Saturday, May 7, 2011

मै हूँ सजना के दिल की रानी


मै हूँ सजना के दिल की रानी
बखानी का ---   मोर सखी
काज - हुनर जो माँ ने सिखायो
ओ से सासू हैं मोरी जुड़ानी
बखानी का ---   मोर सखी

गुण -संस्कार जो बाबू से पायो
मोरे ससुरा कहें बेटी रानी -
बखानी का ---   मोर सखी

बुद्धि ज्ञान जो भईया से पायो
मानें देवरे लक्ष्मी- भाभी -रानी
बखानी का ---   मोर सखी

घुल मिल खेल भाभी -छोटी सिखायो
बनी बहना ननद देवरानी
बखानी का ---   मोर सखी

रति श्रृंगार प्यार बड़ो भाभी दीन्हो

बने वो तो दीवाने -मै -दिवानी
बखानी का ---   मोर सखी

लाज तेज कुल गाँव जो दीन्हो
मोरे बलमा कहें सच- भवानी
बखानी का ---   मोर सखी

मै हूँ सजना के दिल की रानी
बखानी का ---   मोर सखी



(photo with thanks from other source)
सुरेन्द्र कुमार शुक्ल भ्रमर  5
7.5.2011
७.३० मध्याह्न  



दे ऐसा आशीष मुझे माँ आँखों का तारा बन जाऊं

2 comments:

डॉ॰ मोनिका शर्मा said...

आंचलिक शब्दों छटा न्यारी ही होती है.... सुंदर रचना

Surendrashukla" Bhramar" said...

प्रिय मोनिका जी धन्यवाद
आप की प्यारी प्रतिक्रिया के लिए हाँ आंचलिक रचनाएँ अपने में वहाँ की भाषा -खुश्बू समेटे रहती हैं इसलिए और प्यारी लगती हैं
आप ने इसे समझा सराहा खुशी हुयी