Saturday, March 8, 2014

नैन चढ़ी काली-काली ये

 
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नैन चढ़ी काली-काली ये 


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मंत्री जी क़ी नयी नवेली
भैंस बड़ी अलबेली
ऐसी डुबकी मारी भैया
बन गयी अजब पहेली
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घन-घन घंटी बजी रात भर
पुलिस महकमा जागा
होमगार्ड संतरी सेक्रेटरी
एस पी डी एस पी सब भागा
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काला अक्षर भैंस बराबर
काला ही मन भाये
काला कोयला काले धन में
मन जोगी रम जाए
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नैन चढ़ी काली-काली ये
भैंस खोज शुभ लाये
दूध धन्य नेतागिरी में
हुयी वरक्कत नजर नहीं लग पाये
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मंदिर-मस्जिद पूजा -मन्नत
भैंस जल्द मिल जाए
नहीं नौकरी कितनी मुश्किल
गयी ! जेल हो जाए
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आसू सांई नारायण सी भैंसी
गुप्त गुफा पगुराये
ड्राई फ्रूट चबाया जो था
वही हजम हो जाए
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चारा कोई और खा गया
क्या चरने को आये
ए.सी. कूलर हीटर ऊटर
भैंस के मन ना भाये
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काली-काली गाय भैंस सब
हांक -पकड़ कर लाये
कौन गाय हैं  भैंस कौन है
अब ये समझ ना आये
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ज्ञानी -ध्यानी कुछ विज्ञानी
टेस्ट परख आजमाए
चुप्पी साधे 'थी' मंत्री क़ी
बाकी पशु चिल्लाये
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देशी को है कौन पूछता
ये तो कोई विदेशी होगी
सारा अमला पूछ सरीखा
पीछे-पीछे सदा घूमता
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अब लो दूध पियो हे राजा
बने रहो मुश्तंद
पहलवान के दल में जैम के
कुश्ती दांव दिखाओ रंग
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भूखी -प्यासी जनता बच्चे
दूध -दरश ना पाएं
अंधे-बूढ़े-रोगी जल्दी
सदा पटखनी खाएं
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बलशाली हो चुन के राजा
वे भूखे ही लाएं
जिसकी लाठी भैंस उसी क़ी
कालिदास दे जाएँ
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सुरेन्द्र कुमार शुक्ल भ्रमर ५
७.४०-८.२० पूर्वाह्न
करतारपुर पंजाब
१६.०२.२०१४


दे ऐसा आशीष मुझे माँ आँखों का तारा बन जाऊं

4 comments:

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया said...

वाह ! बहुत खूब सुंदर सृजन...!

RECENT POST - पुरानी होली.

संजय भास्‍कर said...

हालात का बयां करती सुन्दर रचना.

संजय भास्‍कर said...

हालात का बयां करती सुन्दर रचना.

हिमकर श्याम said...

बहुत खूब, अच्छा व्यंग्य है ...