Monday, October 17, 2011

इस पर दाग न लगे (मै और मेरा दर्पण)

मै और मेरा दर्पण-
हमजोली हैं
चोली-दामन का साथ है
जन्मों के साथी हैं
गठ-बंधन है इससे मेरा
अब तक साथ निभाता
साथ-साथ चलता
इतनी दूर ले आया है
जो मै देख नहीं सकता
इसने दिखाया है
मेरा चेहरा -मेरी पीठ -मेरा भूत
बन के देवदूत
निश्छल -निष्कपट
आत्मा है इसकी
सच कह जाता है
मुझ सा
भले ही पत्थर उठे
देख घबराता है
टूटा नहीं -अब तक
प्रार्थना है हे प्रभू
इस पर दाग न लगे
न ये टूटे -फूटे
ना ये बदले
नहीं तो आज कल तो
दर्पण भी न जाने क्या क्या
चटपटा -रोचक
त्रिआयामी-खौफनाक
मंजर दिखाते हैं
पैसा कमाते है -उनके लिए
खुद तो शूली पे टंग
दर्शक को लुभाते हैं -
इतना झूठ -फरेब देख -चैन से
न जाने कैसे ये
खाते हैं -सोते हैं
दर्पण कहलाते हैं ???
जब मै अँधेरे में
या अँधेरा मुझमे समाता है
न जाने क्यों ये दर्पण
साथ छोड़ जाता है ??
कुरेदता है बार-बार
नींदें हराम किये
मुझको जगाता है
बेचैन कर मेरी आत्मा को
रौशनी में
खींच ही लाता है !!!
——————
सुरेन्द्र कुमार शुक्ल “भ्रमर” ५
८.३० पूर्वाह्न जल पी बी
१८.१०.2011


दे ऐसा आशीष मुझे माँ आँखों का तारा बन जाऊं

15 comments:

Kamal Chaurasia said...

बहुत सुन्दर लिखा है आपने, बधाई हो !!

Pallavi said...

सार्थक अभिव्यक्ति बधाई
समय मिले कभी तो आयेगा मेरी पोस्ट पर आपका स्वागत है
http://mhare-anubhav.blogspot.com/2011/10/blog-post_18.html

Maheshwari kaneri said...

बहुत सुन्दर सार्थक अभिव्यक्ति..

जाट देवता (संदीप पवाँर) said...

आज आपकी रचना के बारे में सिर्फ़ एक शब्द "गजब" और कुछ नहीं।

संजय भास्कर said...

अरे कमाल का लिखा है आज तो……………मेरे पास तो शब्द कम पड गये है तारीफ़ के लिए

संजय भास्कर said...

जरूरी कार्यो के कारण करीब 17 दिनों से ब्लॉगजगत से दूर था
आप तक बहुत दिनों के बाद आ सका हूँ,

दिगम्बर नासवा said...

प्रभावी रचना ... बहुत ही कमाल का लिखा है आपने ... मज़ा आ गया ...

रविकर said...

बहुत बढ़िया प्रस्तुति ||

बधाई स्वीकारें ||

Surendra shukla" Bhramar"5 said...

चौरसिया जी आभार प्रोत्साहन हेतु आप के ब्लॉग पर गया सुन्दर जानकारी ..लेकिन कुछ लिख नहीं पाया फिर आऊँगा ..जय माता दी

भ्रमर ५

Surendra shukla" Bhramar"5 said...

पल्लवी जी आभार प्रोत्साहन हेतु आप के ब्लॉग पर गया सुन्दर रचना प्रेम की अभिव्यक्ति और मायने
धन्यवाद
भ्रमर

Surendra shukla" Bhramar"5 said...

माहेश्वरी कानेरी जी अभिवादन और आभार प्रोत्साहन हेतु अपना स्नेह कायम रखें
धन्यवाद
भ्रमर

Surendra shukla" Bhramar"5 said...

प्रिय संदीप जी अभिवादन और आभार प्रोत्साहन हेतु आप का गजब कहना सर आँखों पर ..हर का दून भी घूम आये हम - अपना स्नेह कायम रखें
धन्यवाद
भ्रमर

Surendra shukla" Bhramar"5 said...

प्रिय संजय भाई जी अभिवादन और आभार प्रोत्साहन हेतु देर से आये लेकिन ननिहाल की यादें और झरोखा संग्रहालय का ले आये ये कहाँ कम है अब - अपना स्नेह कायम रखें
धन्यवाद
भ्रमर

Surendra shukla" Bhramar"5 said...

प्रिय दिगंबर जी प्रोत्साहन हेतु आभार आज कल कहीं व्यस्त हैं क्या कम हाजिरी रही ...नयी रचनाएं ?
धन्यवाद
भ्रमर

Surendra shukla" Bhramar"5 said...

प्रिय रविकर जी आभार प्रोत्साहन हेतु ..अच्छा छक्का मारा आपने डंकी को शेर ?
धन्यवाद
भ्रमर