Thursday, September 22, 2011

अश्क नैन ले -मोती रही बचाती

आइये थोडा हट के कुछ देखें २६ और ३२ रुपये में दिन भर खाना खा लें बच्चों को पढ़ा लें संसार चला लें प्यार कर लें हनीमून भी मना लें ………कैसा है ये प्यार ……………….
क्या आयोग मंत्री तंत्री नेता के दिल और दिमाग नहीं होता ………….
ऊपर से कुदरत की कहर गिरा हुआ घर बना लें रोज जगह बदलते हुए भागते फिरें जो बच जाएँ ….
अश्क नैन ले -मोती रही बचाती

इठलाती -बलखाती
हरषाती-सरसाती
प्रेम लुटाती
कंटक -फूलों पे चलती
पथरीले राहों पे चल के
दौड़ी आती
तेरी ओर
“सागर” मेरे-तेरी खातिर
क्या -क्या ना मै कर जाती
नींद गंवाती -चैन लुटाती
घर आंगन से रिश्ता तोड़े
“अश्क” नैन ले
“मोती” तेरी रही बचाती
दिल क्या तेरे “ज्वार” नहीं है
प्रियतम की पहचान नहीं है
चाँद को कैसे भुला सके तू
है उफान तेरे अन्तर भी
शांत ह्रदय-क्यों पड़े वहीं हो ?
तोड़ रीति सब
बढ़ आओ
कुछ पग -तुम भी तो
बाँहे फैलाये
भर आगोश
एक हो जाओ
समय हाथ से
निकला जाए !!
———————-
सुरेन्द्र कुमार शुक्ल “भ्रमर”५
८.३० पूर्वाह्न यच पी २२.०९.२०११
दे ऐसा आशीष मुझे माँ आँखों का तारा बन जाऊं

8 comments:

रविकर said...

अगर आपकी उत्तम रचना, चर्चा में आ जाए |

शुक्रवार का मंच जीत ले, मानस पर छा जाए ||


तब भी क्या आनन्द बांटने, इधर नहीं आना है ?

छोटी ख़ुशी मनाने आ, जो शीघ्र बड़ी पाना है ||

चर्चा-मंच : 646

http://charchamanch.blogspot.com/

रविकर said...

बत्तीसी दिखलाय के, पच्चीस कमवाय के
आयोग आगे आय के, खूब हलफाते हैं |
दवा दारु नेचर से, कपडे फटीचर से
मुफ्तखोर टीचर से, बच्चा पढवाते हैं |
सेहत शिक्षा मिल गै , कपडा लत्ता सिल गै
छत तनिक हिल गै, काहे घबराते हैं ?
गरीबी हटाओ बोल, इंदिरा भी गईं डोल,
सरकारी झाल-झोल, गरीब घटाते हैं ||

Surendra shukla" Bhramar"5 said...

प्रिय रविकर जी शानदार क्यों नहीं शुक्रवार जरुर मिलने की कोशिश होगी ...आप की मेहनत और रंग लाये ...आनंद आये ..आप जमें रहें ..
आप की वाणी में यों ही सरस्वती विराजमान रहें
भ्रमर ५

आशा said...

बहुत खूब लिखा है |
आशा

रविकर said...

http://charchamanch.blogspot.com/

Surendra shukla" Bhramar"5 said...

आदरणीया आशा जी अभिवादन रचना पसंद आई और आप से प्रोत्साहन मिला ख़ुशी हुयी
आभार
भ्रमर ५

Rajesh Kumari said...

bahut khoobsurat,behtreen bhaav.bahut pasand aai yeh rachna.aabhar.

Surendra shukla" Bhramar"5 said...

आदरणीय राजेश कुमारी जी रचना पसंद आई सुन हर्ष हुआ बहुत बहुत आभार आप का

भ्रमर ५