Thursday, November 22, 2012

ताकतवर कुत्ते


हम लोगों की आँखों के सामने
पैदा हुए कुछ पिल्ले यहीं पले बढे
दूध मलाई खाए कार में चढ़े दुलराये
भौंकते-हमें डराते ताकतवर बन जाते हैं
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( फोटो साभार गूगल नेट से लिया गया)
फिर झुग्गी बस्ती में आये पेट दिखाए
दुम हिलाए पाँव चाटे दोस्त बन जाते हैं
आगे पीछे घूम घूम सूंघ सूंघ सारी ख़बरें
बड़े कुत्तों तक पहुंचाते हराम की खाते हैं
दिलदार ‘आम’ आदमी दिल बड़ा रखता है
दिल से कहता है दिल की सुनता है
अच्छाई ईमानदारी गुण ही बुनता है
भागता है छुपता है डर डर चलता है
पिल्ले ये शेर बने गरजे बढे जाते हैं
नोच खोंच दर्द दिए खून पिए जाते हैं
दर्द हरण सुई लगा ‘आम’ लोग जीते हैं
दर्द व्यथा दिल जला सारा गम पीते हैं
ताकतवर कुत्ता दिन-दिन बौराता है
छेड़ – नोंच ‘गले’ चढ़े बड़ा गुर्राता है
दुम दबी -सीधी खड़ी आँखें दिखाता है
पागल है-पागल है शोर तब मचता है
लाठी ले पीट तब मार ‘आम’ हटता है
‘आम’ लोग-लाठी में बड़ी ही ताकत है
लम्बी उमर ‘भ्रमर’ – शिव-शैव ताकत है
करुण नैन त्रिनेत्र जभी बन जाता है
घास फूस महल लोक-स्वर्ग भी जलाता है
प्रेम दया जोश होश सत्य न्याय भारी है
घृणा झूठ अहम् कुनीति सदा ही हारी है !
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सुरेन्द्र कुमार शुक्ल भ्रमर ५
८.४० पूर्वाह्न
रविवार -कुल्लू
१४.१०.2012








दे ऐसा आशीष मुझे माँ आँखों का तारा बन जाऊं