Monday, July 30, 2012

अन्ना जी तुम मूंछ बढाओ पूछ बढाओ


रक्षा बंधन की हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई हमारे सभी प्रिय मित्रों को .

.प्रभु से प्रार्थना है कि ये भाई बहन का पर्व यों ही सदा सदा के लिए अमर रहे प्रेम उमड़ता रहे और बहनों की सुरक्षा के लिए हम सब के मन में जोश द्विगुणित होता रहे ...

आइये बहनों को सदा खुश रखें हंसे हंसाएं प्रेम बरसायें ...तो आनंद और आये ...

जय श्री राधे

आप सब का 'भ्रमर'५


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अन्ना जी तुम मूंछ बढाओ पूछ बढाओ
अगर न ऐ सी पंखे लगते
बड़े बड़े कुछ तम्बू लाओ बम्बू ला के
‘तेल’ पिला दो ‘ताकतवर’ आंधी तूफाँ जो झेल सकें
चमड़ी जिनकी जली पड़ी है एँड़ी जिनकी फटी पड़ी है
बारिस धूप में भिगा जला ना और सताओ मेरे भाई
दो रोटी को बहा पसीना उलझा कोई आँखें रोयीं
चाटुकार चमचे कुछ पीछे उनके घूम रहे हैं
चिकेन न दारु विरियानी जो दे पाओ तो
बड़े बड़े कुछ देग मंगाओ जंतर ‘मंतर’ मारे अन्ना
जादूगर सा डाल हाथ तुम भूख मिटाओ
नहीं हार-ना -ना दहेज़ ही तुम दे पाओगे
‘खिचड़ी’ खिला -खिला के प्यारे चलो दुलारो
पाँव पे गिर गिर उन्हें मनाओ भीड़ बढाओ
मूंछ बढाओ लम्बी-लम्बी पूछ बढाओ
सौ -सौ जन जब लटकें -ऐंठे–रूतबा पाओ
चले वानरी सेना पीछे भालू बंदर साथ
इसे उखाड़ो -उसे गिराओ कर सब सत्यानाश
तभी तुम्हारी ‘पूछ’ बढ़ेगी ‘तेल’ लिए सब आ जायेगे
महल तभी सब नंगे होंगे ‘जल’-जल अंतर पहचानेगे
गाँव शहर जा ‘फूट’ करा के ‘नेता’ बन छा जाओ
जय -जयकार करा लो अन्ना उनको गले मिलाओ
हर स्कूल या कालेज में जा अन्ना ‘टोपी’ बाँटो
राजनीति ‘चाणक्य’ सिखा दो ‘नेता’ अपने छांटो
कुछ वैकेन्सी चलो निकालो करो ‘हवाला’ ला लो
दुर्योधन धृतराष्ट्र वहां हैं मामा शकुनी बैठे
युधिष्ठिर ‘एक’ भीम करें क्या ‘जुए’ के खेल से निकलो
ये कल-युग है नहीं कृष्ण हैं चीर हरण करवा-ना !
कहें ‘भ्रमर’ अन्ना भगवन हे ! तीन नेत्र ले मूछ बढ़ा लो
पूछ बढ़ा लो ‘शक्ति’ समझो – दुर्गा -चंडी भी लाना !!









(फोटो साभार गूगल / नेट से लिया गया )
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सुरेन्द्र कुमार शुक्ल ‘भ्रमर ‘५
कुल्लू यच पी
६.४०-७.३५ पूर्वाह्न
27.07.2012




दे ऐसा आशीष मुझे माँ आँखों का तारा बन जाऊं

Thursday, July 26, 2012

ऐसे वीर शेर हैं अपने छाती ताने ठाढ़े


ऐसे वीर शेर हैं अपने छाती ताने ठाढ़े
घर में घुस कर घेर लिए हैं दुश्मन को ललकारें
गीदड़ – गीदड़ भभकी देता बोल नहीं कुछ पाए
बिल में घुसकर दौड़ डराता अन्दर ही छुप जाये
साँसे अटकी हैं उन सब की भ्रष्टाचारी जो है
क्या मुंह ले वे सामने आयें फाईल यहाँ भरी है
ऐसे वीर शेर हैं अपने छाती ताने ठाढ़े
नमन तुम्हे हे वीर हमारे कल तुम दुनिया जीते !!
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कहते हैं तुम थाने जाओ कोर्ट कचहरी बाहर देश
शर्म नहीं आती है इनको जन प्रतिनिधि कहता है देश
क्या बोलें क्या करते जाएँ क्या दे जाते हैं सन्देश
दुनिया देखे कायर कहती रोते घूमें सगरो ओर
एक हो कायर भीरु अगर तो आँचल में छुप जाए
इतने चोर उचक्कों को माँ काहे दूध पिलाये ??
ऐसे वीर शेर हैं अपने छाती ताने ठाढ़े
नमन तुम्हे हे वीर हमारे कल तुम दुनिया जीते !!
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कुर्सी बदली बोली बदली अब ना रहे गरीबी
भ्रष्टाचार बुरा है भैया बातें खाली पीली
कुआं खोदने हम जाते हैं उसमे टांग अड़ाए
भूखे प्यासे मार ये देंगे जिद पर अपनी आये
हे माँ क्यों पाला है इनको ऐसे दुर्दिन आये
तेरे दूध की लाज नहीं है थाली छेद कराते
ऐसे वीर शेर हैं अपने छाती ताने ठाढ़े …
नमन तुम्हे हे वीर हमारे कल तुम दुनिया जीते !!
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जोश जवानों का क्या कहना बूढ़े अपने ,,,शेर
पंजा अगर गड़ा देंगे कल साँस न आये ..ढेर
ईमां सत्य की राह न रोको .. ना चलती अंधेर
दिया न बत्ती जलती प्यारे किले बने मिटटी के ढेर
जो अरबों लूटे गाड़े हो तुम गरीब के मुंह से छीने
कफ़न भी ना पाओगे इनसे वो गरीब ही कल सब छीने
ऐसे वीर शेर हैं अपने छाती ताने ठाढ़े ..
नमन तुम्हे हे वीर हमारे कल तुम दुनिया जीते !!
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ना शरमाओ अभी वक्त है साधू तुम बन सकते
कुछ दिन निर्जन काल कोठरी आत्मसमर्पण करके
बेटा बेटी घर रिश्ते भी भी आज करेंगे माफ़
कल जो मुंह ढक के घूमोगे यही करें इन्साफ
ठोकर जब इनसे खाओगे जिनके कारण लूटे
चुल्लू में तुम डूब मरोगे अपनी छाती पीटे..
ऐसे वीर शेर हैं अपने छाती ताने ठाढ़े ..
नमन तुम्हे हे वीर हमारे कल तुम दुनिया जीते !!
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सुरेन्द्र कुमार शुक्ल ‘भ्रमर’५
कुल्लू यच पी
२६.०७.2012
१-१.३७ मध्याह्न







दे ऐसा आशीष मुझे माँ आँखों का तारा बन जाऊं

Tuesday, July 24, 2012

बूढा पेड़



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बूढा पेड़
झर-झर झरता
ये पेड़ (महुआ का )
कितना मन-मोहक था
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रस टपकता था
मिठास ही मिठास
गाँव भर में
‘भीड़’ जुटती
इसके तले
images (1)
‘बड़ा’ प्यारा पेड़
‘अपने’ के अलावा
पराये का भी
प्यार पाता था
हरियाता था
images (2)
images (3)

फूल-फल-तेल
त्यौहार
मनाता था
थम चुका है
अब वो सिल-सिला
बचा बस शिकवा -गिला
फूल-फल ना के बराबर
मन कचोटता है ……
आखिर ऐसा क्यों होता है ??
सूखा जा रहा है
पत्ते शाखाएं हरी हैं
‘कुछ’ कुल्हाड़िया थामे
जमा लोग हंसते-हंसाते
वही – ‘अपने’- ‘पराये’
काँपता है......
 ख़ुशी भी.....
ऊर्जा देगा अभी भी
‘बीज’ कुछ जड़ें पकड़ लिए हैं
‘पेड़’ बनेंगे कल
फिर ‘मुझ’ सा
‘दर्द’ समझेंगे !
आँखें बंद कर
धरती माँ को गले लगाये
झर-झर नीर बहाए
चूमने लगा !!

( सभी फोटो गूगल नेट से साभार लिया गया )

सुरेन्द्र कुमार शुक्ल ‘भ्रमर’५
कुल्लू यच पी २५.६.१२
८-८.३३ पूर्वाह्न




दे ऐसा आशीष मुझे माँ आँखों का तारा बन जाऊं

Wednesday, July 18, 2012

भाव भीनी श्रद्धांजलि-हमारे प्रिय अभिनेता सुपर स्टार राजेश खन्ना




हमारे प्रिय अभिनेता सुपर स्टार राजेश खन्ना आज हम सब को छोड़ चले उनके जाने से आज हमारे बालीवुड और हम सभी उनके फैन्स , प्रशंसकों के दिल में दर्द भर गया एक अपार कमी महसूस की जाने लगी ! ६९ वर्ष की अवस्था तक हँसते मुस्कुराते अपने प्रशंसकों को हंसाते उन्होंने साथ निभाया हम अपनी और सभी मित्रों की तरफ से उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित करते भाव भीनी श्रद्धांजलि देते हैं !
एक दौर था जब की फ़िल्मी जगत में वे अरसे तक छाये रहे सुपर स्टार बने और लगातार उनकी फिल्मे हिट होती रहीं स्कूल कालेज के दिनों में ही विद्यार्थियों में भी इतना क्रेज देखा जाता था 
उनकी अदाएं उनका अलग अंदाज शाल ओढ़ कर उनके हाथों का घुमाना आसमान की तरफ देख उस प्रभु से आत्म मिलन करना यादें ही यादें 
१९६९ से १९७२ तक लगभग १५ फिल्मे लगातार हिट रहीं काका जी छाये रहे बुलंदियों पर ...आराधना की सफलता ने सब के दिलों में उन्हें बसा दिया ..कितनी अल्हड लड़कियों ने अपने को उनकी फोटो से भंवर ले  श्रीमती राजेश खन्ना कहने में फख्र समझा ..फिर  थोड़ी सी बेवफाई, आखिर क्यों, अगर तुम न होते , अवतार और अमृत में यादगार अभिनय रहा रोमांटिक हीरो के साथ दर्द का मंजर भी उन्होंने बखूबी दिखा रुला दिया ...
१९९२ में दिल्ली से सांसद बने कांग्रेस पार्टी के टिकट पर ! 
उनकी एक तमन्ना थी जय जय शिव शंकर फिल्म भोले  बाबा की नगरी वाराणसी के ऊपर बने उन्होंने कई बार वहां का दौरा भी किया था लेकिन राजनीति और ये फ़िल्मी मायावी दुनिया में तालमेल न हो पाने से ये ख्वाब अधूरा रहा ..
अंत में डिम्पल जी साथ आयीं  , बेटी ट्विंकल , दामाद अक्षय साथ रहे लेकिन छोटी बेटी रिंकी लन्दन में ही रही , लोगों ने प्रार्थनाएं हवं यज्ञं किये लेकिन प्रभु की माया एक न एक दिन तो जाना ही है सब को सब कुछ छोड़ ..प्रभु उनके घर परिवार सब को शांति दे ....संबल दे ....
उनका डायलाग की न शोहरते न इज्जत न कामयाबी कुछ भी साथ  नहीं जाएगा और दौर बदल जाएगा सच ही हो गया .....
२००९ में ईफा से लाइफ टाईम अचीवमेंट पुरस्कार 
फिल्म फेयर 
२००५ लाइफ टाईम अचीवमेंट पुरस्कार 
१९९०- विशिष्ट पुरस्कार 
१९७५-अविष्कार के लिए बेस्ट एक्टर-1973
१९७२-आनंद के लिए बेस्ट एक्टर -१९७१
१९७१- सच्चा झूठा के लिए बेस्ट एक्टर  -१९७० 
स्क्रीन वीकली पुरस्कार 
२००४- लाइफ टाईम अचीवमेंट पुरस्कार 
फिल्म फेयर के लिए तो लगभग १४ बार उनके नाम को प्रस्तावित किया गया 




जिस गली में तेरा घर न हो बालमा ...
प्यार दीवाना होता है मस्ताना होता है 
आज न छोड़ेंगे हम हमजोली 
यह शाम मस्तानी मदहोश किये जाए 
ना कोई उमंग है ना कोई तरंग है 
किशोर जी की आवाज उनके लिए वरदान थी अद्भुत समन्वय .....

अब नम  आँखों से और ख्यालों में खो और क्या कहना बस यही ....
दुनिया से जाने वाले जाने चले जाते हैं कहाँ ???

