BHRAMAR KA DARD AUR DARPAN

Friday, December 9, 2022

फूल बन गई कोमल कोमल


गदरायी हूं बंद कली हूं
मादक गंध बढ़ी ही जाती
आज बंद हूं मै परदे में
बड़ी सुरक्षित घुटन भी कुछ है
कैद कैद जैसे फंदे में
जकड़ी हूं स्वच्छंद नही हूं
आतुर हूं देखूं कुछ दुनिया
आकुल व्याकुल कैसी दुनिया?
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आज खिली हूं प्रकृति सुहानी
नेह भरी हूं नैनन पानी
सूरज चंदा तारे प्यारे पंछी उड़ते
अदभुत दुनिया अजब नजारे
मलयानिल की पवन छू रही
सिहरन गात है न्यारी प्यारी
खुशकिस्मत हूं खुशी हैं लोग
नैना भंवरे मुझे निहारें
आकुल व्याकुल क्या होगा कल?
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फूल बन गई कोमल कोमल
पंखुड़ियां रंगीन छुएं दिल
भंवरे अब मंडराते सारे
जन्नत परी जान भी वारें
कांटे भी सिहरन सिसकन भी
हवा विरोधी जब जब चलती
सुख या दुख कुछ समझ न पाऊं
मनहर मन खुश्बू भर जाऊं
आकुल व्याकुल खिली ही जाऊं।
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कभी शीश पर जटा कभी मैं
दूल्हा दुल्हन खूब सजाऊं
गुल गुलाब केतकी मनोहर
कामिनी चंपा मधु मालती
रात की रानी रजनी गंधा
नीम चमेली डोलन चम्पा
अगणित नाम से मैं इतराऊं
स्नेह मिले फूलूं इतराऊं
आकुल व्याकुल अनहोनी डर!
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कभी तोड़ते लेते खुश्बू
मसल कुचल देते हैं फेंक
रंग बिरंगा सारा सपना
काया मिलती मिट्टी धूल
सबरस यौवन मधु मकरंद
झूठी दुनिया कड़वा सच
पंच तत्व में मिलती काया
सच है ये ही जीवन मूल
उगा पेड़ फिर खिली कली
मुस्काते फिर झूम चली।
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सुरेन्द्र कुमार शुक्ल भ्रमर 5
प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश 
भारत
4.50 _5.14 मध्याह्न














दे ऐसा आशीष मुझे माँ आँखों का तारा बन जाऊं

Tuesday, September 13, 2022

भारत मां की बिंदी हिन्दी


भारत माँ की बिंदी प्यारी अपनी हिन्दी हिंदी (ब्लॉगिंग हिंदी को मान दिलाने में सार्थक हो सकती है)…


भारत माँ की बिंदी  प्यारी अपनी हिन्दी
हिंदी ब्लॉगिंग हिंदी को मान दिलाने में सार्थक हो सकती है
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मस्तक राजे ताज सभी भाषा की हिन्दी
ज्ञान दायिनी कोष बड़ा समृद्ध विशाल है
संस्कृत उर्दू सभी समेटे अजब ताल है
दूजी भाषा घुलती हिंदी दिल विशाल है
लिए हजारों भाषा करती कदम ताल है
जन - मन जोड़े भौगोलिक सीमा को बांधे
पवन सरीखी परचम लहराती है हिंदी
भारत माँ की बिंदी  प्यारी अपनी हिन्दी  ...........
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१ १  स्वर तो ३ ३ व्यंजन 52 अक्षर अजब व्याकरण
गिरना उठना चलना सब सिखला बैठी अन्तःमन
कभी कंठ से कभी चोंच से होंठ कभी छू आती हिन्दी
सुर की मलिका  सात सुरों गा, दिल अपने बस जाती हिन्दी
उत्तर-दक्षिण पूरब-पश्चिम ,  दसों दिशा लहराती हिन्दी
आदिकाल से रूप अनेकों धर भाषा संग आती हिन्दी
गाँव-गाँव की जन-जन की अपनी भाषा बस जाती हिन्दी
उन्हें मनाती मित्र बनाती चिट्ठी -चिटठा लिखवाती हिन्दी

भारत माँ की बिंदी  प्यारी अपनी हिन्दी  ...........
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शासन भी जागा है अब तो रोजगार दिलवाती हिन्दी
पुस्तक और परीक्षा हिन्दी  साक्षात्कार करवाती हिन्दी
अभियन्ता तकनीक लिए मंगल शनि जा आती हिन्दी
शिक्षण संस्था संस्कृति अपनी दिल में पैठ बनाती हिन्दी
आँख-मिचौली सुप्रभात से बाल-ग्वाल से पुष्प सरीखी
न्यारी-प्यारी महक चली ये गली-गली है बड़ी दुलारी
नमो -नमः तो कभी नमस्ते झुके कभी नत-मस्तक होती
सिर ऊँचा कर गर्व भरी परचम अपना लहराती हिन्दी

