Sunday, July 31, 2011

परफार्मेंश अप्रेजल आया - भ्रष्टाचार को और बढाया


परफार्मेंश अप्रेजल आया -
भ्रष्टाचार को और बढाया

सरकारी कुछ चीज अलग थी
मस्ती सब के जाती छाती
एक बार घुस गये अगर तो
कौन निकाले   किसकी छाती
फ़ाइल का है वजन बहुत ही
टेबल बैठी बस हैं सोती
विधवा पेंशन लगवाने को
बहा हुआ घर बनवाने को
बड़ी तपस्या करनी पड़ती
पाँव दबाओ -बाबू  साहेब कह कर उनका
घर उनके कुछ दान दक्षिणा
टी.व्ही.फ्रिज ही ले जा दे दो
चन्दन लगा यहाँ जो बैठे
उनसे भी कुछ जा के निपटो
पहिया तब फाईल को लगती
लंगड़े सी वो चले रगडती
अगर कहीं सच्चा मिल जाता
कल सीमा या जंगल जाता !!
            III
प्राइवेट में कम नखरे ना
नया नियम कानून धरा है
चमचागीरी -लूटो-बाँटो
बॉस के अपने तलवे चाटो
फुलवारी जा उनकी देखो

गेंहू चावल कुछ लदवा दो
काम करो चाहे सो जाओ
हाँ में हाँ तुम चलो मिलाओ
तभी प्रशंसा पत्र हाथ में
साल में दो परमोशन पाओ  
या छोड़ कंपनी दस दिन  घूमे
लौट के आओ 
कौवा से तुम  हंस बने
गधे से घोडा -दौड़ दिखाओ 
चलने दो उनकी मनमानी
मुह खोलो ना कर नादानी
अगर चले विपरीत कहीं भी
तेरी फसल पे पत्थर पानी
परफार्मेंस  अप्रेजल आया
भ्रष्टाचार को और बढाया
जिसने बंदी हमें बनाया
अब लगाम उन के हाथो में
चाहे रथ वे जैसे हांके
बड़ी गुलामी -
सुबह शाम कब ?? 
बच्चे -बूढ़े हों ??
लगे रहो बस निकले दम

सुरेन्द्र कुमार शुक्ल भ्रमर ५
31.07.2011







दे ऐसा आशीष मुझे माँ आँखों का तारा बन जाऊं

Thursday, July 28, 2011

उनकी ये जुल्फ- घनेरे बादल हैं



उनकी ये जुल्फ- घनेरे बादल हैं

World's Longest Hair (3)
हाथी की सूंड बने
कभी तूफ़ान – कहर ढाते हैं


उनकी मुस्कान – दांत है चपला
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बज्र सी चीर – कभी
दिल को —–चली जाती है




उनकी ये चाल हिरनी सी
बड़ी पापिन है
पीछे खींचे ये -खरगोश के जैसी
शेर के मुंह में -
बड़े प्यार से ——-ले जाती है

(फोटो साभार वर्ल्ड्स लांगेस्ट हेयर और /गूगल/नेट से लिया गया )

शुक्ल भ्रमर ५
जल पी बी २८.७.११ – ८.20 -पूर्वाह्न


दे ऐसा आशीष मुझे माँ आँखों का तारा बन जाऊं

Tuesday, July 26, 2011

सूखी कड़ाही में जलती पूड़ी


सावन का महीना
हरियाली – कजरी
कारे बदरा उमड़ -घुमड़ डराए
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खुरपी -पलरी लिए घास की
अम्मा दौड़ी आई द्वारे
दामाद -बेटी के अचानक
घर आने की खबर सुन
थी सकपकाई
आस पास दौड़
सुब कुछ जुटाई
चूल्हे के पास धुएं में
बैठ बिटिया अम्मा संग
आंसू पोंछ -पोंछ
जी भर के बतियाई
पूड़ी कढ़ी
दामाद आया
कोहनी से मार- रूपा को
“उसने” -खूब उकसाया
“कुछ” कहने को
हलक में अटके शब्द
रूपा को गूंगा बनाये
फिर बिदाई
एक बंधन में बंधी गाय
चले जैसे संग -
किसी कसाई
गले लिपटी रोये
आंसू से ज्यों सारी यादें
धोती लगे – नीर इतना -
ज्यों बाढ़ सब कुछ
बहा ले जाए
अम्मा की मैली पुरानी साड़ी
सूखी कड़ाही में जलती पूड़ी
ज्यों सूखे सर में फंसा कमल
छटपटाना
घर का गिरता -छज्जा -कोना
देखती –चली —गयी ……
और कल सुबह
खबर आ पहुंची
स्टोव फट गया
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अरी ! बुधिया करमजली
रूपा ..तेरी बिटिया
तो जल गयी ………
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(सभी फोटो साभार गूगल /नेट से लिया गया )
———————-
सुरेन्द्र कुमार शुक्ल “भ्रमर”५
जल पी बी २७.०७.२०११ ५.४५ पूर्वाह्न
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दे ऐसा आशीष मुझे माँ आँखों का तारा बन जाऊं