भ्रमर ५ 




दे ऐसा आशीष मुझे माँ आँखों का तारा बन जाऊं

Sunday, July 15, 2012

कोख को बचाने को... भाग रही औरतें





बीबी पुर (जींद हरियाणा) की महिलाओं, अन्य प्रदेशों की बहादुर महिलाओं को नमन जिन्होंने घर परिवार का विरोध सह ज़माने से लड़ने को ठाना .भ्रूण हत्या महा पाप है और वो भी चुन चुन कर , पहचान कर कन्या भ्रूण को नष्ट करना ..हत्या नहीं तो और क्या है ?  कोई बेहद मूर्ख ही इस तरह का  घृणित कार्य और इसकी सराहना  कर सकता है .. इस तरह के अनूठे काम को अंजाम दे खाप पंचायतों ने ये जता दिया की मन में इच्छा हो और हमारा उद्देश्य समाज की भलाई को हो तो हम सफल हो सकते हैं ..मुख्यमंत्री हूडा जी को भी धन्यवाद और आभार जिन्होंने एक करोड़ इस गाँव के विकास  के लिए और इसकी याद के लिए पुरस्कार स्वरुप नवाजे ....

अब इस पर अमल हो ..और इस की जड़ अर्थात दहेज़ का पुरजोर विरोध हो तब ही बेटियों का स्वागत होगा इस लिए दहेज़ के लिए सरकार न केवल कानून बना के सोये बल्कि अपने गुप्तचर एजेंसिस शादियों में लगाए खुद देखे खुद दहेज़ पर आक्रमण करे लोग खुल के सामने नहीं आते उन्हें उसी घर परिवार समाज में रहना है तो तिल तिल कर मरने में डरते हैं ....

बेटियों की सुरक्षा पढाई लिखाई और उनकी शादियों दहेज़ तक की चिंता सरकार को करना होगा बेटियों  को जनने  वाली माँ को केवल ११००  मुहैया करा कर सरकार अपना पल्ला नहीं झाड सकती ....ये राशि दो दिन भी नहीं चलती ..तो दहेज़ की बात तो काल है यमराज है उनके लिए .....जागो सरकार जागो ..हमारे बीच से गए भाइयों , विधायकों,  मंत्रियों जागो आप का  घर परिवार जान जहान सब कुछ इस समाज का है यहीं रहेगा यहीं पलेगा   ...कुछ तो करो इस जीवन में आप का नाम रह जाए यहाँ ......

<strong>कोख को बचाने को... भाग रही औरतें
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ये कैसा अत्याचार है
'कोख' पे प्रहार है
कोख को बचाने को
भाग रही औरतें
दानवों का राज या
पूतना का ठाठ  है
कंस राज आ गया क्या ?
फूटे अपने भाग है ..
रो रही औरतें
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उत्तर , मध्य , बिहार  से
'जींद' हरियाणा चलीं
दर्द से कराह रोयीं
आज धरती है हिली
भ्रूण हत्या 'क़त्ल' है
'इन्साफ' मांगें औरतें ....
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जाग जाओ औरतें हे !
गाँव क़स्बा है बहुत
'क्लेश' ना सहना बहन हे
मिल हरा दो तुम दनुज
कालिका चंडी बनीं
फुंफकारती अब  औरतें ...
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कृष्ण , युधिष्ठिर अरे हे !
हम सभी हैं- ना -मरे ??
मौन रह बलि ना बनो रे !
शब्दों को अपने प्राण दो
बेटियों को जन जननि हे !
संसार को संवार दो
तब खिलें ये औरतें
कोख को बचाने जो
भाग रहीं औरतें
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सुरेन्द्र कुमार शुक्ल 'भ्रमर' ५
१४.७.२०१२
८-८.३८ मध्याह्न
कुल्लू यच पी
</strong>




दे ऐसा आशीष मुझे माँ आँखों का तारा बन जाऊं

Thursday, July 12, 2012

श्रद्धांजलि ...प्रिय दारा सिंह जी हम सब को छोड़ चले ......

हमारे प्रिय जांबाज कुश्ती के माहिर , पहलवानी से 50 के दशक में आये फिल्म जगत में छाये दारा  सिंह जी 84 तक साथ निभा अब हमें छोड़ चले ..नम  आँखों से हम उन्हें हार्दिक और भावभीनी श्रद्धांजलि देते हैं .....प्रभु उनकी आत्मा को शांति दे और उनके परिवार जन को इस कष्ट की बेला को झेल कर आगे बढ़ने की शक्ति दे ...
रामायण में उनके हनुमान जी के किरदार को कौन भूल सकता है ...

