Friday, May 6, 2016

जाने क्यों आती है खुशियां

जाने क्यों आती है खुशियां

हरी भरी बगिया उपवन सब
गिरि कानन सब शांत खड़े थे
जोह रहे ज्यों बाट क्लांत मन
स्वागत आतुर बड़े खड़े थे
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आह्लादित भी मन में तन में
इंतजार कर ऊब  रहे थे
लाखों   सपने नैना तरते
पुलकित हो बस सोच रहे थे
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रोमांचित मन सिरहन वे पल
साँसे लम्बी कुछ पीड़ा थी
उपजी प्रकृति मूर्त रूप वो
बढ़ती सम्मुख सुख बेला थी
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गात हुए मन हहर - हहर कर
गोदी भर- भर खूब दुलारे
मन करता बस हृदय में भरकर
मूंदे नैना स्नेह लुटा दे
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हलचल बड़ी अनोखी अब तो
पकडे ऊँगली हमें खिलाती
नाना रूप धरे बचपन के
बड़ी छकाती- खूब हंसाती  -कभी रुलाती
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बड़ी हुई यौवन रस छलका
मलयानिल  खुशबू ले धायी
चारों ओर नशा मादकता
नृत्य खुमारी हर मन छाई
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प्रेम पगा हर मन में खुशियां
चाह हमारी बन रह  जाये
मधुर-मधुर सुर की मलिका वो
जीवन- संगीत मेरे संग गाए
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पगली बदली नयनन  सर सरके
अल्हड सरिता सी बहती जाये
साध निशाना काम-रति के
छलनी दिल के अति मन भाये
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किये कल्पना नयनन  आती
दिल में वो गुदगुदी मचाती
मूक अवाक् ये आनन्दित मन
नाच उठे जब रास रचाती
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गिरि कानन तरुवर सब झूमे
फुल्ल कुसुम शोभित  रस फूले
आनंदी संग पेंच  पतंगे
ज्यों सावन के  पड़े हो झूले
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मन मयूर हर क्षण अब नाचे
नया नया सा हर कुछ लागे
रूप निखर बहु बाण चलाये
हर मन ईर्ष्या भर भी जाये
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ये स्वतंत्र स्वछन्द बहुत है
हाथ किसी के   ना आएगी
परी खूबसूरत पंछी है
तड़पा करके उड़ जाएगी
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उसका कोमल गात है प्यारा
छूकर हरे वेदना सारी
चन्दन सी जाएगी महका
घर आँगन फुलवारी सारी
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आलिंगन कर गदगद करती
जिया हिया हर पैठ बनाती
झांके नैनो में कुछ कहती
छूट न जाये कोई भी प्रिय -बढ़ती जाती
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ह्रदय सिंधु फिर  रोक न पाया
लहरें   हहर उठी अंतर में
अरे ! विदाई का क्षण आया
फूटा झरना नयनन मन से
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जाने क्यों आती है खुशियां
खुश करके फिर बड़ा रुलाती
परिवर्तन ही नियम प्रकृति का
उपजे खेले फिर मिट जाती
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सुरेन्द्र कुमार शुक्ल भ्रमर ५
५/५/२०१६ ५.४० अपराह्न
कुल्लू हिमाचल प्रदेश .

6 comments:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (07-05-2016) को "शनिवार की चर्चा" (चर्चा अंक-2335) पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
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शुभकामनाओं के साथ
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

राकेश कौशिक said...

बढ़िया

Surendra shukla" Bhramar"5 said...

आदरणीय शास्त्री जी रचना आप के मन को छू सकी और आप ने इसे चर्चा मंच पर स्थान दिया ख़ुशी हुयी
जय श्री राधे
भ्रमर ५

Surendra shukla" Bhramar"5 said...

राकेश भाई रचना आप के मन को छू सकी और आप ने प्रोत्साहन दिया अच्छा लगा आभार
जय श्री राधे
भ्रमर ५

Kavita Shukla said...

papa ji..bahot hi achhi rachna..

Surendra shukla" Bhramar"5 said...

THANK YOU KAVITA FOR ENCOURAGING ..N WELCOME AT BHRAMAR KA DARD AUR DARPAN