Sunday, July 24, 2011

माया नगरी है ये सनम (बेवफाई )


माया नगरी है ये सनम 
यहाँ बड़ा जादू है 
देते हैं दूध - उन्हें 
खून -  बना देते है 
उड़ चले जिस्म - कहीं 
जमी नहीं होती है 
काट देते हैं कभी- यार 
दिलदार  - बड़े माहिर हैं 
रक्त एक बूँद भी -गिर ना पाए 
बेवफा ये--- बड़े जालिम हैं 
माजरा- ये जग  जाहिर है "भ्रमर "
फिर भी-- न जाने क्यों -- हम 
फंसे चले जाते हैं !!

शुक्ल भ्रमर ५ 
जल पी बी १८.७.११ - ८.१५   -मध्याह्न 



दे ऐसा आशीष मुझे माँ आँखों का तारा बन जाऊं

Wednesday, July 20, 2011

काहे खून तेरा प्यारे अब खौलता नहीं ---??



काहे खून तेरा प्यारे अब
खौलता नहीं —??
तोड़ लिया कोई फूल तुम्हारा
खाली हो गयी क्यारी
उजड़ जा रहा चमन ये सारा
गुल गुलशन ये जान से प्यारी
खुश्बू तेरे मन जो बसती
मिटी जा रही सारी
पत्थर क्यों बन जाता मानव
देख देख के दृश्य ये सारे
खींच रहा जब -कोई साड़ी
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काहे खून तेरा प्यारे अब
खौलता नहीं —??
(फोटो साभार गूगल देवता /नेट से लिया गया )
————————–
साँप हमारे घर में घुसते
अंधियारे क्यों भटक रहा
जिस बिल से ये चले आ रहे
दूध अभी भी चढ़ा रहा ?
तू माहिर है बच भी सकता
भोला तो अब भी भोला है
दोस्त बनाये घूम रहा
उनसे अब भी प्यार जो इतना
बिल के बाहर आग लगा
बिल में ही रह जाएँ !
काट न खाएं !
इन भोलों को !!
लाठी क्यों ना उठा रहा ??
काहे खून तेरा प्यारे अब
खौलता नहीं —??
————————
तोड़-तोड़ के पत्थर दिन भर
बहा पसीना लाता
धुएं में आँखें नीर बहाए
आधा पका – बनाता
बच्चों को ही पहले देने
पत्तल जभी सजाता
मंडराते कुछ गिद्ध -बाज है
छीन झपट ले जाते
कल के सपने देख देख के
चुप क्यों तू रह जाता
काहे खून तेरा प्यारे अब
खौलता नहीं —??
—————————
शुक्ल भ्रमर ५
२०.०७.२०११ जल पी बी
८.५५ पूर्वाह्न
दे ऐसा आशीष मुझे माँ आँखों का तारा बन जाऊं

Tuesday, July 19, 2011

वेवफाई - (भ्रमर गीत )


बेवफाई ही दुनिया में भरी जा रही -हम आँख मूँद सम्मोहित हो बलि के बकरे सा पीछे -पीछे चल पड़ते हैं -नहीं जानते कहाँ किस ओर कहाँ मंजिल है हमारी -तिलक लगाये हमारी कुछ पूजा करने को फूल माला सजाये वे लिए बढे जाते हैं –और हम न जाने क्यों सब जाना सुना अतीत का अतीत में खोये मन्त्र मुग्ध से प्यार और प्रेम की परिभाषा खोजते एक बियाबान अँधेरे में बढ़ते ही चले जाते हैं तब तक जब तक कि…….
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(फोटो फेस बुक /गूगल/नेट से साभार लिया गया )
हुस्न की देवी को
सर-आँखों से लगा के पूजा !
भक्त पे बरसेंगे कभी फूल
दिल ने था- ये ही सोचा !
कतरे लहू के -कुछ हथेली देखे
दुनिया की बातों को यकीनी पाया !
फूल बन जाते हैं पत्थर भी कभी
सर तो फूटेगा ही ” भ्रमर ”
ओखली में जो डालोगे कभी !!
शुक्ल भ्रमर ५
अब आगे कुछ क्षणिकाओं का सिला …
भ्रमर का झरोखा दर्द-ये -दिल
जल पी बी १८.७.११ – ८ -मध्याह्न
दे ऐसा आशीष मुझे माँ आँखों का तारा बन जाऊं

