फिर- कौन मूर्ख सिखलाता है
नाली के कीड़े सा जीवन क्या 'आजादी' गाता है
==============================
कितनी आशाएं सपने लेकर
माँ ने तेरी तुझको पाला
क्रूर , जेहादी भक्षक बनकर
बिलखाया ले छीन निवाला
=================
'स्वर्ग' सरीखा अपना भारत
'देव' तुल्य जन-गण-मन बसता
प्रेम पगी धरती 'फिर' स्वागत
'मानव' बन तू 'फिर' आ सकता
======================
चीख रही माँ बहने तेरी
'आ लौट ' गुहार लगाती हैं
'काल' यहां नित अब मंडराता
'कब्र खोद ' थक जाती हैं
=====================
एक बार फिर फिरकर आ जा
माँ को अपने गले लगा ले
हिंसा बंदूके बम छोड़े
‘प्रेम की गंगा’ यहां समा जा
=================
माँ तेरी नित-नित घुट मरती
रिश्ते नाते तार -तार हो लिए कफ़न सब रोते हैं
घायल की गति तू क्या जाने
टीस-दर्द का 'विष' प्याला भर पीते हैं
==========================
मै माँ तेरी वो उसकी माँ ऐसे-वैसे
सब 'अपने' - भाई के रिश्ते
गोलीबारी -पत्थरबाजी मरते अपने
लिए कफ़न ताबूत खड़े वे बने फ़रिश्ते
=========================
कुछ मासूमों की आँखों में
ख्वाब तैरते कैसा भाई -बाप कहाँ ?
'लव' जेहाद फंस कुछ बालाएं
जूझ रहीं ना घर दिखता ना घाट यहां
==========================
बैठ कभी जंगल हिम में ही
तनहाई जब तू पाए
सोच ज़रा पल नयी दिशा दे
मार-काट तज घर आये
=================
गलियां चौबारे बचपन कुछ
मित्र मण्डली याद करो
क्या करने जग आया प्यारे ?
गोदी माँ ‘कुछ’ याद करो
====================
माँ की आँखों में जादू है
बड़ी शक्ति है मन्नत दुआ की खान यही
भटक गया बेकाबू तो क्या
अब भी तुझे बचा लेगी
===================
"मौलिक व अप्रकाशित"
सुरेंद्र कुमार शुक्ल 'भ्रमर'५
६-७.३० पूर्वाह्न
जम्मू और कश्मीर
२५ नवम्बर २०१७
दे ऐसा आशीष मुझे माँ आँखों का तारा बन जाऊं
कीट पतंगों के मानिंद
हत्यारे तुम-हमे बुलाते
जागें प्रहरी नहीं है नींद
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उधर काटता केक वो बैठा
ड्राई फ्रूट चबाता है
घोर निशा में सर्द बर्फ हिम
कब्र तेरी बनवाता है
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आतातायी ब्रेनवाश कर
नित नए जिहाद सिखाता है
'मूरख' ना बन तू भी मानव
कभी सोच रे ! क्या तू दानव ?
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मार-काट नित खून बहाना
कुत्तों सा निज खून चूसना -
खुश होना फिर- कौन मूर्ख सिखलाता है
नाली के कीड़े सा जीवन क्या 'आजादी' गाता है
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कितनी आशाएं सपने लेकर
माँ ने तेरी तुझको पाला
क्रूर , जेहादी भक्षक बनकर
बिलखाया ले छीन निवाला
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'स्वर्ग' सरीखा अपना भारत
'देव' तुल्य जन-गण-मन बसता
प्रेम पगी धरती 'फिर' स्वागत
'मानव' बन तू 'फिर' आ सकता
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चीख रही माँ बहने तेरी
'आ लौट ' गुहार लगाती हैं
'काल' यहां नित अब मंडराता
'कब्र खोद ' थक जाती हैं
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एक बार फिर फिरकर आ जा
माँ को अपने गले लगा ले
हिंसा बंदूके बम छोड़े
‘प्रेम की गंगा’ यहां समा जा
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माँ तेरी नित-नित घुट मरती
रिश्ते नाते तार -तार हो लिए कफ़न सब रोते हैं
घायल की गति तू क्या जाने
टीस-दर्द का 'विष' प्याला भर पीते हैं
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मै माँ तेरी वो उसकी माँ ऐसे-वैसे
सब 'अपने' - भाई के रिश्ते
गोलीबारी -पत्थरबाजी मरते अपने
लिए कफ़न ताबूत खड़े वे बने फ़रिश्ते
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कुछ मासूमों की आँखों में
ख्वाब तैरते कैसा भाई -बाप कहाँ ?
'लव' जेहाद फंस कुछ बालाएं
जूझ रहीं ना घर दिखता ना घाट यहां
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बैठ कभी जंगल हिम में ही
तनहाई जब तू पाए
सोच ज़रा पल नयी दिशा दे
मार-काट तज घर आये
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गलियां चौबारे बचपन कुछ
मित्र मण्डली याद करो
क्या करने जग आया प्यारे ?
गोदी माँ ‘कुछ’ याद करो
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माँ की आँखों में जादू है
बड़ी शक्ति है मन्नत दुआ की खान यही
भटक गया बेकाबू तो क्या
अब भी तुझे बचा लेगी
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"मौलिक व अप्रकाशित"
सुरेंद्र कुमार शुक्ल 'भ्रमर'५
६-७.३० पूर्वाह्न
जम्मू और कश्मीर
२५ नवम्बर २०१७
दे ऐसा आशीष मुझे माँ आँखों का तारा बन जाऊं
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