आज सुबह साढ़े  सात बजे उन्होंने अंतिम साँसे ली और आज 12.7.12 को शाम चार बजे मुम्बई के विले पार्ले शवदाह केंद्र में हमारे 'रुस्तम- ऐ -हिंद ...पञ्च तत्व में विलीन हो गए ....उनका चरित्र बहुत ही सुलझा हुआ था वे सचमुच हनुमान सरीखे लोगों के दिल में छा जाते थे ...१९५९ में किंग कांग को हराने    के पश्चात वे विश्व चैम्पियन शिप जीते और फिर तो गाँव गाँव कुश्ती का दौर चल पड़ा ...मेले में ,, नागपंचमी में ..फ्री स्टाईल .....



एक्स्ट्रा से एक्टर बनी मशहूर अदाकारा मुमताज के साथ उन्होंने १६ के लगभग फिल्मे कीं .......लम्बे अरसे से अभी तक वे बालीवुड में छाये रहे 


हनुमान जी के अभिनय से उनकी लोकप्रियता से भाजपा ने उन्हें राज्यसभा की सदस्यता भी दिलाई .....आज भी जय बजरंग बलि का नारा भरते उनका चेहरा सामने आ जाता है ..वे नयनों में बस गए ...
एक बार पुनः उन्हें हार्दिक श्रद्धांजलि .....

सुरेन्द्र कुमार शुक्ल 'भ्रमर'५ 



दे ऐसा आशीष मुझे माँ आँखों का तारा बन जाऊं

Monday, July 9, 2012

नयन ‘ग्रन्थ’ अनमोल ‘रतन’ हैं


नयन ग्रन्थ अनमोल रतन हैं दुनिया इनकी दीवानी 
आत्म-ब्रह्म सब भाषा पढ़ के डूब गए कितने ज्ञानी  
ना भाषा से ना भौगोलिक नहीं कभी ये बंधते 
पाखी सा ये मुक्त  डोलते  हर  मन  पैठ  बनाते 
प्रेम संदेसा ज्ञान चक्षु हैं बन त्रिनेत्र स्वाहा  भी करते   
खंजन नयना मृगनयनी वो सुन्दरता के साक्षी 
दो से चार बने तो लगता जनम जनम के साथी 
इन्द्रधनुष से हैं सतरंगी लाखों रंग समाये 
नयनों की भाषा पढ़ लो प्रिय दुनिया समझी जाये 
प्रेम नयन में क्रोध नयन में घृणा आँख दिखलाती 
मन का काम संदेशा देता नयन बांचते पाती 
कुछ पल छिन में दोस्त बनें कुछ नयन अगर मिल जाए 
दिल के भेद मिटा के यारों अपना दिल बन जाएँ  
अस्त्र सश्त्र दुश्मन रख देते नैन प्यार जो पा लें 
घृणा क्रोध जलता मन देखे नयन उधर ना जाते 
गदराये यौवन मूरति, रस -लज्जा नयन छिपाते 
सुन्दरता में चाँद चार लग झुक नयन पलक छिप जाते 
जैसे बदरी घेर सूर्य को लुका छिपी है खेले 
नयन हमारे मौन प्रेम से 'भ्रमर' सभी रस ले लें 
मन मस्तिष्क दिल नयन घुसे ये जासूसी सब कर लें 
यथा जरूरत बदल रूप ये सम्मोहित कर कब्ज़ा करते  
नयनों का जादू चलता तो शेर खड़ा मिमियाए 
कल का कायर भरे ऊर्जा जंग जीत घर आये 
कजरारे, कारे, सुरमा वाले नयन मोह मन लेते 
मन में राम बगल में छूरी , ये कटार  बन ढाते 
कभी छलकता प्रेम सिन्धु इस गागर से नयनों में 
ना बांधे ना रोके रुकता नयन मिले नयनों से 
नाजुक हैं शीतलता चाहें रोड़ा बड़ा खटकता नैन 
भावुक हैं झरने सा झर-झर प्रेम लीन देते सब चैन
प्रणय विरह व्यथा की घड़ियाँ अद्भुत सभी दिखाएँ 
रतनारे प्यारे नयना ये भूरे नीले हर पल साथ निभाएं 
नयनाभिराम मंच जग प्यारा अद्भुत अभिनय करते नैन 
दर्पण बन हर कुछ दिखलाते सांच कहें ना डरते नैन 
उनके सुख के साथी नयना दुःख में नीर बहा रह जाएँ 
जनम जनम की छवि दिखला के भूल कभी ना जाएँ 
रतनारे 'प्रेमी' नयना ये जामुन जैसे  प्रेम भरे रस घोलें 
प्रेम के आगे रतन-जवाहर जन-परिजन सब छोड़ें 
नयन झरोखे से दिखती सब अपनी राम कहानी 
आओ शुद्ध रखें अंतर सब पावन आँख में पानी 
झील से नयनों कमल-नयन हैं दुनिया यहीं समायी 
प्रेम ग्रन्थ लज्जा संस्कृति है डूब देख गहराई 
नयन पुष्प मादक पराग भर जाम पे जाम पिलाते 
मधुशाला मदहोशी में उठा पटक कर नयन खोल भी जाते 
संग जीवन भर करें उजाला दीप सरीखे  जीवन-ज्योति जगाते 
जाते - जाते नैन दान कर दिए रौशनी नयन अमर हो जाते !