Friday, July 15, 2011

"दो रोटी" के खातिर अब तो "तिलक लगा" घर वाले भेजें


उनको हमने दिया "सुदर्शन" 
"भ्रमर " कहें रखवाली लाये !
कौन जानता -सभी शिखंडी 
नाच-गान ही मन को भाए !!
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मन छोटा कर घर से अब तो 
"जान हथेली"  ले   निकले !
"दो रोटी" के खातिर अब तो 
"तिलक लगा" घर वाले भेजें 
--------------------------
छद्म युद्ध है- नहीं सामने 
योद्द्धा ना -   कोई शर्तें !
"कायर" ही अब भरे हुए हैं 
पीठ में ही    छूरा   घोंपें !!
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ह्रदय काँपता अब संध्या में 
दिया जले या बुझ जाए !
"रोज-रोज आंधी" आती है 
जो उजाड़ सब कुछ जाए !!
---------------------------------
"ढुलमुल नीति " से भंवर फंसे हैं 
दो कश्ती पर पाँव रखे !
एक किनारे पर जाने को 
साहस -नहीं -ना-दम भरते !!
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चिथड़े पड़े "खून" बिखरा है 
"ह्रदय विदीर्ण" हुआ देखे !
आँखें नम हैं धरती   भीगी 
"जिन्दा लाश" बने बैठे !!
--------------------------
अर्धनग्न -महफ़िल में मंत्री 
शर्म -हया सब बेंच खोंच के !
हो मदान्ध-    हैं  बौराए ये 
इस पीड़ा- क्षण -जा बैठे !!
--------------------------
हंसी -ठिठोली -सुरा-  सुन्दरी 
जुआ -दांव में बल आजमायें 
ये क्या जानें  - पीर  परायी 
निज ना मरा -दर्द क्या होए !!
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ना जाने क्यों पाले कुत्ते 
बोटी नोचे  -  देख रहे 
ये राक्षस हैं  - पापी ये 
"धर्मराज" बन कर बैठे !!
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जो तुम "तौल नहीं सकते सम" 
गद्दी से - मूरख - उठ-  जाओ !
"हाथ" में अब भी कुछ ताकत तो 
"उसको" तुम फ़ौरन लटकाओ !!
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भ्रमर ५ 
१५.७.२०११ जल पी बी १० मध्याह्न 


