Tuesday, February 15, 2011

“चंदा को देख मन ” हिंदी पोएम्स (कविता ) by Bhramar.

चंदा  को  देख  मन भ्रमर  हिंदी  पोएम्स  (कविता )


(फोटो साभार एक अन्य स्रोत से सुन्दर कार्य में प्रयुक्त)

सागर  सा  शांत   मन ,
सदियों  से  क्लांत  मन ,
गहराई  नाप  नाप ,
पर्वत  से  लड़ा  मन ,
मोती  को  देख  देख ,
डूबे - उतराए ..
उछले - इतराए ,
अब  तक  का  खारा  मन
मीठा  हो  जाये  
चंदा को  देख - देख
लहर  …लहर  जाये >>>>

कल  –कल  करे  नदी ,
सूरज  की  किरणों  से
स्वर्णिम  सजी  नदी
चट्टानों  से  लड़ी ,
झरनों  से    गिरी ,
सोने  व्  चांदी  के
खानों  से  गुजरी
रुकी  नहीं -थमी  नहीं
चलती  ही  जाये  
सागर  की  बाँहों  में
गोता  लगाये
प्रियतम  ‘आगोश में
खोयी  चली  जाए  ….

चंदा को  देख  कुछ
गीत  गुनगुनाये
लहर  …लहर  जाये >>>>

 अंधकार  देख -देख
दुनिया  में  भटका  मन
व्यग्र -उग्र -एकाकी -
अंधड़  से  उजड़ा  मन
देख  एक  रौशनी
खिंचा  चला  जाये
दिया जला  देख  मन
दिवाली  मनाये
चंदा को  देख  मन
हीरे  व्  चांदी  सा
चमक -चमक   जाये >>>>

शरमाई  सी  कली
बंधन -जकड़ी  पली-
फूलों  को  देख - देख
खिलने  को  ‘पंखुरी
मद  से  भरी - बढ़ी
कांटो  को  देख  संग
सहमी  डरी  कली
भौंरे  को  देख  
फिर  साहस  जुटाए
खिली  चली  जाये
चंदा को  देख  मन -
-कमल  
खिला  खिला  जाये >>>>>

मेरा  किशोर  मन
पिजरे से  मुक्त  मन
हरियाली  झरनों  में
फूलों  व्  कलियों  में
खेतों  व्  बगियों  में
प्यारी  सी  गलियों  में
सागर  की  लहरों  में
नदियों  व्   झीलों  में
ढूंढता  फिरे -कोई -
बुलबुल  व्  हंसिनी
कोयल  व्  मोरनी
प्यारी  सी  संगिनी
मोती  चुगे  ये  मन  ..
हंस बना  !
गोरी की  पायल -
की  थिरकन  सुने
  -तो  मन -
गाने  को  गीत ,
व्यग्र  –आकुल -
हुआ  ये  मन ..
पीपल  के  पत्तों  
सा  शोर  मचाये ..
आम  ’ सा  बौराए ..
आई  “बसंती ”-
ने -मन  ललचाये
ये  !
तड़फडाये  ..         
पंख  फड़फडाये ..
उड़ा  चला  जाये >>>>

चंदा को  देख  मन
हहर  –हहर  जाये .

सुरेंद्रशुक्ला भ्रमर
७ .३०  पूर्वाह्न  
१५ .२ .११  जल ( पी.  बी. )

No comments: