BHRAMAR KA DARD AUR DARPAN

Tuesday, March 1, 2022

हर हर महादेव, महाशिव रात्रि


*भगवान भोलेनाथ की जय हो*
हर हर महादेव, हर हर महादेव, बम बम भोले।

*भगवान शंकर से हमें सीखना चाहिए*
कि जीवन का सार क्या है ?
*भगवान शंकर ही मात्र एक देवता हैं जो परिवार के साथ पूजे जाते हैं*
*भगवान शंकर के परिवार को देखकर हमे सीखना चाहिए कि घर समाज  में विष भी होता है और अमृत भी, क्रोध भी होता है और क्षमा भी , प्रेम भी होता है और स्वाभिमान भी होता है, अनुशासन भी होता है, और परिवार से ही संस्कार मिलता है उन सब के बीच सन्तुलन बनाने से ही परिवार चलता है*
*भगवान शंकर स्वर्ण आभूषण नहीं धारण करते, मृगछाला धारण कर उनकी अर्धनग्न अवस्था ये दर्शाती है कि परिवार के मुखिया को वस्र खान पान का सुख त्याग करने के लिए तैयार रहना  चाहिए*
परिवार त्याग, समर्पण, सदभाव, एक दूसरे के लिए त्याग, से चलता है 
*लालच, स्वार्थ, जरूरत से ज्यादा स्वाभिमान परिवार में कलह के कारण बनते हैं* 
भगवान शंकर हम सब का भला करें , भगवान शंकर की तरह हमारा और आप सब का परिवार भी नाम व यश पाए यही प्रभु भोले बाबा से कामना करता हूँ
*हर हर महादेव*
*महाशिवरात्रि की आप सपरिवार को हम सपरिवार की तरफ से ढेर सारी हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई*
महामृत्युंजय मंत्र के प्रभाव से हर तरह का डर और तनाव खत्म हो जाता है। शिवपुराण में उल्लेख किए गए इस मंत्र के जप से आदि शंकराचार्य को भी जीवन की प्राप्ति हुई थी। ॐ हौं जूं स: ॐ भूर्भुव: स्व: ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ॐ स्व: भुव: भू: ॐ स: जूं हौं ॐ !!
🙏🙏🙏🙏🙏🙏
सुरेन्द्र कुमार शुक्ल भ्रमर 5, प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश, भारत।
👏👏👏👏👏👏








दे ऐसा आशीष मुझे माँ आँखों का तारा बन जाऊं

Friday, February 25, 2022

अब वसंत ने दी है दस्तक

अब वसंत ने दी है दस्तक















पात लुटाये पौधे सारे, 
 हर- हर- हर- हर 
सारे आज हुए नतमस्तक
 ऋतु बदली तो 
 मन भी बदला 
 पौधे फूल सा झूमे 
 कल की कटुता
 आज भुलाये 
 हर- हर को बस चूमे 
 कल देखो होगी हरियाली
 नयी कोंपलें 
 'बौर' आम 
 कोयल की कूक 
 बारिश रिमझिम
 पीले मेढक 
 सरसों के वे पीले फूल 
कहीं नाचता मोर दिखेगा
 भरे हुए पानी के खेत
 रंग विरंगे फूल खिलेंगे 
 खुश्बू फैलेगी चहुँ ओर
 बाग़ बगीचे कूचे उपवन
 खुश्बू इतनी प्यारी होगी
 खिंचे चले आएंगे हर मन !
 हर हर महादेव का नारा
 शिव- शिव शिव हो का जय घोष
 आओ मन को 'पूत' बना लें
 प्रेम से पालें 
 अनुचित टालें
 प्यार से पालें 
 तभी तपस्या अपनी पूरी
 दूरी अन्तः की मिट जाए
 मन से मन गर मिल जाये
 फिर क्या .....
 मन " वसंत " 
दुनिया वासन्ती 
बन ही जाए !
 सुरेन्द्र कुमार शुक्ल भ्रमर5 उत्तर प्रदेश , भारत 
 दे ऐसा आशीष मुझे माँ आँखों का तारा बन जाऊं

Saturday, January 1, 2022

शुभ सब होगा नए वर्ष में

घना कुहासा जो घेरे था आज रोशनी थी कुछ आई नन्ही नन्ही मोती माला जैसे सूरज को पहनाई इंद्र धनुष सी छटा बिखेरे आसमान था रचा स्वयंवर कभी सेहरे दूल्हा दिखता दुल्हन चूनर ओढ़े अंबर मिले गले क्रीड़ा कुछ करते खेल खेल हर रंग भरे प्रेमामृत घट छलक रहे थे नेह अनूठे पोस रहे निशा सजाए सेज पुष्प से स्वागत को तैयार दिखी कुछ ज्यों नूतन होने वाला होंठों हर मुस्कान खिली स्वर्ण रश्मियां कल छू लेंगी नैनों के रस्ते उतरे हर दिल में झंकार उठेगी बो देंगी कुछ बीज प्रेम के सींचें पोषेंगे हम वर्षों काटेंगे हम फसल प्रेम की फूल खिलेंगे चहकें चिड़ियां खुशियां नाचेंगी अंगनाई उड़ेगी फिर अब सोन चिरैया कैद नहीं पिंजड़ों में होगी नदी दूध की, गंगा मैया स्नेह सिक्त घट घट में होंगी। शुभ सब होगा नए वर्ष में सपने सबके होंगे पूरे हर हाथों को काम मिलेंगे भाग्य भी बदलें हस्त लकीरें। स्वागतम 2022 सुरेन्द्र कुमार शुक्ल भ्रमर 5 ब्लागर, कवि एवं लेखक प्रतापगढ़ , उत्तर प्रदेश भारत दे ऐसा आशीष मुझे माँ आँखों का तारा बन जाऊं