Monday, July 2, 2012




महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना (BEST CREATION OF THE MONTH)- ओ बी ओ पर 












शीर्षक :- उगता सूरज -धुंध में लेखक:- सुरेन्द्र कुमार शुक्ल 'भ्रमर' वर्तमान स्थान:- कुल्लू (हि.प्र.)
पुरस्कार का नाम :- "महीने की सर्वश्रेष्ट रचना पुरस्कार"पुरस्कार की राशि :- रु. 551/- मात्र
प्रायोजक :- गोल्डेन बैंड इंटरटेनमेंट    (G-Band ) H.O.F-315, Mahipal Pur-Ext. New Delhi.

हमारे सभी प्रिय मित्रों का तहे दिल से आभार ...भ्रमर 5 


उगता सूरज -धुंध में
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कर्म फल -गीता
क्रिया -प्रतिक्रिया
न्यूटन के नियम
आर्किमिडीज के सिद्धांत
पढ़ते-डूबते-उतराते
हवा में कलाबाजियां खाते
नैनो टेक्नोलोजी में
खोजता था -नौ ग्रह से आगे
नए ग्रह की खोज में जहां
हम अपने वर्चस्व को
अपने मूल को -बीज को
सांस्कृतिक धरोहर को
किसी कोष में रख
बचा लेंगे सब -क्योंकि
यहाँ तो उथल -पुथल है
उहापोह है ...
सब कुछ बदल डालने की
होड़ है -कुरीतियाँ कह
अपनी प्यारी संस्कृति और नीतियों की
चीथड़े कर डालने की जोड़ -तोड़ है
बंधन खत्म कर
उच्छ्रिंख्ल होने की
लालसा बढ़ी है पश्चिम को देख
पूरब भूल गया -उगता सूरज
धुंध में खोता जा रहा है
कौन सा नियम है ?
क्या परिवर्तन है ?
सब कुछ तो बंधा है गोल-गोल है
अणु -परमाणु -तत्व
हवा -पानी -बूँदें
सूरज चंदा तारे
अपनी परिधि अपनी सीमा
जब टूटती है -हाहाकार
सब बेकार !
आँखों से अश्रु छलक पड़े
अब घर में वो अकेला बचा था
सोच-व्याकुलता-अकुलाहट
माँ-बाप भगवान को प्यारे
भाई-बहन दुनिया से न्यारे
चिड़ियों से स्वतंत्र हो
उड़ चले थे ...............
फिर उसे रोटियाँ
भूख-बेरोजगारी
मुर्दे और गिद्ध
सपने में दिखने लगते
और सपने चकनाचूर
भूख-परिवर्तन -प्रेम
इज्जत -आबरू
धर्म -कानून-अंध विश्वास
सब जंजीरों में जकड़े
उसे खाए जा रहे थे .....
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३.०२-३.४५ पूर्वाह्न
कुल्लू यच पी १३.०२.२०१२
सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः





दे ऐसा आशीष मुझे माँ आँखों का तारा बन जाऊं

10 comments:

डॉ॰ मोनिका शर्मा said...

सार्थक रचना .... बधाई आपको...

रविकर फैजाबादी said...

शुभ कामनाएं बंधू ||

dheerendra said...

सर्वश्रेष्ट रचना का पुरस्कार जीतने की बधाई.,,,,

MY RECENT POST...:चाय....

ZEAL said...

indeed a beautiful creation..badhaii...

Surendra shukla" Bhramar"5 said...

आदरणीया डॉ मोनिका जी आभार प्रोत्साहन हेतु ..भ्रमर५

Surendra shukla" Bhramar"5 said...

आदरणीय रविकर जी आप की शुभ कामनाओ के लिए बहुत बहुत आभार..अपना स्नेह बरसाते रहें --भ्रमर ५

Surendra shukla" Bhramar"5 said...

प्रिय धीरेन्द्र जी आप सब का स्नेह मिलता रहेगा तो आप सब से ये सब उम्मीदें बनी रहेंगी अपना स्नेह सुर सुझाव देते रहें कृपया
भ्रमर ५

Surendra shukla" Bhramar"5 said...

आदरणीया दिव्या 'जील' जी ये रचना सचमुच आप को इस लायक लगी की पुरस्कार मिले सुन ख़ुशी हुयी लिखना सार्थक रहा
आभार
भ्रमर ५

S.N SHUKLA said...

बहुत सुन्दर रचना, सुन्दर भाव , बधाई .

Surendra shukla" Bhramar"5 said...

आदरणीय शुक्ल जी ये हमारे युवाओं की समस्याएं लिए रचना आप के मन को प्रभावित कर सकी सुन ख़ुशी हुयी
आभार
भ्रमर ५