ख्वाबों में वो रचे घरौंदे
कितने, मटियामेट हुए,
आंसू की कुछ थाह नहीं है,
स्नेह पुष्प नासूर बने,
गली गली जब एक सा रोना
हृदय सांत्वना देता है ,
रिसते रिश्ते घाव मौन है
शूली भी चढ़ लेता है
दे ऐसा आशीष मुझे माँ आँखों का तारा बन जाऊं
Friday, June 12, 2020
Sunday, May 3, 2020
मानव मानवता को वर ले
हमने मिलकर थाल बजाई,
शंख बजा फिर ज्योति जगाई,
मंत्र जाप मन शक्ति अाई,
योग ध्यान आ करें सफाई,
जंग जीत हम छा जाएंगे,
विश्व गुरु हम कहलाएंगे,
आत्मशक्ति अवलोकन करके,
एकाकी ज्यों गुफा में रह के,
जन मन का कल्याण करेंगे
द्वेष नहीं हम कहीं रखेंगे
प्रेम से सब को समझाएंगे
मानव मानवता को वर ले
पूजा प्रकृति की जी भर कर ले
मां है फिर गोदी में लेगी
पीड़ा तेरी सब हर लेगी
हाथ जोड़ बस करे नमन तू
पाप बहुत कुछ दूर रहे तू
जल जीवन कल निर्मल होगा
मन तेरा भी पावन होगा
मां फिर गले लगा लेगी जब
खेल खेलना रमना बहुविधि
सब को गले लगाना फिर तुम
हंसना खूब ठ ठा ना जग तुम।
सुरेन्द्र कुमार शुक्ल भ्रमर 5
UTTAR PRADESH
10APRIL2020
7.11 AM
दे ऐसा आशीष मुझे माँ आँखों का तारा बन जाऊं
Saturday, March 28, 2020
* मेरा हर मित्र उनके हर नजदीकी और मित्र, सभी रिश्तेदार स्वस्थ और सुरक्षित चाहिए, आप सब मेरी अमूल्य धरोहर हैं।
आप सभी जन अपने आप को स्वस्थ रखते हैं तो मुझ पर आपका बड़ा ऋण रहेगा।।
ईश्वर आपको स्वस्थ बनाए रखें। समृद्धि तो हम हमारी एकता से पुनः अर्जित कर लेंगे...!!
कृपया आप सभी स्वयं का ख्याल रखें सामाजिक दूरी बनाए रखें, साफ सफाई रखें..
स्वस्थ रहें... सुरक्षित रहें...!!*
मां जगदम्बे सब को असीम ऊर्जा दें
सुरेन्द्र कुमार शुक्ल भ्रमर5
🙏🙏
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दे ऐसा आशीष मुझे माँ आँखों का तारा बन जाऊं
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