भारत माँ की बिंदी  प्यारी अपनी हिन्दी  ...........
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गुड़ से मीठी शहद भरी जिह्वा -जिह्वा बस जाती हिन्दी
मातु-कृपा है श्री भी संग में रचे विश्वकर्मा सी हिन्दी
गुरु-शिष्य हों माताश्री या पिताश्री  से सीखे हिन्दी
क्रीड़ा करती उन्हें पढ़ाती विश्व-गुरु बन जाती हिन्दी
लौहपथगामिनी छुक-छुक छुक-छुक भक-भक अड्डा जाती
मेघ-दूत बन दिल की पाती प्रियतम को पहुंचाती
प्रिय प्रियतम का तार जोड़ मन दिल के गीत गवाती हिन्दी
सखी-सहेली छवि प्यारी ले सब का नेह जुटाती हिन्दी

भारत माँ की बिंदी  प्यारी अपनी हिन्दी  ...........
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इसकी महिमा न्यारी प्यारी बड़ी सुकोमल दृढ है हिन्दी
पारिजात सी कामधेनु सी मनवांछित दे जाती हिन्दी
छंद काव्य या ग्रन्थ सभी हम आओ रच डालें हिन्दी
प्रेम शान्ति हो कूटनीति या राजनीति की चिट्ठी पाती
हिंदी रस में डुबा लो प्यारे जन-कल्याण ये कर आती
आओ वीरों सभी सपूतों बेटी-बिदुषी ले के हिन्दी
साँसें  हिंदी जान है हिन्दी वतन अरे ! पहचान है हिन्दी

भारत माँ की बिंदी  प्यारी अपनी हिन्दी  ...........
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मान है ये सम्मान है येभारत माता की बिन्दी हिन्दी
अलंकार है रस-छंदों की गागर-सागर- मंथन हिन्दी
रमी प्रकृति में हमें झुलाती सावन-मनभावन सी हिन्दी
कजरी-तीज,  पर्व संग  सारे चोला -दामन साथ है हिन्दी
आओ रंग-विरंगे अपने पुष्प सभी हम गूंथ-गूंथ के माला  एक बनायें
माँ भारति का भाल सजा के जोड़ हाथ सब नत-मस्तक हो जाएँ
माँ का लें  आशीष नेक और एक बनें हम हिन्दी से जुड़ जाएँ
आओ भरें उड़ान परिन्दे  सा पुलकित हो परचम हिन्दी लहरायें

भारत माँ की बिंदी  प्यारी अपनी हिन्दी  ...........
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सुरेन्द्र कुमार शुक्ल 'भ्रमर'
3.15 A.M. -4.49 A.M.
भारत




दे ऐसा आशीष मुझे माँ आँखों का तारा बन जाऊं

Monday, August 15, 2022

स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं

प्रिय स्नेही स्वजन,

देश के 75वें आज़ादी के अमृत महोत्सव पर आप व आप के परिवार तथा सभी इष्ट मित्रगण  को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई






आजादी की सुखद अनुभूति से प्यारी कोई और अनुभूति नहीं. आप ने सदा ये अनुभव किया होगा कि आप के पास धन सम्पदा सब कुछ हो लेकिन आप को यदि किसी प्रकार की आजादी न हो तो सब बेकार लगता है , लेकिन अपने देश की आजादी की बात तो निराली है कितने त्याग और बलिदान के पश्चात ये आजादी अपने हाथ आई गुलामी की बेड़ियों से देश को मुक्ति मिली थी बोलने का हक मिला । अब अपना सारा ध्यान अपने कर्तव्य कौशल खोज ज्ञान विज्ञान पर केंद्रित करना है, देश के  विकास के लिए हर एक भारत वासी को अपना पूर्ण योगदान देना है विकास की प्रतिस्पर्धा में शामिल हों।

आज भारत अपनी विविध संस्कृति एवं संस्कारों को समेटे हिंदुस्तान विश्व पटल पर नित नए आयाम स्थापित कर रहा है... अपना प्यारा तिरंगा यूं ही शोभायमान होकर आजादी के साथ फहराता रहे... आइए हम सब मिलकर संकल्प लें कि राष्ट्रवादी सोच के साथ राष्ट्रहित में अपना एक एक कदम बढ़ाएंगे... बढ़ते जाएंगे, आओ नेक बनें एक बनें.

 दें सलामी इस तिरंगे को जिससे तेरी शान है


सर हमेशा ऊंचा रखना इसका


जब तक तुझमें जान है।


स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक बधाई


जय हिन्द!!! जय भारत। वन्दे मातरम्।🙏🙏
सुरेन्द्र कुमार शुक्ल भ्रमर 5
कवि लेखक साहित्यकार ब्लागर ।
भारत।



दे ऐसा आशीष मुझे माँ आँखों का तारा बन जाऊं