सुरेन्द्र कुमार शुक्ल 'भ्रमर' 
कुल्लू यच पी 
४.७.१२ ६.४०-७.४० पूर्वाह्न




दे ऐसा आशीष मुझे माँ आँखों का तारा बन जाऊं

Monday, July 2, 2012




महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना (BEST CREATION OF THE MONTH)- ओ बी ओ पर 












शीर्षक :- उगता सूरज -धुंध में लेखक:- सुरेन्द्र कुमार शुक्ल 'भ्रमर' वर्तमान स्थान:- कुल्लू (हि.प्र.)
पुरस्कार का नाम :- "महीने की सर्वश्रेष्ट रचना पुरस्कार"पुरस्कार की राशि :- रु. 551/- मात्र
प्रायोजक :- गोल्डेन बैंड इंटरटेनमेंट    (G-Band ) H.O.F-315, Mahipal Pur-Ext. New Delhi.

हमारे सभी प्रिय मित्रों का तहे दिल से आभार ...भ्रमर 5 


उगता सूरज -धुंध में
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कर्म फल -गीता
क्रिया -प्रतिक्रिया
न्यूटन के नियम
आर्किमिडीज के सिद्धांत
पढ़ते-डूबते-उतराते
हवा में कलाबाजियां खाते
नैनो टेक्नोलोजी में
खोजता था -नौ ग्रह से आगे
नए ग्रह की खोज में जहां
हम अपने वर्चस्व को
अपने मूल को -बीज को
सांस्कृतिक धरोहर को
किसी कोष में रख
बचा लेंगे सब -क्योंकि
यहाँ तो उथल -पुथल है
उहापोह है ...
सब कुछ बदल डालने की
होड़ है -कुरीतियाँ कह
अपनी प्यारी संस्कृति और नीतियों की
चीथड़े कर डालने की जोड़ -तोड़ है
बंधन खत्म कर
उच्छ्रिंख्ल होने की
लालसा बढ़ी है पश्चिम को देख
पूरब भूल गया -उगता सूरज
धुंध में खोता जा रहा है
कौन सा नियम है ?
क्या परिवर्तन है ?
सब कुछ तो बंधा है गोल-गोल है
अणु -परमाणु -तत्व
हवा -पानी -बूँदें
सूरज चंदा तारे
अपनी परिधि अपनी सीमा
जब टूटती है -हाहाकार
सब बेकार !
आँखों से अश्रु छलक पड़े
अब घर में वो अकेला बचा था
सोच-व्याकुलता-अकुलाहट
माँ-बाप भगवान को प्यारे
भाई-बहन दुनिया से न्यारे
चिड़ियों से स्वतंत्र हो
उड़ चले थे ...............
फिर उसे रोटियाँ
भूख-बेरोजगारी
मुर्दे और गिद्ध
सपने में दिखने लगते
और सपने चकनाचूर
भूख-परिवर्तन -प्रेम
इज्जत -आबरू
धर्म -कानून-अंध विश्वास
सब जंजीरों में जकड़े
उसे खाए जा रहे थे .....
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३.०२-३.४५ पूर्वाह्न
कुल्लू यच पी १३.०२.२०१२
सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः





दे ऐसा आशीष मुझे माँ आँखों का तारा बन जाऊं