Friday, September 9, 2011

माँ की दहाड़

माँ की दहाड़
—————————–
मन करता है गला घोंट दूं
तेरा या खुद मै मर जाऊं
हे आतंकी पुत्र हमारे
क्या मुंह मै दुनिया दिखलाऊँ !!
—————————————
न्याय की देवी “पट्टी” खोलो
घर तेरे क्या होता देखो
अब सबूत जो माँगा देवी
दुनिया तेरी हंसी ठिठोली
———————————-
जिनके चिथड़े उड़े पड़े हैं
जिनका रक्त चढ़ा है माँ पर
वो तो मेरे अमर पुत्र हैं
वो शहीद हैं कालजई हैं
वो प्यारे हैं सांस हमारी
तारे हैं मेरी आँखों के
सूरज हैं वे चंदा मेरे
मै कठोर वंजर धरती हूँ
प्यार की सदियों से हूँ प्यासी
उसने सींचे रुला दिया है
अश्क नैन ला दिखा दिया है
पूत हैं वे पावन अभिन्न हैं
अंग प्रत्यंग प्राण हैं मेरे
वन्दनीय हैं अजर अमर हैं
जब तक मै हूँ धरती धड़कन
नाम उन्ही का हो स्पंदन
गौरव गाथा उनकी गाऊँ
सदा उन्ही को कोख में पाऊँ
————————————–
तूने छुरा घोंप दिया है
पीठ के पीछे वार किया है
बड़ा घिनौना काम किया है
कायर सा ये कृत्य किया है
जिसने दूध पिला कर पाला
छाती उसकी जहर है घोला
नफरत की आंधी में जिसने
ले जा नंगा तुझे किया है
नंगे हैं -काले मुख वाले
दो टुकड़ों में खुद हैं पाले
जिनका ठांव न ठौर ठिकाना
दुनिया बदलें उन ने ठाना
सगे सम्बन्धी कीड़े सा जीते
कडवा घूँट रोज ही पीते
जहाँ भीड़ हो कफ़न लिए वो
गूंगे-जा हर अश्क हैं पीते
छिन्न -भिन्न कुछ अंग जो तेरे
दिखे कहीं माँ- सब मुंह फेरे
माँ अन्तः में घुट -घुट रोती
सुख होता जो बाँझ ही होती
तेरा कफ़न वो उन पर डारे
जो मर कर भी माँ को प्यारे
माँ के दिल में प्यार भरा है
आँखों में कुछ नीर भरा है
उसने ये जल सुर पर वारे
असुर तभी तो हरदम हारे !!
शुक्ल भ्रमर ५
८.९.२०११ हि प्र १.३० पूर्वाह्न

दे ऐसा आशीष मुझे माँ आँखों का तारा बन जाऊं

10 comments:

रविकर said...

सुन्दर --
बधाई --
प्रेरणा आपकी

घोप कर छूरा नुकीला, मातु से आकर कहे,
हाय मैंने क्या किया, अश्रु भी अविरल बहे |
दर्द जिनको दे रहा था, चूर सत्ता-मद में वे--
विस्फोट बम का व्यर्थ जो निर्दोष जन सहता रहे ||

Kailash C Sharma said...

बहुत मर्मस्पर्शी सुंदर अभिव्यक्ति।

Rajesh Kumari said...

bahut achchi lajabaab dil ko choo lene vaali prastuti.

जाट देवता (संदीप पवाँर) said...

माँ तो माँ होती है।

uljheshabd said...

बहुत उद्वेलित किया आपकी इन पंक्तियों ने....बहुत सार्थक और उत्तम रचना ...

Surendra shukla" Bhramar"5 said...

प्रिय रविकर जी बहुत सुन्दर रचना आप की -
रचना ने मन को छुवा आप के सुन हर्ष हुआ -प्रेरणा आप की सुन और अच्छा लगा
भ्रमर५

Surendra shukla" Bhramar"5 said...

प्रिय कैलाश जी अभिवादन
रचना मर्मस्पर्शी लगी सुन हर्ष हुआ

भ्रमर५

Surendra shukla" Bhramar"5 said...

आदरणीया राजेश कुमारी जी

रचना ने आप के मन को छुवा और भाव अच्छे लगे लिखना सार्थक रहा

आभार

भ्रमर५

Surendra shukla" Bhramar"5 said...

प्रिय संदीप जाट देवता जी सच कहा आप ने माँ तो माँ ही होती है अतुलनीय ...

प्रोत्साहन के लिए आभार

भ्रमर ५

Surendra shukla" Bhramar"5 said...

उलझे शब्द जी अभिवादन रचना ने आप को उद्वेलित किया सार्थक लगी लिखना साकार रहा

आभार प्रोत्साहन हेतु

भ्रमर ५