Saturday, June 25, 2011

बाघ के मुह में खून लग गया !!


मात पिता से सीखी संस्कृति
सीधा सरल सुहाया मुझको !
लाल बहादुर -गाँधी जैसे कितने सारे
खोज -खोज आदर्श बनाया !!
—————————————
ईमां -धन -की गठरी बांधे
लिए पोटली निकल पड़ा
जीवन पथ दुर्गम इतना था
चोर उचक्के ठग ही मिलते
माया मोह लालसा दे- दे
दोस्त बनो -या -आ-कह देते
——————————
पोटली उन्हें अगर ये दे दूं
तो भूखे मर जाऊं !
दोस्त अगर इनका बन जाऊं
जीवन सारा – चोर कहाऊँ !!
……………………………………..
मै ईमां- धन लेकर बढ़ता
घायल- रोज -शिकार -हुआ
बाघ चढ़े सब छाती मेरे
lion_zebra
(फोटो साभार गूगल /नेट से )
बाघ के मुह में खून लग गया !!
______________________
अब गुर्राते मुझे डराते
खून चूस लेंगे सारा !
धन्य मनाओ मूरख मेरी
अब तक तुझे नहीं मारा !!
————————————-
इक्के दुक्के जो भी अब तो
राह में मेरी आये !
जख्म लिए- चीखें- चिल्लाएं
इनको राम बचाए !!
——————————
बाघ के मुह अब खून लगा है
कौन हाथ डाले जबड़े पे !
पीड़ा सब के दिल अब होती
चाहे भी – तो कौन बचाए !!
——————————–
ले मशाल गर साथ बढ़ सको
लाठी डंडे हाथ !
बाघ से भैया बच पाओगे
राम भी देंगे साथ !!
————————
बाघ की शक्ति बहुत बढ़ गयी
ताल ठोंक चिल्लाये !
इस रस्ते पर जो आएगा
छोडूं ना बिन खाए !!
—————————
सत्य अहिंसा सत्य की डोरी
जो जबड़ा ना बाँधा !
कल को सारा खून पिएगा
अभी है चूसा आधा !!
—————————
भेद भाव में बँट या मूरख
कुछ दिन मौज मनाओ !
चक्की में कल पिस ही जाना
एक अभी हो जाओ !!
—————————–
शुक्ल भ्रमर ५



दे ऐसा आशीष मुझे माँ आँखों का तारा बन जाऊं

5 comments:

जाट देवता (संदीप पवाँर) said...

हम सावधान है।

surendrshuklabhramar5 said...

आप सावधान रहिएगा -हैं तो बहुत अच्छी बात है -ह हा -अब तो बाघ से बचना ......

रविकर said...

अन्ध-मोड़ पर छोड के, भागा पापी घोर |
थे पैरों के दो निशाँ, पूरा आदमखोर ||

Surendra shukla" Bhramar"5 said...

आदरणीय रविकर जी - थे पैरों के दो निशाँ ...सुन्दर पूरा आदमखोर - राम ही बचाएं

शुक्ल भ्रमर ५

भ्रमर का दर्द और दर्पण

Mukesh Kumar Mishra said...

समाज की मूल्यहीनता पर अच्छी कविता।

हर तरफ काजल कोठरी ही है..............बचें तो बचें कैसे?