दे ऐसा आशीष मुझे माँ आँखों का तारा बन जाऊं

Thursday, July 14, 2011

तीन बीबियाँ प्यारी न्यारी

तीन बीबियाँ प्यारी न्यारी
वो बीबी तो प्रेम मूर्ति है
स्नेह छलकता पीयूष घट
सात जो संग फेरे लेती है
सात जन्म प्यारा बंधन
जब भी मिलो तुम्ही पिय मेरे
एकादशी प्रदोष रहे व्रत
प्यार लुटाती संग संग खाती
सुख -दुख आधा बाँट फिरे
अर्धांगिनी है पूजी जाती
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वो सुहाग की रात न भूले
दुल्हन अब भी बनी रहे
सजना उसका आभूषण है
क्या सोना है ? भोर हुए उठ खड़ी रहे
चपला सी दिन भर फिरती वो
कभी न लगता थकी है ये
फुलवारी को सींच खिलाये
संस्कृति अपनी सब सिखलाये
बच्चे से बूढ़े सब भाई
जुटें -गृह लक्ष्मी -गृह स्वर्ग बनाये
पति की प्यारी राम दुलारी
रहे समर्पित जीवन भर
रोते राम थे वन वन भटके
बिन सीते -कहता रामायण !!
————————————
ये बीबी तो पढ़ी लिखी है
“स्वतंत्रता” पहचाने
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रात निकलती सुबह को आती
मन भर सोना जाने
कुछ पट्टी कुछ आभूषण से
मूर्ति बनी वो सजी रहे
कृत्रिम रंग से लाली छाये
खाते -पीते- छुपे- डरे
दस-दस बॉय फ्रेंड रख कर के
पति सा उनको जाने -माने
कितने दुर्गम काज किये ये
थक हारी घर आ बेचारी
पति से अपने पाँव दबा ले
स्वतंत्रता ही पढ़ी लिखी ये
सब करार पर होता
शादी -बच्चे यदि मन चाहे
या जबरन ही सब कुछ होता
प्रेम प्यार परिभाषा दूजी
व्याख्या करती तुझे बता दे
कुछ पैसे ला कहीं कमाए
बिउटी पार्लर से बच जाए
चारा सा ये घर में डाले
हुकुम चला के भाई अपना
बंटवारा कर -बाड़- लगा दे
ये भी प्यारी बहुत उन्हें है
प्यार- एक व्यापार -जो मानें !!
———————————-
और एक बीबी है -ये भी
सामंजस्य है -कूट-कूट कर भरा हुआ
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पढ़ती लिखती काम पे जाती
पति- बच्चे सब साथ -लिए !
साथ साथ सब मिल कुछ करती
सब का हिय सम्मान लिए !
घर से बाहर कर्म अनेकों
फिरती है मुस्कान लिए !
पंख फैलाये उडती है ये
जल -थल -नभ सब नाप लिए !
सुखानुभूति -बस प्रेम से मिलती
शोध किये -सब जान लिए !
सुबह निकलती शाम को फिरती
दृश्य अनेकों देख रही- ये !
राह मलिन है कहीं कहीं तो
कौए -कुत्ते झाँक रहे !
चन्दन में विष नहीं व्यापता
अगल बगल में चाहे उसके
लिपटे जितने सांप रहें !!
( सभी फोटो गूगल /नेट से साभार लिए गए यदि किसी को कोई आपत्ति होगी तो निकाल दिया जायेगा)
सुरेन्द्र कुमार शुक्ल “भ्रमर “५


दे ऐसा आशीष मुझे माँ आँखों का तारा बन जाऊं

Wednesday, July 13, 2011

दुर्घटना फल लापरवाही का -

दुर्घटना फल लापरवाही का -
पठान कोट से जालंधर पंजाब आ रहे दो ट्रक की भिडंत देख ह्रदय काँप गया ,
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यों तो रोज ही कुछ न कुछ दुर्घटनाएं देख मन भर चुका है और हमेशा इसे सहने सुनने के लिए तैयार रहता है फिर भी जब कुछ आप के सामने या आस पास घटे तो मन को दर्द / पीड़ा और कराह देख बहुत ही चोट पहुँचती है और हम बहुत कुछ सोचने पर मजबूर हो जाते हैं -
आज की घटना में पठानकोट से जालंधर आ रहे- काला बकरा रेलवे स्टेशन के निकट- एक ट्रक ने सामने जा रहे दूसरे ट्रक को जो की गति धीमी कर बांये मुड़ना चाह रहा था करीब सुबह छः बजे, जोरदार टक्कर मार दी, सामने जा रहे ट्रक का केवल टायर फटा और पीछे के ट्रक चला रहे खलासी की दोनों टाँगे टूट गयी -पेट में गहरी चोट -सिर में गहरी चोट -सड़क पर खून फैला -देखने वाले की भी हालत ख़राब हो जाती -गंभीर अवस्था में, जिन्हें की प्रभु ही शायद बचा सके -बेहोशी की हालत में आनन् फानन में अम्बुलेंस से जालंधर अस्पताल रवाना किया गया -
उसका वास्तविक चालक जो की खलासी को ट्रक चलाने को दे सो रहा था भी बेहोश, न जाने कितना क्या कहाँ लगा -
हमारा मकसद सिर्फ इतना कि हम क्यों ये सब देख गंभीर नहीं -लापरवाही बरतते चले जा रहे , अपनी जान गंवाने –
आइये गाडी चलाते वक्त कुछ बातों का ध्यान रखें -
१- अगर थके हैं-नींद में हैं तो कृपया आराम कर , कहीं भी रुक -चाय पानी पी -मुह धो फिर -गाडी चलायें -या केवल विश्राम करें -
२- सुबह या रात खाली सडक देख गाडी को तेज न दौडाएं कुछ भी बाधा पल भर में आ जाती है सीमा में रहें
३-कभी भी मुख्य सडक पर तो नए चालकों को गाड़ी चलाने के लिए हरगिज न दें-सिखाने के और भी जगह खाली मैदान खाली सड़के हैं
४-नशे की लत से बचें और नशे की हालत में कहीं आराम ही फरमाएं दूसरों की जान भी जोखिम में न डालें
५-हमेशा ओवर टेकिंग करते समय अपनी संतुलित चाल का ध्यान रखें और सिग्नल पर नजर रखें -जल्दबाजी में ओवर टेक न करें
६-गाडी कहाँ चलायी जा रही है वहां की भौगोलिक स्थिति जैसे पहाड़ी , घाटी या घुमावदार रास्ते में समतल की अपेक्षा लगभर आधी या बहुत धीरे ही चलें -शहर में हों तो वहां के नियम अगल बगल से गाड़ियों के दौड़ने और अति गति सीमा में दौड़ रही गाड़ियों का ख्याल रखें
७-मालवाहक गाड़ियों में ओवर लोड कतई न करें और पहाड़ी जगह में तो बिलकुल नहीं -कुछ लम्बी चीजें सरिया सी लदी हैं तो लाल झंडे का इस्तेमाल और रात में लाल बत्ती का इस्तेमाल अवश्य करें
८-जगह जगह पर लगे चेतावनी बोर्ड को पढ़ें नजर अंदाज न करें
अगर हम इस तरह की बातों का ध्यान रखें तो अपने बच्चों घर परिवार को एक संकट देने और अपना अमूल्य जीवन गंवाने से बच सकते हैं –
९- आप के दायें बाएं लगे शीशे बहुत ही काम के हैं इन्हें सही अवस्था में रखें और इनका उपयोग करते रहें याद रखें चालक को छः आँखें रखनी होती है हर तरफ देखने के लिए

१०- अपने वाहन के मुख्य कलपुर्जों की -टायर की जांच नियमित करते रहें !

पल झपकते ही कुछ भी हो जाता है कृपया याद रखें -सावधानी हटी और दुर्घटना घटी !


११- कोई भी वाहन चलाते समय कृपया मोबाईल फोन पर बात न करें , ये आप का दिल और दिमाग आप से होती विषय वस्तु पर ले कर चला जाता है और आप का एक पल भी सड़क पर से दिमाग हटना दुर्घटना को निमंत्रण दे सकता है ! कृपया धीरे हों गाड़ी एक तरफ लगा के बात कर फिर आगे बढ़ें !


सब की यात्रा शुभ और मंगलमय हो
शुक्ल भ्रमर ५
१३.०७.२०११
जल पी बी



दे ऐसा आशीष मुझे माँ आँखों का तारा बन जाऊं

Tuesday, July 12, 2011

राज-कमल है पूजा जाता महल बसे दरबार लगे

राज-कमल है पूजा जाता 
महल बसे दरबार लगे 
रखवाली खुशहाली उसके 
आगे पीछे चार लगे 
----------------------
कीचड-कमल गाँव यूं रहता 



भैंसों के सींगों से डरते 
खिला -तभी भी उसके जैसा 
सरसिज-नभ में जैसे चंदा !!
खुश अवाम को रखता यूं है 
तारे जैसे हों मयंक से आँख मिलाये 
टिम-टिम टिम-टिम जलते बुझते 
अंधियारे को रहते कोसों दूर भगाए 
(photo with thanks from googal/net)
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राज -कमल से मिलने दौड़े 
गिने चुने कुछ लोग पधारें 
वो महलों अठखेली करता 
मस्त रहे -निज रूप निहारे !!
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इधर कमल मुस्काते -डोले 
पवन के संग-संग ले हिचकोले 
लहरों के संग खेले जाए 
देख उसे मेला लग जाए !!
नहीं कोई बंधन-सीमा है 
जाति -धर्म ना धन-निर्धन का 
जो भी आये ख़ुशी ख़ुशी वे 
एक दूजे को गले लगा ले !!
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पुरवा कभी तो -पछुआ डोले 
मौसम पल में अदले -बदले 
उधर महल सरसिज की शोभा 
में -नित नूतन सपने सजते 
कीचड पत्ते रास न आते 
नाल समेत वे कमल उखाड़े 
दूर फेंक- फिर -बेदर्दी ना नजर मिलाते !!
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इधर कमल आया निखर पर 
दो से पैदा चार हुए 
चार घूम -चहुँ दिशि में छाये 
मुस्काएं-सब को ललचायें 
गले मिलाएं -खुश कर जाएँ 
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"भ्रमर' कहें हे ! प्रभु कीचड से 
कमल-खिले -गुण धरती-माँ का !
धैर्य ,प्रदाता, सहनशीलता 
हरियाली -मुस्कान सभी को जाये देता !!
दे ऐसा माहौल इसे तू 
इस सरसिज सा -प्यार हमेशा !
जहाँ -पर   इसे खिलाये !!
नीर कभी भी ना कम होए !
नीरज - मन- ना  कबहूँ मुरझाये !!
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शुक्ल भ्रमर ५- 12.7.2011-१० मध्याह्न 
जल पी बी 

दे ऐसा आशीष मुझे माँ आँखों का तारा बन जाऊं

Friday, July 8, 2011

सच तो शिव है -शिव ही करता नाग सरीखा संग-संग रहता


सच एक हंस है 
पानी दूध को अलग किये ये 
मोती खाता -मान-सरोवर डटा  हुआ है 
धवल चाँद है 
अंधियारे को दूर भगाता
घोर अमावस -अंधियारे में 
महिमा अपनी रहे बताता 
ये तो भाई पूर्ण पड़ा है !
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सच-सूरज है अडिग टिका है 
लाख कुहासा या अँधियारा 
चीर फाड़ हर बाधाओं को 
रोशन करने जग आ जाता 
प्राण फूंक हर जड़-जंगम में 
नव सृष्टि ये  रचता जाता 
सुबह सवेरे पूजा जाता !!
------------------------ 
सच- आत्मा है - परमात्मा है 
कभी मिटे ना लाख मिटाए 
चाहे आंधी तूफाँ  आये 
चले सुनामी सभी बहाए 
दर्द कहीं है लाश बिछी है 
भूखा कोई रोता जाये 
कहीं लूट है - घर भरते कुछ 
सच - दर्पण है सभी दिखाए !!
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सच तो शिव है -शिव ही करता 
नाग सरीखा संग-संग रहता 
जिसके पास ये आभूषण हैं 
ब्रह्म -अस्त्र ये- ताकत उसमे 
पापी उसके पास न आयें 
राहू-केतु से झूठे राक्षस 
झूठें ही बस दौड़ डराएँ 
खाने धाये !!
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सच इक आग है - शोला है ये 
धधक रहा है चमक रहा है 
उद्भव -पूजा हवन यज्ञं में 
आहुति को ये गले लगाये 
प्राणों को महकाता जाए 
श्री गणेश -पावन कर जाये 
भीषण ज्वाला - कभी नहीं जो बुझने वाला 
लंका को ये जला जला कर 
झूठी सत्ता- झूठ- जलाकर 
अहम् का पुतला दहन किये है 
सब कुछ भस्म राख कर देता 
गंगा को सब किये समर्पित 
मूड़ मुड़ाये सन्यासी सा 
बिना सहारा-डटा खड़ा है !!
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सच ये कोई नदी नहीं है 
जब चाहो तुम बाँध बना लो 
ये अथाह है- सागर- है ये 
गोता ला बस मोती ढूंढो 
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सच ये भाई ना घर तेरा 
जाति नहीं- ना धर्म है तेरा 
जब चाहो भाई से लड़ -लड़ 
ऊँची तुम दीवार बना लो 
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सच पंछी है मुक्त फिरे है 
आसमान में -वन में -सर में 
एकाकी -निर्जन-जीवन में 
सच की महिमा के गुण गाये 
कलरव करते विचरे जाए !!
-----------------------------------
सच कोमल है फूल सरीखा 
रंग बिरंगा हमें लुभाए 
चुभते कांटे दर्द सहे पर 
हँसता और हंसाता जाये 
जीवन को महकाता  जाये 
अमर बनाये !!
-----------------------------
सच कठोर है -ये मूरति है 
सच्चाई का  दामन थामे 
पूजे मन से जो -सुख जाने 
यही शिला है यही हथौड़ा 
मार-मार मूरति गढ़ता है 
सुन्दर सच को आँक आँक कर 
सच्चाई सब हमें दिखाता
आँखें फिर भी देख न पायें 
या बदहवास जो सब झूंठलायें  
ये पहाड़ फिर गिर कर भाई 
चूर चूर सब कुछ कर जाए !!
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सुरेन्द्र कुमार शुक्ल भ्रमर 
७.७.२०११ ६.२६ पूर्वाह्न जल पी बी 



दे ऐसा आशीष मुझे माँ आँखों का तारा बन जाऊं