Wednesday, November 16, 2011

जब अधर छुए तो कांपा तन मन -भ्रमर की माधुरी





दे ऐसा आशीष मुझे माँ आँखों का तारा बन जाऊं 

3 comments:

प्रेम सरोवर said...

बहुत कुछ पठनीय है यहाँ आपके ब्लॉग पर-. लगता है इस अंजुमन में आना होगा बार बार.। मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है । धन्यवाद !

Surendra shukla" Bhramar"5 said...

प्रेम सिंह -प्रेम सरोवर जी धन्यवाद आप का स्वागत है आते रहिये अपना स्नेह बरसाते रहिये ...--सुन्दर लगा सब पठनीय है सुनकर ...आभार
भ्रमर ५

सागर said...

very nice....